Bhaskar News Saturday, July 11, 2009 06:49 [IST]
उदयपुर. शहर में दो तरह से बिजली कटौती की जा रही है। तीन घंटे कटौती तो घोषित है और इसके अलावा दिन में कई बार बिजली गुल हो जाती है। इससे शहरवासी परेशान हो गए हैं।
सुबह 8 से 11 बजे तक बिजली बंद रखने के अलावा दस-पंद्रह मिनट के लिए दिन में कई बार बिजली की आंख मिचौनी चल रही है। सिलावटवाड़ी निवासी हैदर खान ने बताया कि बार-बार बिजली गुल होने और थोड़ी देर बाद तेज करंट से जल उठने से वाशिंग मशीन, मिक्सी व ट्यूबलाइटें खराब हो चुकी हैं।
कालकामाता रोड निवासी सुयश पालीवाल की टीवी और डीवीडी प्लेयर खराब हो गया। धोलीबावड़ी मार्ग निवासी चंद्रप्रकाश शर्मा का मोबाइल फोन चर्ा्िजग के दौरान तेज करंट से जल गया। तीज का चौक, धानमंडी, मंडी की नाल, भूपालवाड़ी, मोचीवाड़ा क्षेत्रों में दिन में कई बार पावर का चढ़ाव-उतार बना रहता है। विनायकनगर, बोहरा गणोश क्षेत्र में दिन में कई-कई बार बिजली गुल हुई। हिरणमगरी क्षेत्र की निर्मला मेनारिया ने बताया कि 11की बजाय बिजली दो घंटे देर से आई।
रूपसागर में अक्सर बंद रहती है बिजली
शहर के रूपसागर रोड की कॉलोनियों में अधिकांश समय बिजली बंद रहती है। बीजासननगर, आदिनाथ कॉलोनी में बिजली की लाइन में फाल्ट आ जाने पर बहाल होने में कई घंटे लगते हैं। क्षेत्रवासी सुरपालसिंह ने बताया कि पिछले रविवार को रात 8 बजे बिजली बंद हुई थी जो सोमवार शाम 5 बजे बहाल हो सकी।
इस क्षेत्र में सप्ताह में चार-पांच बार रात में बिजली बंद हो जाती है। अजमेर डिस्कॉम के अधिकारियों को फोन करने पर संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है। भुवाणा में भी कटौती का समय बदला एवीवीएनएल के भुवाणा सब स्टेशन से संबंधित कॉलोनियों में दोपहर 12 से अपराह्न् 3 बजे तक बिजली कटौती का समय निर्धारित किया गया है। इससे भुवाणा गांव, शोभागपुरा, चित्रकूट नगर प्रभावित होंगे।
Saturday, July 11, 2009
किसानों ने रोका रास्ता
भास्कर न्यूज Friday, July 10, 2009 07:11 [IST]
जोधपुर. खेती के लिए कम से कम आठ घंटे बिजली की मांग को लेकर जिले के किसानों ने गुरुवार को डिस्कॉम मुख्यालय के बाहर धरना देकर प्रदर्शन किया। इससे आईटीआई चौराहे से डीजल शेड जाने वाला मार्ग करीब चार घंटे तक बंद रहा। बाद में साढ़े छह घंटे बिजली दिए जाने के आश्वासन पर किसान लौटे। उधर बिलाड़ा में किसानों ने अधिकारियों का घेराव किया और तिंवरी में सहायक अभियंता कार्यालय पर ताले लगा दिए।
करीब पौन बजे भारतीय किसान संघ के बैनर तले जिले के विभिन्न गांवों से बड़ी संख्या में किसान वाहनों से डिस्कॉम मुख्यालय के बाहर पहुंचे। रास्ते पर पत्थर डाल कर धरने पर बैठ गए। किसानों ने डिस्कॉम व राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उनका कहना था कि आठ घंटे बिजली का दावा करने वाली सरकार उन्हें पांच-छह घंटे भी बिजली नहीं दे पा रही है। इधर मानसून की देरी ने भी किसानों को चिंता में डाल रखा है। इस बीच पुलिस व किसानों के बीच कई बार कहासुनी भी हुई, लेकिन मौके पर मौजूद पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों ने स्थिति को संभाले रखा। किसान नेताओं का कहना था कि जोधपुर डिस्कॉम एमडी जब तक उनके पास आकर ज्ञापन नहीं लेंगे ।
और उनको सात घंटे बिजली का भरोसा नहीं देंगे, तब तक वे नहीं हटेंगे। काफी देर तक हंगामा होता रहा। डिस्कॉम एमडी बाहर नहीं आए तो एडीएम सिटी स्नेहलता पंवार, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (सतर्कता) नवलकिशोर पुरोहित, पुलिस उपअधीक्षक जसवंतसिंह बालोत, चीफ इंजीनियर एसके कुलश्रेष्ठ, मुख्य लेखाधिकारी एमएल पालावत, सचिव बीएल मेहरा सहित अन्य अधिकारियों ने किसानों को करीब आधा घंटे तक समझाया।
आखिर एमडी आए और असलियत बताई
किसान किसी भी सुन ही नहीं रहे थे। आखिर एमडी खमेसरा बाहर आए और कहा कि उत्तरी ग्रिड में तकनीकी खराबी और पर्याप्त बिजली आपूर्ति नहीं मिलने के कारण किसानों को पूरी बिजली देने में परेशानी आ रही है। ऐसे में राज्य सरकार के आदेशों के तहत ही बिजली दे पा रहे हैं। लेकिन, किसान अड़े रहे और कम से कम 6.30 घंटे बिजली देने की मांग करने लगे। इस पर एमडी भीतर लौटे और अधिकारियों से चर्चा की। करीब चार बजे उन्होंने किसानों को खेती के लिए साढ़े छह घंटे बिजली का भरोसा दिलाया, तब कहीं जाकर किसानों ने धरना समाप्त किया।
सिर्फ तीन घंटे मिल रही है बिजली
इससे पहले डिस्कॉम के बाहर आयोजित सभा में भारतीय किसान संघ के प्रदेश महामंत्री रतनलाल डागा ने कहा कि दिसंबर 2008 से किसानों को खेती के लिए सिर्फ तीन घंटे बिजली मिल रही है, जबकि सरकार ने अप्रेल से 8 घंटे तक बिजली देने की घोषणा की थी। जिले की फलोदी, लूणी, पीपाड़, बिलाड़ा, बाप, शेरगढ़, बालेसर, भोपालगढ़, मंडोर पंचायत समिति के अधीन आने वाले ग्रामीण क्षेत्रों में विभिन्न प्रकार की सब्जियां और मूंगफली की खेती की जा रही है, जो पर्याप्त बिजली के अभाव में जल रही है।
लाखों के प्याज पकने से पहले जले
किसान नेता माणकराम परिहार ने कहा कि पूर्व में भी अघोषित बिजली कटौती से किसानों की लाखों रुपए की प्याज की फसल जलकर चौपट हो गई और जो बचे वे छोटे रह गए। इनका भाव मिलना मुश्किल हो जाएगा। ऐसे में बिजली कटौती से किसानों की हालत नाजुक हो जाएगी। जयनारायण सांखला, नरेश व्यास, जसाराम जाणी, फुवाराम, कानाराम गोरचिया, भोपालसिंह चामूं, भंवरलाल पालीवाल, कांग्रेस नेता सुनील परिहार ने भी विचार व्यक्त किए।
यहां से आए किसान
जिले के बिलाड़ा, भोपालगढ़, फलोदी, बाप, चामूं, शेरगढ़, बालेसर, आगोलाई, तिंवरी, मथानियां, ओसियां, पीपाड़, नारवां-इन्द्रोका, बिसलपुर, लूणी, माणकलाव सहित कई गांवों के किसान इस प्रदर्शन में शामिल थे।
बिलाड़ा में घेराव, तिंवरी में ताला लगाया
बिलाड़ा में बिजली कटौती से गुस्साए ग्रामीणों ने शिवनगरी जीएसएस पर धरना देकर उच्चधिकारियों का घेराव किया। किसानों ने चेतावनी दी है कि 15 जुलाई तक बिजली आपूर्ति में सुधार नहीं हुआ तो राष्ट्रीय राजमार्ग जाम किया जाएगा। वहीं तिंवरी में अघोषित बिजली कटौती और पेयजल संकट से त्रस्त किसानों ने डिस्कॉम के सहायक अभियंता कार्यालय पर ताला जड़ दिया।
जोधपुर. खेती के लिए कम से कम आठ घंटे बिजली की मांग को लेकर जिले के किसानों ने गुरुवार को डिस्कॉम मुख्यालय के बाहर धरना देकर प्रदर्शन किया। इससे आईटीआई चौराहे से डीजल शेड जाने वाला मार्ग करीब चार घंटे तक बंद रहा। बाद में साढ़े छह घंटे बिजली दिए जाने के आश्वासन पर किसान लौटे। उधर बिलाड़ा में किसानों ने अधिकारियों का घेराव किया और तिंवरी में सहायक अभियंता कार्यालय पर ताले लगा दिए।
करीब पौन बजे भारतीय किसान संघ के बैनर तले जिले के विभिन्न गांवों से बड़ी संख्या में किसान वाहनों से डिस्कॉम मुख्यालय के बाहर पहुंचे। रास्ते पर पत्थर डाल कर धरने पर बैठ गए। किसानों ने डिस्कॉम व राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उनका कहना था कि आठ घंटे बिजली का दावा करने वाली सरकार उन्हें पांच-छह घंटे भी बिजली नहीं दे पा रही है। इधर मानसून की देरी ने भी किसानों को चिंता में डाल रखा है। इस बीच पुलिस व किसानों के बीच कई बार कहासुनी भी हुई, लेकिन मौके पर मौजूद पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों ने स्थिति को संभाले रखा। किसान नेताओं का कहना था कि जोधपुर डिस्कॉम एमडी जब तक उनके पास आकर ज्ञापन नहीं लेंगे ।
और उनको सात घंटे बिजली का भरोसा नहीं देंगे, तब तक वे नहीं हटेंगे। काफी देर तक हंगामा होता रहा। डिस्कॉम एमडी बाहर नहीं आए तो एडीएम सिटी स्नेहलता पंवार, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (सतर्कता) नवलकिशोर पुरोहित, पुलिस उपअधीक्षक जसवंतसिंह बालोत, चीफ इंजीनियर एसके कुलश्रेष्ठ, मुख्य लेखाधिकारी एमएल पालावत, सचिव बीएल मेहरा सहित अन्य अधिकारियों ने किसानों को करीब आधा घंटे तक समझाया।
आखिर एमडी आए और असलियत बताई
किसान किसी भी सुन ही नहीं रहे थे। आखिर एमडी खमेसरा बाहर आए और कहा कि उत्तरी ग्रिड में तकनीकी खराबी और पर्याप्त बिजली आपूर्ति नहीं मिलने के कारण किसानों को पूरी बिजली देने में परेशानी आ रही है। ऐसे में राज्य सरकार के आदेशों के तहत ही बिजली दे पा रहे हैं। लेकिन, किसान अड़े रहे और कम से कम 6.30 घंटे बिजली देने की मांग करने लगे। इस पर एमडी भीतर लौटे और अधिकारियों से चर्चा की। करीब चार बजे उन्होंने किसानों को खेती के लिए साढ़े छह घंटे बिजली का भरोसा दिलाया, तब कहीं जाकर किसानों ने धरना समाप्त किया।
सिर्फ तीन घंटे मिल रही है बिजली
इससे पहले डिस्कॉम के बाहर आयोजित सभा में भारतीय किसान संघ के प्रदेश महामंत्री रतनलाल डागा ने कहा कि दिसंबर 2008 से किसानों को खेती के लिए सिर्फ तीन घंटे बिजली मिल रही है, जबकि सरकार ने अप्रेल से 8 घंटे तक बिजली देने की घोषणा की थी। जिले की फलोदी, लूणी, पीपाड़, बिलाड़ा, बाप, शेरगढ़, बालेसर, भोपालगढ़, मंडोर पंचायत समिति के अधीन आने वाले ग्रामीण क्षेत्रों में विभिन्न प्रकार की सब्जियां और मूंगफली की खेती की जा रही है, जो पर्याप्त बिजली के अभाव में जल रही है।
लाखों के प्याज पकने से पहले जले
किसान नेता माणकराम परिहार ने कहा कि पूर्व में भी अघोषित बिजली कटौती से किसानों की लाखों रुपए की प्याज की फसल जलकर चौपट हो गई और जो बचे वे छोटे रह गए। इनका भाव मिलना मुश्किल हो जाएगा। ऐसे में बिजली कटौती से किसानों की हालत नाजुक हो जाएगी। जयनारायण सांखला, नरेश व्यास, जसाराम जाणी, फुवाराम, कानाराम गोरचिया, भोपालसिंह चामूं, भंवरलाल पालीवाल, कांग्रेस नेता सुनील परिहार ने भी विचार व्यक्त किए।
यहां से आए किसान
जिले के बिलाड़ा, भोपालगढ़, फलोदी, बाप, चामूं, शेरगढ़, बालेसर, आगोलाई, तिंवरी, मथानियां, ओसियां, पीपाड़, नारवां-इन्द्रोका, बिसलपुर, लूणी, माणकलाव सहित कई गांवों के किसान इस प्रदर्शन में शामिल थे।
बिलाड़ा में घेराव, तिंवरी में ताला लगाया
बिलाड़ा में बिजली कटौती से गुस्साए ग्रामीणों ने शिवनगरी जीएसएस पर धरना देकर उच्चधिकारियों का घेराव किया। किसानों ने चेतावनी दी है कि 15 जुलाई तक बिजली आपूर्ति में सुधार नहीं हुआ तो राष्ट्रीय राजमार्ग जाम किया जाएगा। वहीं तिंवरी में अघोषित बिजली कटौती और पेयजल संकट से त्रस्त किसानों ने डिस्कॉम के सहायक अभियंता कार्यालय पर ताला जड़ दिया।
गर्मी में बिजली कटौती ने किया बेहाल
भास्कर न्यूज Friday, July 10, 2009 05:46 [IST]
पाली. भीषण गर्मी में जिला मुख्यालय पर चार घंटे की बिजली कटौती ने जनजीवन को झकझोर दिया। वहीं शाम को तेज हवा के साथ हुई बारिश से कई जगहों पर फाल्ट होने से शहर के कई हिस्सों में दो से तीन घंटे तक बिजली बंद रही। प्रदेश के कई तापघरों में बिजली उत्पादन कम होने से राज्य सरकार के आदेश पर डिस्कॉम ने बिजली कटौती का आदेश जारी किया है। इसमें कल-कारखानों में चार से पांच घंटे तक काम ठप रहने से करीब एक करोड़ रुपए का प्रतिदिन नुकसान हो रहा है।
काफी समय से मंदी की मार झेल रहे उद्योग जगत के लिए दो महीने तेजी वाले हैं। इन दिनों में हो रही बिजली कटौती से उत्पादन पर काफी असर हो रहा है। भरी दुपहरी में बिजली कटौती से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। गुरुवार शाम को तेज हवा के साथ हुई बारिश से भी शहर में करीब डेढ़-दो घंटे तक बिजली बंद रही। रामासिया व मंडली में भी फाल्ट के कारण देर रात तक बिजली शुरू नहीं हो सकी।
कर्मचारी ठीक करने में जुटे रहे। इधर, शहर में भीषण गर्मी के बीच बिजली कटौती होने से शहरवासियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। टैगौर नगर के नवाब खां ने बताया कि डिस्कॉम की ओर से कभी बूस्टर के बहाने बिजली काट दी जाती है तो कभी अघोषित कटौती कर देने से हाल बेहाल हो रहा है।
‘राज्य सरकार की ओर से जिला मुख्यालय पर चार घंटे के लिए बिजली कटौती के आदेश हैं। ऐसे में गुरुवार को जिला मुख्यालय पर 4 घंटे बिजली कटौती की गई। भीषण गर्मी में बिजली कटौती से परेशानी होना स्वभाविक है। शाम को तेज हवा के साथ हुई बारिश से कई जगहों पर फाल्ट होने से उन इलाकों में बिजली बंद रही। बाद में उसे सुधार लिया गया। आगामी आदेश तक कटौती जारी रहेगी’। - उमेश माथुर, एक्सईएन, डिस्कॉम, पाली।
पाली. भीषण गर्मी में जिला मुख्यालय पर चार घंटे की बिजली कटौती ने जनजीवन को झकझोर दिया। वहीं शाम को तेज हवा के साथ हुई बारिश से कई जगहों पर फाल्ट होने से शहर के कई हिस्सों में दो से तीन घंटे तक बिजली बंद रही। प्रदेश के कई तापघरों में बिजली उत्पादन कम होने से राज्य सरकार के आदेश पर डिस्कॉम ने बिजली कटौती का आदेश जारी किया है। इसमें कल-कारखानों में चार से पांच घंटे तक काम ठप रहने से करीब एक करोड़ रुपए का प्रतिदिन नुकसान हो रहा है।
काफी समय से मंदी की मार झेल रहे उद्योग जगत के लिए दो महीने तेजी वाले हैं। इन दिनों में हो रही बिजली कटौती से उत्पादन पर काफी असर हो रहा है। भरी दुपहरी में बिजली कटौती से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। गुरुवार शाम को तेज हवा के साथ हुई बारिश से भी शहर में करीब डेढ़-दो घंटे तक बिजली बंद रही। रामासिया व मंडली में भी फाल्ट के कारण देर रात तक बिजली शुरू नहीं हो सकी।
कर्मचारी ठीक करने में जुटे रहे। इधर, शहर में भीषण गर्मी के बीच बिजली कटौती होने से शहरवासियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। टैगौर नगर के नवाब खां ने बताया कि डिस्कॉम की ओर से कभी बूस्टर के बहाने बिजली काट दी जाती है तो कभी अघोषित कटौती कर देने से हाल बेहाल हो रहा है।
‘राज्य सरकार की ओर से जिला मुख्यालय पर चार घंटे के लिए बिजली कटौती के आदेश हैं। ऐसे में गुरुवार को जिला मुख्यालय पर 4 घंटे बिजली कटौती की गई। भीषण गर्मी में बिजली कटौती से परेशानी होना स्वभाविक है। शाम को तेज हवा के साथ हुई बारिश से कई जगहों पर फाल्ट होने से उन इलाकों में बिजली बंद रही। बाद में उसे सुधार लिया गया। आगामी आदेश तक कटौती जारी रहेगी’। - उमेश माथुर, एक्सईएन, डिस्कॉम, पाली।
बरस रही हैं मुश्किले
Bhaskar Correspondent Friday, July 10, 2009 05:05 [IST]
राज्य में वर्षो बाद इतना गर्म सावन
राजस्थान में मानसून आ जाने के बाद भी गंभीर पेयजल संकट के हालात हैं। सावन में वर्षो बाद भीषण गर्मी पड़ रही है। लोग पानी के लिए बेहाल हैं। 78 शहर-कस्बों में दो से चार दिन के अंतराल में सप्लाई हो रही है। पिछले साल प्रदेश के सात जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई थी, जिससे अधिकतर शहर और कस्बों में साल के अधिकांश समय में पानी का संकट रहा है।
बीसलपुर बांध में बचा 4-6 महीने का पानी
मानसून की बेरुखी का सीधा असर बीसलपुर पेयजल योजना पर पड़ रहा है। हालात यही रहे तो शहर के डेढ़ लाख घरों में बीसलपुर के पानी की आपूर्ति बंद हो सकती है। जलदाय विभाग व जल संसाधन विभाग के इंजीनियरों के अनुसार बीसलपुर बांध में सिर्फ चार से छह माह का पानी बचा है।
शहर में पानी की किल्लत दूर करने के लिए 1100 करोड़ रुपए खर्च कर बीसलपुर पेयजल योजना बनाई गई है, लेकिन मानसून की बेरूखी से बीसलपुर बांध में पानी की स्तर लगातार गिर रहा है। फिलहाल बांध का स्तर 306.6 मीटर है, जिसमें 3500 एमसीएफटी पानी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मानसून की बेरुखी कायम रही तो अक्टूबर तक पानी की स्थिति गंभीर हो जाएगी।
जलसंसाधन विभाग के मुख्य अभियंता सुभाष महर्षि ने बताया-बांध में सिर्फ 6 महीने लायक पानी है। यदि पानी को लंबे समय तक चलाना है, तो आपूर्ति में कटौती करनी होगी। रोजाना बांध की स्थिति की मॉनिटरिंग करवा रहे हैं।
राज्य में वर्षो बाद इतना गर्म सावन
राजस्थान में मानसून आ जाने के बाद भी गंभीर पेयजल संकट के हालात हैं। सावन में वर्षो बाद भीषण गर्मी पड़ रही है। लोग पानी के लिए बेहाल हैं। 78 शहर-कस्बों में दो से चार दिन के अंतराल में सप्लाई हो रही है। पिछले साल प्रदेश के सात जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई थी, जिससे अधिकतर शहर और कस्बों में साल के अधिकांश समय में पानी का संकट रहा है।
बीसलपुर बांध में बचा 4-6 महीने का पानी
मानसून की बेरुखी का सीधा असर बीसलपुर पेयजल योजना पर पड़ रहा है। हालात यही रहे तो शहर के डेढ़ लाख घरों में बीसलपुर के पानी की आपूर्ति बंद हो सकती है। जलदाय विभाग व जल संसाधन विभाग के इंजीनियरों के अनुसार बीसलपुर बांध में सिर्फ चार से छह माह का पानी बचा है।
शहर में पानी की किल्लत दूर करने के लिए 1100 करोड़ रुपए खर्च कर बीसलपुर पेयजल योजना बनाई गई है, लेकिन मानसून की बेरूखी से बीसलपुर बांध में पानी की स्तर लगातार गिर रहा है। फिलहाल बांध का स्तर 306.6 मीटर है, जिसमें 3500 एमसीएफटी पानी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मानसून की बेरुखी कायम रही तो अक्टूबर तक पानी की स्थिति गंभीर हो जाएगी।
जलसंसाधन विभाग के मुख्य अभियंता सुभाष महर्षि ने बताया-बांध में सिर्फ 6 महीने लायक पानी है। यदि पानी को लंबे समय तक चलाना है, तो आपूर्ति में कटौती करनी होगी। रोजाना बांध की स्थिति की मॉनिटरिंग करवा रहे हैं।
अधिकारियों से दो-दो हाथ
Bhaskar Correspondent Friday, July 10, 2009 06:12 [IST]
जयपुर. सांगानेर में कुछ लोगों ने गुरुवार को जलदाय कार्यालय व नगर निगम के जोन कार्यालय में उत्पात मचाया और दो अधिकारियों के साथ मारपीट की। बाद में दोनों विभागों ने सांगानेर थाने में नामजद मामले दर्ज कराए हैं।
जलदाय कार्यालय (ग्रामीण) में सुबह करीब साढ़े दस बजे बीस से ज्यादा लोग पहुंचे। उस समय कार्यालय में कनिष्ठ अभियंता विनोद गुप्ता मौजूद थे। वे कनिष्ठ अभियंता के कमरे में घुसे और टेबल के सामने पड़ी फाइलें फाड़ना शुरू कर दीं। जब अधिकारी ने विरोध किया तो उसके साथ मारपीट शुरू कर दी और कुर्सियों को इधर-उधर फेंक दिया। घटना के बाद विभाग ने कुछ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराया। कनिष्ठ अभियंता विनोद कुमार गुप्ता ने बताया कि जब लोगों से समस्या के बारे में पूछा तो कहने लगे की रामसिंहपुरा में टैंकरों से पानी क्यों नहीं जाता है तो उसने कहा कि रामसिंहपुरा का क्षेत्र दूसरे अधिकारी के पास है। यह सुनकर वे मारपीट करने लगे।
इसके बाद ये लोग नगर निगम के जोन कार्यालय में पहुंचे और वहां कमिश्नर को बिना कुछ बोले ही कुर्सी से गिरा दिया तथा सामने पड़ी फाइलों को फाड़ दिया। जब कमिश्नर ने लोगों से कारण पूछा तो कहने लगे कि आप अतिक्रमण हटाकर लोगों को बेरोजगार कर रहे हो। नगर निगम ने डॉ. नईम, पप्पू बक्से वाला तथा रितेश कुमावत के खिलाफ राजकार्य में बाधा डालने, अधिकारी के साथ हाथापाई करने का मामला सांगानेर थाने में दर्ज कराया।
जोन कमिश्नर ओपी गुप्ता का कहना है कि पहले भी इन लोगों ने निगम की गाड़ी के शीशे तोड़ दिए थे। इन लोगों ने सड़क पर अतिक्रमण कर रखे थे, जो पिछले दिनों निगम ने हटाए। उधर लोगों का आरोप था कि कस्बे की सफाई व्यवस्था बिगड़ी हुई, और निगम के लोग कार्य नहीं करते हैं।
जयपुर. सांगानेर में कुछ लोगों ने गुरुवार को जलदाय कार्यालय व नगर निगम के जोन कार्यालय में उत्पात मचाया और दो अधिकारियों के साथ मारपीट की। बाद में दोनों विभागों ने सांगानेर थाने में नामजद मामले दर्ज कराए हैं।
जलदाय कार्यालय (ग्रामीण) में सुबह करीब साढ़े दस बजे बीस से ज्यादा लोग पहुंचे। उस समय कार्यालय में कनिष्ठ अभियंता विनोद गुप्ता मौजूद थे। वे कनिष्ठ अभियंता के कमरे में घुसे और टेबल के सामने पड़ी फाइलें फाड़ना शुरू कर दीं। जब अधिकारी ने विरोध किया तो उसके साथ मारपीट शुरू कर दी और कुर्सियों को इधर-उधर फेंक दिया। घटना के बाद विभाग ने कुछ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराया। कनिष्ठ अभियंता विनोद कुमार गुप्ता ने बताया कि जब लोगों से समस्या के बारे में पूछा तो कहने लगे की रामसिंहपुरा में टैंकरों से पानी क्यों नहीं जाता है तो उसने कहा कि रामसिंहपुरा का क्षेत्र दूसरे अधिकारी के पास है। यह सुनकर वे मारपीट करने लगे।
इसके बाद ये लोग नगर निगम के जोन कार्यालय में पहुंचे और वहां कमिश्नर को बिना कुछ बोले ही कुर्सी से गिरा दिया तथा सामने पड़ी फाइलों को फाड़ दिया। जब कमिश्नर ने लोगों से कारण पूछा तो कहने लगे कि आप अतिक्रमण हटाकर लोगों को बेरोजगार कर रहे हो। नगर निगम ने डॉ. नईम, पप्पू बक्से वाला तथा रितेश कुमावत के खिलाफ राजकार्य में बाधा डालने, अधिकारी के साथ हाथापाई करने का मामला सांगानेर थाने में दर्ज कराया।
जोन कमिश्नर ओपी गुप्ता का कहना है कि पहले भी इन लोगों ने निगम की गाड़ी के शीशे तोड़ दिए थे। इन लोगों ने सड़क पर अतिक्रमण कर रखे थे, जो पिछले दिनों निगम ने हटाए। उधर लोगों का आरोप था कि कस्बे की सफाई व्यवस्था बिगड़ी हुई, और निगम के लोग कार्य नहीं करते हैं।
विधानसभा में पानी पर आग
Bhaskar Correspondent Saturday, July 11, 2009 04:25 [IST]
जल संकट से लोग परेशान हैं तो विधानसभा भी इस मुद्दे को लेकर रोज गर्मा रही है। शुक्रवार को राज्य में विभिन्न स्थानों पर बादल बरसे, लेकिन सूख रही धरती की प्यास बुझाने में नाकाम रहे। मानसून को आए 10 दिन से ज्यादा हो गए हैं, लेकिन अभी तक कई इलाके तो पूरी तरह सूखे हैं। दूसरी तरफ पानी के जमीनी स्रोत भी बादलों की नाराजगी की वजह से जवाब देने लगे हैं। इसके चलते धीरे-धीरे संकट गहराता जा रहा है।
विपक्ष का धरना, भाटी करेंगे आमरण अनशन
बिगड़ती पेयजल व्यवस्था को लेकर शुक्रवार को विधानसभा में हंगामा हुआ। भाजपा के देवीसिंह भाटी आमरण अनशन पर बैठ गए। बाद में पूरा विपक्ष वैल में आकर उनके समर्थन में बैठ गया। सरकार का वक्तव्य दिलाए जाने की मांग को लेकर विपक्ष ने देर तक नारेबाजी की। पेयजल संकट का यह मुद्दा शुक्रवार को भास्कर ने प्रमुखता से उठाया था। भाजपा विधायक देवीसिंह भाटी ने स्थगन प्रस्ताव के माध्यम से सदन में यह मुद्दा उठाया।
जल संसाधन मंत्री मदेरणा ने पेयजल समस्या को गंभीर बताते हुए सोमवार को सरकार की ओर से वक्तव्य दिए जाने का आश्वासन दिया। भाटी ने कहा कि राजस्थान के 78 कस्बे और 30 हजार से ज्यादा गांव पीने के पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। बीकानेर की कोलायत, लूणकरणसर और खाजूवाला आदि तहसीलों में जबर्दस्त पेयजल संकट है। लोगों को काफी दूरी से पानी लाना पड़ रहा है। सीमा पर तैनात बीएसएफ को भी टैंकरों से पानी मंगवाना पड़ रहा है। प्रदेश में अकाल जैसे हालात हैं, बजट में भी कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई है। सदन में भी विधायक जो समस्याएं बता रहे हैं उसमें 80 प्रतिशत प्रस्ताव पेयजल से संबंधित है। भाटी ने पेयजल के मुद्दे पर सरकार से समस्या का हल निकालने की मांग की। उनका तर्क था कि वे वक्तव्य नहीं, सरकार से समस्या का समाधान चाहते हैं।
सरकार की ओर से वक्तव्य संबंधित आश्वासन नहीं मिलने पर भाटी आमरण अनशन की घोषणा करके वैल में आकर बैठ गए। इनके बाद माकपा के पवन दुग्गल, पेमाराम और भाजपा के राधेश्याम गंगानगर सहित पूरा विपक्ष आकर धरने पर बैठ गया। भाजपा के सचेतक राजेंद्र राठौड़ का कहना था कि जब सदन में गंभीर विषयों पर चर्चा होती है तब न तो अधिकारी अपनी दीर्घा में मौजूद रहते हैं और न ही सरकार यहां मौजूद रहती है।
बाद में विधानसभा अध्यक्ष दीपेंद्रसिंह शेखावत ने जल संसाधन मंत्री महिपाल मदेरणा को वक्तव्य दिए जाने के निर्देश दिए। इस पर जल संसाधन मंत्री मदेरणा ने पेयजल समस्या को गंभीर बताते हुए सोमवार को सरकार की ओर से वक्तव्य दिए जाने का आश्वासन दिया। इसके बाद विधानसभाध्यक्ष शेखावत और भाजपा विधायक दल के उपनेता घनश्याम तिवाड़ी के आग्रह पर भाटी ने आमरण अनशन स्थगित करने की घोषणा की। उन्होंने कहा, अगर सोमवार तक समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे अनशन करेंगे।
जल संकट से लोग परेशान हैं तो विधानसभा भी इस मुद्दे को लेकर रोज गर्मा रही है। शुक्रवार को राज्य में विभिन्न स्थानों पर बादल बरसे, लेकिन सूख रही धरती की प्यास बुझाने में नाकाम रहे। मानसून को आए 10 दिन से ज्यादा हो गए हैं, लेकिन अभी तक कई इलाके तो पूरी तरह सूखे हैं। दूसरी तरफ पानी के जमीनी स्रोत भी बादलों की नाराजगी की वजह से जवाब देने लगे हैं। इसके चलते धीरे-धीरे संकट गहराता जा रहा है।
विपक्ष का धरना, भाटी करेंगे आमरण अनशन
बिगड़ती पेयजल व्यवस्था को लेकर शुक्रवार को विधानसभा में हंगामा हुआ। भाजपा के देवीसिंह भाटी आमरण अनशन पर बैठ गए। बाद में पूरा विपक्ष वैल में आकर उनके समर्थन में बैठ गया। सरकार का वक्तव्य दिलाए जाने की मांग को लेकर विपक्ष ने देर तक नारेबाजी की। पेयजल संकट का यह मुद्दा शुक्रवार को भास्कर ने प्रमुखता से उठाया था। भाजपा विधायक देवीसिंह भाटी ने स्थगन प्रस्ताव के माध्यम से सदन में यह मुद्दा उठाया।
जल संसाधन मंत्री मदेरणा ने पेयजल समस्या को गंभीर बताते हुए सोमवार को सरकार की ओर से वक्तव्य दिए जाने का आश्वासन दिया। भाटी ने कहा कि राजस्थान के 78 कस्बे और 30 हजार से ज्यादा गांव पीने के पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। बीकानेर की कोलायत, लूणकरणसर और खाजूवाला आदि तहसीलों में जबर्दस्त पेयजल संकट है। लोगों को काफी दूरी से पानी लाना पड़ रहा है। सीमा पर तैनात बीएसएफ को भी टैंकरों से पानी मंगवाना पड़ रहा है। प्रदेश में अकाल जैसे हालात हैं, बजट में भी कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई है। सदन में भी विधायक जो समस्याएं बता रहे हैं उसमें 80 प्रतिशत प्रस्ताव पेयजल से संबंधित है। भाटी ने पेयजल के मुद्दे पर सरकार से समस्या का हल निकालने की मांग की। उनका तर्क था कि वे वक्तव्य नहीं, सरकार से समस्या का समाधान चाहते हैं।
सरकार की ओर से वक्तव्य संबंधित आश्वासन नहीं मिलने पर भाटी आमरण अनशन की घोषणा करके वैल में आकर बैठ गए। इनके बाद माकपा के पवन दुग्गल, पेमाराम और भाजपा के राधेश्याम गंगानगर सहित पूरा विपक्ष आकर धरने पर बैठ गया। भाजपा के सचेतक राजेंद्र राठौड़ का कहना था कि जब सदन में गंभीर विषयों पर चर्चा होती है तब न तो अधिकारी अपनी दीर्घा में मौजूद रहते हैं और न ही सरकार यहां मौजूद रहती है।
बाद में विधानसभा अध्यक्ष दीपेंद्रसिंह शेखावत ने जल संसाधन मंत्री महिपाल मदेरणा को वक्तव्य दिए जाने के निर्देश दिए। इस पर जल संसाधन मंत्री मदेरणा ने पेयजल समस्या को गंभीर बताते हुए सोमवार को सरकार की ओर से वक्तव्य दिए जाने का आश्वासन दिया। इसके बाद विधानसभाध्यक्ष शेखावत और भाजपा विधायक दल के उपनेता घनश्याम तिवाड़ी के आग्रह पर भाटी ने आमरण अनशन स्थगित करने की घोषणा की। उन्होंने कहा, अगर सोमवार तक समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे अनशन करेंगे।
Subscribe to:
Comments (Atom)

