Bhaskar News Monday, July 20, 2009 07:55 [IST]
सिरोही. उत्तरी ग्रीड में कहीं पर भी कुछ खराबी आ जाए राज्यभर में बिजली संकट मंडराने लगता है। पिछले माहभर से उत्पादन इकाइयों के ठप रहने और इसी तरह की अन्य समस्याओं के कारण सिरोही, जालोर व पाली समेत राज्यभर को अघोषित बिजली कटौती का दंश झेलना पड़ रहा है। बिजली संकट इस कदर गहराया हुआ है कि आवाजाही का कोई निश्चित समय नहीं है।
बिजली निगम अधिकारी भी नहीं जानते कि कटौती कब होगी और कब सुचारू की जाएगी। बस जयपुर से दूरभाष पर बिजली कट करने का एक आदेश मिलता है और बिजली गुल कर दी जाती है। सुचारू कब होगी इसके लिए जयपुर से ही वापस आदेश मिलता है। बिजली संकट के कारण न केवल गृहिणियां परेशान है वरन् उद्योग-धंधों पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
सूत्र बताते है कि उत्तरी ग्रीड में कहीं पर भी तकनीकी खराबी आने पर लोड बढ़ जाता है। ऐसे में लोड कम करने के लिए बिजली कटौती करनी पड़ती है। बिजली उत्पादन इकाइयों में खराबी के कारण भी लोड बढ़ जाता है। सूरतगढ़, सिंगरौली, कोटा समेत अन्य जगहों पर लगे इकाइयों में अक्सर खराबी आती है।
आदेश क्रमांक फलां, आपूर्ति रोकेंx अघोषित बिजली कटौती का सिस्टम काफी दिलचस्प है। इसके तहत डिस्कॉम कार्यालय में एक मैसेज आता है कि ग्रामीण या शहरी क्षेत्र की आपूर्ति तत्काल प्रभाव से रोक दी जाए। इसके साथ ही लोड डिस्पेस के लिए जारी आदेश क्रमांक भी बताए जाते है। आदेश मिलते ही तत्काल बिजली आपूर्ति रोक दी जाती है। आपूर्ति कब बहाल होगी यह किसी को पता नहीं रहता। कुछ समय बाद (कुछ मिनट या घंटों तक) बिजली बहाल करवाने का फिर आदेश जारी किया जाता है। इसके साथ ही आपूर्ति रोकने के आदेश क्रमांक का हवाला देते हुए सुचारू करने का आदेश क्रमांक भी सुनाया जाता है।
खपत, कम और ज्यादा
बिजली की आपूर्ति व मांग एक सरीखी नहीं रहती है। ज्यादा बारिश होने पर खपत कम हो जाती है। सर्दी के दिनों में घरेलू बिजली की खपत कम होती है, लेकिन सिंचाई के लिए कृषि कनेक्शनों पर लोड बढ़ जाता है। उत्पादन इकाइयों में खराबी आने पर कई बार बड़े उद्योगों में ज्यादा कटौती की जाती है। शत-प्रतिशत तक कटौती के आदेश भी जारी किए जाते है। ऐसी स्थिति में ग्रामीण इलाकों में घंटों तक बिजली कटौती रहती है। इस बार शहरी क्षेत्र भी लगभग तीन घंटे नियमित रूप से अतिरिक्त कटौती झेल रहे है।
उमस का कहर, पसीने से तरबतर
बिजली के अभाव में गर्मी से राहत पाने को लगे उपकरण बंद पड़े रहते है। बारिश के दिन होने से उमस का कहर बना रहता है। ऐसे में लोग गर्मी व उमस से जूझने को विवश है। दिनभर पसीने से तरबतर रहते है। कइयों को खुले में आकर बैठना पड़ रहा है। कामकाजी लोगों को पसीने व उमस का कहर झेलते हुए दफ्तरों में ही बैठना पड़ा। दुकानदार भी खासे परेशान रहे। घरों में लोग हाथ पंखी से हवा झल कर राहत पाने का प्रयास करते नजर आते है।
अंधेरे में बढ़ी चोरी की वारदातें
रातभर बिजली गुल रहने से आपराधिक वारदातों में भी बढ़ोतरी हो रही है। गांवों में पथ प्रकाश की सुविधा नहीं होने से चोर वारदात को अंजाम दे जाते है। सवेरे तालें टूटे दिखने पर ही पता चलता है कि रात को अंधेरे में कोई सामान चुरा ले गया। अंधेरी रातों में रोशनी की कोई व्यवस्था नहीं होने से गांवों में अक्सर चोर गिरोह सक्रिय होते है। अंधेरे में वे आसानी से वारदात अंजाम दे जाते है। कुछ दिनों से सिरोही शहर समेत आसपास के गांवों में चोर हाथ आजमा चुके है।
‘उत्तरी ग्रीड में कहीं पर भी खराबी आने पर फ्रिकवेंसी कम हो जाती है। इससे लोड कम करना पड़ता है। पिछले कुछ दिनों से इस तरह की समस्या बढ़ी है। तकनीकी खराबी है, शीघ्र ही स्थिति बहाल हो जाएगी।’
- बीएल खमेसरा, प्रबंध निदेशक, डिस्कॉम, जोधपुर
‘शहरी व ग्रामीण क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों से ज्यादा ही अघोषित बिजली कटौती हो रही है। समस्या समाधान के लिए विद्युत निगम कमिश्नर व एमडी से बात की जा चुकी है। वे बताते है कि राज्यभर में बिजली संकट गहराया हुआ है। शीघ्र ही समस्या का समाधान हो जाएगा।’
- पी.रमेश, जिला कलेक्टर, सिरोही
‘कोटा यूनिट में खराबी आने से कटौती की जा रही है। पिछले कुछ दिनों से जयपुर से मिलने वाले आदेश के मुताबिक ही कटौती की जा रही है। शहरी क्षेत्र में लगभग तीन घंटे की कटौती हो रही है। वैसे भी ३५ लाख यूनिट की मांग के मुकाबले २८ फीसदी तक ही बिजली मिल पा रही है।’
- एमआर चौधरी, एईएन, डिस्कॉम सिरोही डिवीजन
‘आबूरोड क्षेत्र में मांग के मुकाबले बीस प्रतिशत तक कम बिजली मिल रही है। करीब छह लाख यूनिट प्रतिमाह की मांग है। डिवीजन के आबूरोड में साढ़े तीन लाख व रेवदर में डेढ़ लाख यूनिट की मांग है। बरसात के कारण मांग में घटत-बढ़त रहती है। इस कारण रेवदर क्षेत्र के कृषि कनेक्शनों में अभी खपत नहीं है और मांग में भी कमी आ रही है।’
- अविनाश सिंघवी, एक्सईएन, डिस्कॉम, आबूरोड डिवीजन
गांवों में रातभर अंधेरा
ग्रामीण क्षेत्र में माहभर से बिजली की अघोषित कटौती की जा रही है। आसपास के जावाल, मोहब्बतनगर, कैलाशनगर, पाडीव, पालड़ी एम., डोडुआ, सिलोइया, मामावली, वराल, चडुआल, तंवरी, मेर मांडवाड़ा समेत कई गांवों में बिजली कटौती की समस्या बनी हुई है। गांवों में रात-रातभर तक बिजली गुल रहती है। शाम को ही कटौती शुरू हो जाने से शाम ढले घर आने वाले मजदूरपेशा लोगों को भारी दिक्कत उठानी पड़ रही है।
बिजली के साथ जल संकट
घंटों तक बिजली बंद रहने से लोगों को जल संकट भी झेलना पड़ रहा है। गांवों में जलदाय विभाग के कुओं व नलकूप पर लगी मोटरें रात-रातभर तक बंद पड़ी रहती है। टंकियां खाली होने के बाद पानी भरने की कोई व्यवस्था नहीं होती। इससे लोगों को टैंकरों से पानी खरीदना पड़ रहा है। पानी की कमी और बिजली कटौती के कारण लोगों की समस्या में दिनोंदिन इजाफा हो रहा है। समय पर बिजली नहीं मिलने से कई गांवों में जलापूर्ति बाधित हो रही है।
सभी को अपर्याप्त आपूर्ति
शहरी क्षेत्र में करीब दस दिन से अघोषित बिजली कटौती की जा रही है। दो दिन से समस्या और गहरा गई है। ग्रामीण क्षेत्र महीनेभर कटौती का संकट झेल रहे है। जिले को मिलने वाली बिजली में कटौती करने से न किसानों को पर्याप्त बिजली मिल रही है और ना ही उद्योगों को दी जा रही है। घरेलू कनेक्शनों को भी कटौती का दंश झेलना पड़ा रहा है। वैसे बारिश के साथ ही बिजली की मांग व आपूर्ति में घटत-बढ़त रहती है, लेकिन इस बार शहरी क्षेत्र में समस्या गहराने से लोग आक्रोशित है।
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