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Thursday, July 23, 2009

प्रशासन के कारन है, पेयजल संकट

भीनमाल। महान गणितिज्ञ ब्रह्मगुप्त को AD 628 में आभास होगया था कि भूजल का स्तर धीरे-धीरे निचे जा रहा है। गिरते भूजल स्तर को रोकने के लिए भीनमाल में स्थित सभी तालाबो के केन्द्र में वाव व कुए ख़ुदवाए। बरसात के दिनों में तालाब पानी से पुरा भर जाता था। जिससे तालाब के केन्द्र में बनी वाव व कुआ भी पानी से भर जाता था और ८-१० माह तक पानी में डूबा रहता था। इस प्रकार ब्रह्मगुप्त ने भूजल को रिचार्ज कराने की नई प्रणाली ज्ञात की थी। लेकिन हमारा प्रशासन हमारी धरोवर को नही समझ पाया। पालिका अध्यक्ष के हवाले से एक समाचार प्रकाशित हुआ था कि अधिशाषी अधिकारी के देखरेख में लोग अतिक्रमण कर रहे है। भीनमाल पालिका का एक- एक कर्मचारी करोड्पति है.

भीनमाल का भूजल स्तर निचा जाने के जिम्मेदार पालिका कर्मचारी है। अगर पालिका कर्मचारी तालाबों व नाडियों में कचरा नहीं डलते, तो यह स्रोत्र कभी नष्ट नहीं होते। पालिका ने कचरा डाल कर व रिश्वत लेकर लोगों के कब्जे कराकर तालाबों को नष्ट किया है. जिसका परिणाम अच्छा नहीं होगा. बालोतरा व अलवर वाले हालात 2-3 सालों में यहाँ पर भी देखे जा सकते है. जब प्रशासन पानी के बदले जनता को लाठी देगा.