भास्कर न्यूज Friday, July 10, 2009 07:11 [IST]
जोधपुर. खेती के लिए कम से कम आठ घंटे बिजली की मांग को लेकर जिले के किसानों ने गुरुवार को डिस्कॉम मुख्यालय के बाहर धरना देकर प्रदर्शन किया। इससे आईटीआई चौराहे से डीजल शेड जाने वाला मार्ग करीब चार घंटे तक बंद रहा। बाद में साढ़े छह घंटे बिजली दिए जाने के आश्वासन पर किसान लौटे। उधर बिलाड़ा में किसानों ने अधिकारियों का घेराव किया और तिंवरी में सहायक अभियंता कार्यालय पर ताले लगा दिए।
करीब पौन बजे भारतीय किसान संघ के बैनर तले जिले के विभिन्न गांवों से बड़ी संख्या में किसान वाहनों से डिस्कॉम मुख्यालय के बाहर पहुंचे। रास्ते पर पत्थर डाल कर धरने पर बैठ गए। किसानों ने डिस्कॉम व राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उनका कहना था कि आठ घंटे बिजली का दावा करने वाली सरकार उन्हें पांच-छह घंटे भी बिजली नहीं दे पा रही है। इधर मानसून की देरी ने भी किसानों को चिंता में डाल रखा है। इस बीच पुलिस व किसानों के बीच कई बार कहासुनी भी हुई, लेकिन मौके पर मौजूद पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों ने स्थिति को संभाले रखा। किसान नेताओं का कहना था कि जोधपुर डिस्कॉम एमडी जब तक उनके पास आकर ज्ञापन नहीं लेंगे ।
और उनको सात घंटे बिजली का भरोसा नहीं देंगे, तब तक वे नहीं हटेंगे। काफी देर तक हंगामा होता रहा। डिस्कॉम एमडी बाहर नहीं आए तो एडीएम सिटी स्नेहलता पंवार, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (सतर्कता) नवलकिशोर पुरोहित, पुलिस उपअधीक्षक जसवंतसिंह बालोत, चीफ इंजीनियर एसके कुलश्रेष्ठ, मुख्य लेखाधिकारी एमएल पालावत, सचिव बीएल मेहरा सहित अन्य अधिकारियों ने किसानों को करीब आधा घंटे तक समझाया।
आखिर एमडी आए और असलियत बताई
किसान किसी भी सुन ही नहीं रहे थे। आखिर एमडी खमेसरा बाहर आए और कहा कि उत्तरी ग्रिड में तकनीकी खराबी और पर्याप्त बिजली आपूर्ति नहीं मिलने के कारण किसानों को पूरी बिजली देने में परेशानी आ रही है। ऐसे में राज्य सरकार के आदेशों के तहत ही बिजली दे पा रहे हैं। लेकिन, किसान अड़े रहे और कम से कम 6.30 घंटे बिजली देने की मांग करने लगे। इस पर एमडी भीतर लौटे और अधिकारियों से चर्चा की। करीब चार बजे उन्होंने किसानों को खेती के लिए साढ़े छह घंटे बिजली का भरोसा दिलाया, तब कहीं जाकर किसानों ने धरना समाप्त किया।
सिर्फ तीन घंटे मिल रही है बिजली
इससे पहले डिस्कॉम के बाहर आयोजित सभा में भारतीय किसान संघ के प्रदेश महामंत्री रतनलाल डागा ने कहा कि दिसंबर 2008 से किसानों को खेती के लिए सिर्फ तीन घंटे बिजली मिल रही है, जबकि सरकार ने अप्रेल से 8 घंटे तक बिजली देने की घोषणा की थी। जिले की फलोदी, लूणी, पीपाड़, बिलाड़ा, बाप, शेरगढ़, बालेसर, भोपालगढ़, मंडोर पंचायत समिति के अधीन आने वाले ग्रामीण क्षेत्रों में विभिन्न प्रकार की सब्जियां और मूंगफली की खेती की जा रही है, जो पर्याप्त बिजली के अभाव में जल रही है।
लाखों के प्याज पकने से पहले जले
किसान नेता माणकराम परिहार ने कहा कि पूर्व में भी अघोषित बिजली कटौती से किसानों की लाखों रुपए की प्याज की फसल जलकर चौपट हो गई और जो बचे वे छोटे रह गए। इनका भाव मिलना मुश्किल हो जाएगा। ऐसे में बिजली कटौती से किसानों की हालत नाजुक हो जाएगी। जयनारायण सांखला, नरेश व्यास, जसाराम जाणी, फुवाराम, कानाराम गोरचिया, भोपालसिंह चामूं, भंवरलाल पालीवाल, कांग्रेस नेता सुनील परिहार ने भी विचार व्यक्त किए।
यहां से आए किसान
जिले के बिलाड़ा, भोपालगढ़, फलोदी, बाप, चामूं, शेरगढ़, बालेसर, आगोलाई, तिंवरी, मथानियां, ओसियां, पीपाड़, नारवां-इन्द्रोका, बिसलपुर, लूणी, माणकलाव सहित कई गांवों के किसान इस प्रदर्शन में शामिल थे।
बिलाड़ा में घेराव, तिंवरी में ताला लगाया
बिलाड़ा में बिजली कटौती से गुस्साए ग्रामीणों ने शिवनगरी जीएसएस पर धरना देकर उच्चधिकारियों का घेराव किया। किसानों ने चेतावनी दी है कि 15 जुलाई तक बिजली आपूर्ति में सुधार नहीं हुआ तो राष्ट्रीय राजमार्ग जाम किया जाएगा। वहीं तिंवरी में अघोषित बिजली कटौती और पेयजल संकट से त्रस्त किसानों ने डिस्कॉम के सहायक अभियंता कार्यालय पर ताला जड़ दिया।
Saturday, July 11, 2009
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