Wednesday, July 22, 2009

बावडी और तालाबके संरक्षण की मांग

भीनमाल। नगर के प्रबुद्धि नागरिकों ने मुख्यमंत्री के नाम उपखंड अधिकारी को ज्ञानप सोंपकर परपंरागत पेयजल स्रोत्र बावडी और तालाबों में नगरपालिका द्वारा कचरा डालने का विरोध किया है। गो-संरक्षण केन्द्र के तत्वाधान में शिवसेना प्रदेश प्रमुख शेखर व्यास, रमेश सुथार (कंप्यूटर) पार्षद उकाराम धाची, पूर्व पार्षद जयरूपाराम माली, हीरालाल सोनी, सहित दर्जनभर नगरवासियों ने उपखंड अधिकारी को ज्ञापन सोंपकर बताया की नगर में दर्जनों की तादाद में बावडी और तालाब बने हुए गई। जिनको पूर्व में पेयजल स्रोत्र के रूप में उपयोग लिया जाता था, लेकिन पिछले दो दशक से नगरपालिका द्वारा पुरे गाँव का कचरा एकत्रित कर इनमे डालने की वजह से उनका पानी दूषित होकर सुख चुका है। ज्ञानप में पालिका कर्मियों को नगर के बावडी व तालाब में कचरा नही डालने और इनमे डाला गया कचरा जल्द से जल्द हटाने की मांग की गई।

घोषित के साथ अघोषित कटौती ने किया बेहाल

Bhaskar News Monday, July 20, 2009 07:55 [IST]
सिरोही. उत्तरी ग्रीड में कहीं पर भी कुछ खराबी आ जाए राज्यभर में बिजली संकट मंडराने लगता है। पिछले माहभर से उत्पादन इकाइयों के ठप रहने और इसी तरह की अन्य समस्याओं के कारण सिरोही, जालोर व पाली समेत राज्यभर को अघोषित बिजली कटौती का दंश झेलना पड़ रहा है। बिजली संकट इस कदर गहराया हुआ है कि आवाजाही का कोई निश्चित समय नहीं है।


बिजली निगम अधिकारी भी नहीं जानते कि कटौती कब होगी और कब सुचारू की जाएगी। बस जयपुर से दूरभाष पर बिजली कट करने का एक आदेश मिलता है और बिजली गुल कर दी जाती है। सुचारू कब होगी इसके लिए जयपुर से ही वापस आदेश मिलता है। बिजली संकट के कारण न केवल गृहिणियां परेशान है वरन् उद्योग-धंधों पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है।


सूत्र बताते है कि उत्तरी ग्रीड में कहीं पर भी तकनीकी खराबी आने पर लोड बढ़ जाता है। ऐसे में लोड कम करने के लिए बिजली कटौती करनी पड़ती है। बिजली उत्पादन इकाइयों में खराबी के कारण भी लोड बढ़ जाता है। सूरतगढ़, सिंगरौली, कोटा समेत अन्य जगहों पर लगे इकाइयों में अक्सर खराबी आती है।


आदेश क्रमांक फलां, आपूर्ति रोकेंx अघोषित बिजली कटौती का सिस्टम काफी दिलचस्प है। इसके तहत डिस्कॉम कार्यालय में एक मैसेज आता है कि ग्रामीण या शहरी क्षेत्र की आपूर्ति तत्काल प्रभाव से रोक दी जाए। इसके साथ ही लोड डिस्पेस के लिए जारी आदेश क्रमांक भी बताए जाते है। आदेश मिलते ही तत्काल बिजली आपूर्ति रोक दी जाती है। आपूर्ति कब बहाल होगी यह किसी को पता नहीं रहता। कुछ समय बाद (कुछ मिनट या घंटों तक) बिजली बहाल करवाने का फिर आदेश जारी किया जाता है। इसके साथ ही आपूर्ति रोकने के आदेश क्रमांक का हवाला देते हुए सुचारू करने का आदेश क्रमांक भी सुनाया जाता है।


खपत, कम और ज्यादा


बिजली की आपूर्ति व मांग एक सरीखी नहीं रहती है। ज्यादा बारिश होने पर खपत कम हो जाती है। सर्दी के दिनों में घरेलू बिजली की खपत कम होती है, लेकिन सिंचाई के लिए कृषि कनेक्शनों पर लोड बढ़ जाता है। उत्पादन इकाइयों में खराबी आने पर कई बार बड़े उद्योगों में ज्यादा कटौती की जाती है। शत-प्रतिशत तक कटौती के आदेश भी जारी किए जाते है। ऐसी स्थिति में ग्रामीण इलाकों में घंटों तक बिजली कटौती रहती है। इस बार शहरी क्षेत्र भी लगभग तीन घंटे नियमित रूप से अतिरिक्त कटौती झेल रहे है।


उमस का कहर, पसीने से तरबतर


बिजली के अभाव में गर्मी से राहत पाने को लगे उपकरण बंद पड़े रहते है। बारिश के दिन होने से उमस का कहर बना रहता है। ऐसे में लोग गर्मी व उमस से जूझने को विवश है। दिनभर पसीने से तरबतर रहते है। कइयों को खुले में आकर बैठना पड़ रहा है। कामकाजी लोगों को पसीने व उमस का कहर झेलते हुए दफ्तरों में ही बैठना पड़ा। दुकानदार भी खासे परेशान रहे। घरों में लोग हाथ पंखी से हवा झल कर राहत पाने का प्रयास करते नजर आते है।


अंधेरे में बढ़ी चोरी की वारदातें



रातभर बिजली गुल रहने से आपराधिक वारदातों में भी बढ़ोतरी हो रही है। गांवों में पथ प्रकाश की सुविधा नहीं होने से चोर वारदात को अंजाम दे जाते है। सवेरे तालें टूटे दिखने पर ही पता चलता है कि रात को अंधेरे में कोई सामान चुरा ले गया। अंधेरी रातों में रोशनी की कोई व्यवस्था नहीं होने से गांवों में अक्सर चोर गिरोह सक्रिय होते है। अंधेरे में वे आसानी से वारदात अंजाम दे जाते है। कुछ दिनों से सिरोही शहर समेत आसपास के गांवों में चोर हाथ आजमा चुके है।


‘उत्तरी ग्रीड में कहीं पर भी खराबी आने पर फ्रिकवेंसी कम हो जाती है। इससे लोड कम करना पड़ता है। पिछले कुछ दिनों से इस तरह की समस्या बढ़ी है। तकनीकी खराबी है, शीघ्र ही स्थिति बहाल हो जाएगी।’

- बीएल खमेसरा, प्रबंध निदेशक, डिस्कॉम, जोधपुर


‘शहरी व ग्रामीण क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों से ज्यादा ही अघोषित बिजली कटौती हो रही है। समस्या समाधान के लिए विद्युत निगम कमिश्नर व एमडी से बात की जा चुकी है। वे बताते है कि राज्यभर में बिजली संकट गहराया हुआ है। शीघ्र ही समस्या का समाधान हो जाएगा।’

- पी.रमेश, जिला कलेक्टर, सिरोही


‘कोटा यूनिट में खराबी आने से कटौती की जा रही है। पिछले कुछ दिनों से जयपुर से मिलने वाले आदेश के मुताबिक ही कटौती की जा रही है। शहरी क्षेत्र में लगभग तीन घंटे की कटौती हो रही है। वैसे भी ३५ लाख यूनिट की मांग के मुकाबले २८ फीसदी तक ही बिजली मिल पा रही है।’

- एमआर चौधरी, एईएन, डिस्कॉम सिरोही डिवीजन


‘आबूरोड क्षेत्र में मांग के मुकाबले बीस प्रतिशत तक कम बिजली मिल रही है। करीब छह लाख यूनिट प्रतिमाह की मांग है। डिवीजन के आबूरोड में साढ़े तीन लाख व रेवदर में डेढ़ लाख यूनिट की मांग है। बरसात के कारण मांग में घटत-बढ़त रहती है। इस कारण रेवदर क्षेत्र के कृषि कनेक्शनों में अभी खपत नहीं है और मांग में भी कमी आ रही है।’

- अविनाश सिंघवी, एक्सईएन, डिस्कॉम, आबूरोड डिवीजन


गांवों में रातभर अंधेरा

ग्रामीण क्षेत्र में माहभर से बिजली की अघोषित कटौती की जा रही है। आसपास के जावाल, मोहब्बतनगर, कैलाशनगर, पाडीव, पालड़ी एम., डोडुआ, सिलोइया, मामावली, वराल, चडुआल, तंवरी, मेर मांडवाड़ा समेत कई गांवों में बिजली कटौती की समस्या बनी हुई है। गांवों में रात-रातभर तक बिजली गुल रहती है। शाम को ही कटौती शुरू हो जाने से शाम ढले घर आने वाले मजदूरपेशा लोगों को भारी दिक्कत उठानी पड़ रही है।


बिजली के साथ जल संकट

घंटों तक बिजली बंद रहने से लोगों को जल संकट भी झेलना पड़ रहा है। गांवों में जलदाय विभाग के कुओं व नलकूप पर लगी मोटरें रात-रातभर तक बंद पड़ी रहती है। टंकियां खाली होने के बाद पानी भरने की कोई व्यवस्था नहीं होती। इससे लोगों को टैंकरों से पानी खरीदना पड़ रहा है। पानी की कमी और बिजली कटौती के कारण लोगों की समस्या में दिनोंदिन इजाफा हो रहा है। समय पर बिजली नहीं मिलने से कई गांवों में जलापूर्ति बाधित हो रही है।


सभी को अपर्याप्त आपूर्ति

शहरी क्षेत्र में करीब दस दिन से अघोषित बिजली कटौती की जा रही है। दो दिन से समस्या और गहरा गई है। ग्रामीण क्षेत्र महीनेभर कटौती का संकट झेल रहे है। जिले को मिलने वाली बिजली में कटौती करने से न किसानों को पर्याप्त बिजली मिल रही है और ना ही उद्योगों को दी जा रही है। घरेलू कनेक्शनों को भी कटौती का दंश झेलना पड़ा रहा है। वैसे बारिश के साथ ही बिजली की मांग व आपूर्ति में घटत-बढ़त रहती है, लेकिन इस बार शहरी क्षेत्र में समस्या गहराने से लोग आक्रोशित है।

बिजली कटौती को लेकर उभरा गुस्सा

Bhaskar News Tuesday, July 21, 2009 07:56 [IST]
पाली. शहर में सोमवार को दिन भर चली बिजली की आंख मिचौली के कारण लोगों का गुस्सा रात 11 बजे उस दौरान फूट पड़ा जब डिस्कॉम ने बिना बताएं शहर को एक बार फिर अंधेरे में कर दिया।


रात में करीबन डेढ़ घंटे तक पूरे शहर में कटआउट रहा। बिजली महकमे की मनमानी से दुखी लोगों ने देर रात आदर्श नगर तथा हाऊसिंग बोर्ड जीएसएस पर पहुंचकर प्रदर्शन किया। हाऊसिंग बोर्ड में तो एकबारगी डिस्कॉमकर्मियों तथा नागरिकों के बीच हाथापाई की नौबत बन गई, सूचना के मिलने के बाद मौके पर पहुंची पुलिस तथा जेईएन ने बीच-बचाव कर मामला शांत कराया। लोगों का कहना था कि बिजली काटने का समय तो निर्धारित होना चाहिए पहले घोषित और अब ये अघोषित कटौती ने हमें परेशान कर दिया है।


इधर अधिकारी भी राज्य में बिजली की बढ़ती खपत तथा कम आपूर्ति के चलते फ्रीक्वैंवी बनाए रखने के लिए जयपुर से कट रही बिजली के कारण अपने आपको असहाय बता रहे थे।


जमकर सुनाई खरी-खोटी

रात को लाइट जाने के बाद कुछ देर के लिए लोगों ने सब्र रखा लेकिन आधे घंटे बाद जब लाइट नहीं आई तो आदर्श नगर तथा हाऊसिंग बोर्ड जीएसएस पर तीन दर्जन से अधिक लोग पहुंच गए। उन्होंने डिस्कॉमकर्मियों को जमकर खरी-खोटी सुनाई।


आदर्श नगर पर कोई अधिकारी नहीं होने के कारण कर्मचारियों को लोगों के गुस्से से रूबरू होना पड़ा। तो इधर हाऊसिंग बोर्ड में जेईएन आस्था विजय ने लोगों से समझाइश की कि बिजली सीधे जयपुर से कट रही है इसमें पाली ऑफिस की कोई भूमिका नहीं है। इस पर भी लोग नहीं माने और नारे लगाने लगे। एकबारगी तो स्थिति हाथापाई तक पहुंच गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने बीच-बचाव कर लोगों को शांत कराया। बिजली रात लगभग 12 बजे आई तब तक दोनो जीएसएस पर लोग जमे रहे।


‘सूचना मिलने के बाद मैं जीएसएस पर पहुंच गया था। लोगों का कहना था कि घोषित कटौती करों अघोषित नहीं, यह तो सीधे जयपुर से कट रही है।’

- गजेन्द्र देवड़ा, जेईएन, आदर्श नगर जीएसएस


‘लाइट सीधे जयपुर से कट रही है। लाइट जाते ही जीएसएस पर पहुंच गई थी। लोगों से समझाइश की, जिस पर वे शांत हो गए। लाइट की यह स्थिति कब तक रहेगी मालूम नहीं।’

- आस्था विजय, जेईएन, हाऊसिंग बोर्ड जीएसएस


‘आपूर्ति तथा मांग के बीच तालमेल नहीं बैठने के कारण फ्रीकैंवसी अधिक हो रही है। इस स्थिति में जयपुर से सीधे 132केवी जीएसएस पर सूचना मिलती है तथा लाइट काट दी जाती है। इसमें पाली को कोई रोल नहीं रहता। रात को पचपन मिनट लाइट कट रहने की सूचना मिली थी।’

- उमेश माथुर, एक्सईएन, डिस्कॉम, पाली


कब-कब गई बिजली

शहर में सोमवार को दिन भर बिजली के आने-जाने का क्रम चला। दिन में चार बार बिजली गई। सबसे पहले सुबह साढ़े पांच बजे बिजली गई जो साढ़े सात बजे वापस आई। दोपहर में एक से तीन बजे तक फिर बिजली काटी गई। इसी तरह शाम से छह से सात बजे तथा रात साढ़े दस से बारह बजे तक भी कटआउट रहा। दिन भर उमस से बेहाल रहे लोगों को गुस्सा रात को फूट पड़ा।

हर घंटे लाखों का झटका

Bhaskar News Wednesday, July 22, 2009 07:05 [IST]
पाली. जिलेभर में पिछले तीन दिनों से चल रही अघोषित कटौती से उद्योग जगत के साथ अन्य बिजली आधारित कारोबारी भी प्रभावित हो रहे हैं। गौरतलब है कि यहां उद्योगों को प्रति घंटे की कटौती से पचास लाख का झटका सहन करना पड़ रहा है।


इधर, छोटे कामगारों की हालत भी पतली है। बिजली कटौती के दौरान कहीं कार्य ठप रखा जाता है तो कहीं डीजल की खपत कर जनरेटर के माध्यम से कार्य किया जा रहा है। यह अघोषित कटौती कब तक जारी रहेगी इस बारे में डिस्कॉम अधिकारियों के पास भी कोई जवाब नहीं है।


हर घंटे सैकड़ों लीटर डीजल : उद्यमियों की माने तो एक फैक्ट्री में बिजली कटौती के दौरान कार्य जारी रखने के लिए उन्हे एक घंटे में लगभग पंद्रह लीटर डीजल खर्च करना पड़ता है। इस स्थिति में हर उद्योगपति को बिजली के मुकाबले चार गुणा अधिक खर्च उत्पाद पर करना पड़ रहा है। उद्यमी विनय बंब ने बताया कि यदि जनरेटर नहीं चलाएं तो फैक्ट्री में लगे श्रमिकों को दिया वेतन भी व्यर्थ जाता है तथा उत्पादन पर भी असर पड़ता है। इस दोहरी हानि से बचने के लिए जनरेटर से कार्य चलाया जा रहा है।


थम रहा क्रेशर का शोर


शहर के आस-पास लगभग 10 क्रेशर स्थित है। दिन भर क्रेशन के शोर से आबाद यह क्षेत्र बिजली जाने के दौरान वीरानी के साए में चले जाते हैं। क्रेशर मालिक गौतमचंद मेहता बताते हैं कि एक क्रेशर पर 40-50 लेबर रहती है। जनरेटर अधिक महंगा पड़ता है।


छोटे कामगार, बड़ा घाटा


इस्त्री, वेल्डिंग, इलेक्ट्रिक रिपेयरिंग सहित बिजली से चलने वाले लघु उद्योगों को बिजली कटौती बड़ा घाटा दे रही है। इस्त्री की दुकान चलाने वाले रामलाल ने बताया कि हर दुकानदान को प्रतिदिन दो से तीन सौ रुपए का घाटा बिजली जाने से उठाना पड़ रहा है। यह घाटा हमारे लिए बहुत ज्यादा है। समय पर कपड़े नहीं देने से घाटे के साथ ग्राहकों की दो बात भी सुननी पड़ती है। वेल्डिंग की दुकान के मालिक जगदीश बताते हैं कि घोषित हो या अघोषित, बिजली जाने से सबको घाटा ही है।


किया धरने का एलान


मुस्लिम समाज के मौलाना अजीज अहमद ने कहा कि यदि डिस्कॉम द्वारा 48 घंटे के भीतर बिजली आपूर्ति सुचारु नहीं की गई तो कलेक्ट्रेट पर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। प्रवक्ता मंजूर अहमद चिश्ती ने बताया कि प्रतिदिन छह से सात घंटे बिजली कटौती से आमजन त्रस्त है। डिस्कॉम को कटौती की समय सीमा तय करनी चाहिए।


‘पानी के साथ अब बिजली की किल्लत से उद्यमियों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। घोषित से अधिक अघोषित कटौती से परेशानी होती है। कपड़े के साथ मोटरें भी खराब हो रही हैं।’

- धनपतराज मेहता, उद्यमी


‘प्रतिदिन लाखों का घाटा उद्यमियों को उठाना पड़ रहा है। एक समस्या निपटती नहीं कि दूसरी खड़ी हो जाती है। उद्योगों को लेकर सरकार सजग नजर नहीं आ रही है।’

- विनय बंब, उद्यमी


‘मांग के अनुरूप आपूर्ति नहीं मिलने से राज्यभर में बिजली सप्लाई व्यवस्था लड़खड़ाई हुई है। फ्रीक्वेंसी बढ़ने के चक्कर में सीधे जयपुर से लाइट काट दी जाती है। शीघ्र ही सप्लाई सुचारु हो जाएगी।’

- पीएम खत्री, एसई, डिस्कॉम पाली


ब्रेक डाउन ने बिगाड़ा गणित


घोषित की बजाय अघोषित कटौती उद्यमियों के लिए ज्यादा दुखदायी साबित हो रही है। उद्यमी धनपतराज मेहता ने बताया कि एकदम ब्रेकडाउन होने से मशीन पर चढ़ा पूरा कपड़ा खराब हो जाता है। समय पर जनरेटर नहीं चलने के कारण एसिड व हाइपोक्लोराइड तथा कलर में पड़े कपड़े के खराब होने की संभावना रहती है। लाइट आने के बाद हाई वोल्टेज आने के कारण प्रतिदिन एक-दो मोटर तो जल ही जाती है। काम प्रभावित न हो इसलिए मैकेनिक को भी मासिक वेतन पर रखने की मजबूरी बन गई है।

महंगाई ने बिगाड़ा जायका

पाली. देश भर में महंगाई की मार ने गरीब की मनपसंद दाल का ‘जायका’ बिगाड़कर रख दिया है। पिछले दो माह में ही दाम से उसकी थाली से दाल का मीनू गायब हो रहा है। दालों के दामों में हुई अप्रत्याशित बढ़ोतरी से दाल उत्पादित सब्जियां तथा नमकीन के भावों पर भी असर होने लगा है। पापड़ के दाम भी दस रुपए प्रति किलो बढ़ गए है। महंगाई के कारण दाल के भाव लगातार बढ़ते जा रहे है।


साल भर पहले दामों में बढ़ोतरी का सिलसिला शुरू हुआ था,वह अभी तक थमता नजर नहीं आ रहा है। वर्तमान में तुअर की दाल 85 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई है तो मूंग की दाल के भाव भी 60 रुपए किलो तक हो गए है। ऐसे में गरीब तथा मध्यम वर्ग के लोगों को दाल का स्वाद लेने से पहले ही उनको कड़वाहट महसूस होने लगी है।


पापड़ व मुंगोड़ी पर भी असर


दालों से बनने वाले पापड़, मुंगोड़ी तथा राबोड़ी पर भी इसका असर साफ तौर पर नजर आने लगा है। भावों में बढ़ोतरी के बाद इन लोगों ने भी मजबूरीवश अपने उत्पादों के बढ़ा दिए है। पापड़ के दाम एक महीने पहले 66 रुपए प्रतिकिलो थे। वह अब 80 रुपए किलो कर दिए गए है। यहीं हाल मुंगोड़ी का भी है। मुंगोड़ी के दाम दस रुपए प्रतिकिलो बढ़कर 70 रुपए कर दिए गए है। नमकीन के भाव भी पिछले सोमवार से ही बढ़ाकर 80 रुपए प्रतिकिलो के हिसाब से चल रहे है, जबकि पिछले माह में ही इसके भाव 68 रुपए प्रतिकिलो थे।


मिर्चीबड़े की साइज हुई छोटी


तीखे स्वाद का पर्याय बने मिर्चीबड़े की साइज पर भी दालों के भावों का असर हुआ है। दुकानदारों ने अपने उत्पाद के दाम तो नहीं बढ़ाए है बल्कि उसकी साइज को छोटा करके बेच रहे है। दुकानदार शिवजी प्रजापत का कहना है कि दाम बढ़ाने पर ग्राहकी पर असर हो सकता है इसको देखते हुए उन्होंने मसाले की मात्रा को कम कर साइज छोटी कर दी है ताकि ग्राहकों का आकर्षण मिर्चीबड़े के प्रति बना रह सके।


दाल के भावों पर एक नजर(व्यापारियों के अनुसार)


दाल वर्तमान 1 माह पूर्व 1 साल पहले


मूंग दाल 60 50 38


मोगर 64 54 42


मसूर 64 50 48


तुअर 85 60 45


चनादाल 35 28 25


उड़द 60 45 40


पापड़ व नमकीन


पापड़ 80 66 40


मुंगोड़ी 70 60 42


नमकीन 80 65 55


(सभी भाव प्रति किलो के हिसाब से है)


‘एक तरफ मंदी का माहौल तथा दूसरी तरफ मंहगाई की मार ने गृहणियों पर असर डाला है। महंगाई तो बढ़ गई मगर मंदी के कारण तनख्वाह व बिजनेस का स्तर नहीं बढ़ा है। जो दाल कुछ साल पहले 27 रुपए किलो थी। अब 80 रुपए किलो है। इससे रसोई चलाना भारी हो गया है।’ -सुमित्रा जैन,जोधपुर मार्ग


‘महंगाई के जमाने में परिवार को संतुलित आहार देना भारी पड़ रहा है। उसने तो जीवन में कभी नहीं सोचा कि दाल के भाव इतने बढ़ेंगे। पहले घर पर शाम को रोटी के साथ दाल-चावल रोज बनते थे। भाव बढ़ने के बाद अब सप्ताह में एक बार ही बनाने पड़ रहे है।’ -शबनम पठान,पानी दरवाजा मार्ग


‘ महंगाई ने रसोई चलाना मंहगा कर दिया है। हर घर में लगभग हर दूसरे दिन दाल जरूर बनती है। ऐसे में तो अन्य सब्जियों से ही काम चलाना पड़ रहा है।’-ममता चौहान,इंद्रा कालोनी


‘दाल के महंगे होने से अन्य वस्तुएं पर भी इसका असर हो रहा है। जो मुंगोड़ी 20 रुपए किलो तथा पापड़ 40 रुपए किलो ही थे। जिस स्तर से मंहगाई बढ़ रही है उसे देखकर तो दाल के साथ ही पापड़ भी मीनू से गायब हो सकता है।’-लीला राजपुरोहित,आदर्श नगर