Wednesday, July 22, 2009

हर घंटे लाखों का झटका

Bhaskar News Wednesday, July 22, 2009 07:05 [IST]
पाली. जिलेभर में पिछले तीन दिनों से चल रही अघोषित कटौती से उद्योग जगत के साथ अन्य बिजली आधारित कारोबारी भी प्रभावित हो रहे हैं। गौरतलब है कि यहां उद्योगों को प्रति घंटे की कटौती से पचास लाख का झटका सहन करना पड़ रहा है।


इधर, छोटे कामगारों की हालत भी पतली है। बिजली कटौती के दौरान कहीं कार्य ठप रखा जाता है तो कहीं डीजल की खपत कर जनरेटर के माध्यम से कार्य किया जा रहा है। यह अघोषित कटौती कब तक जारी रहेगी इस बारे में डिस्कॉम अधिकारियों के पास भी कोई जवाब नहीं है।


हर घंटे सैकड़ों लीटर डीजल : उद्यमियों की माने तो एक फैक्ट्री में बिजली कटौती के दौरान कार्य जारी रखने के लिए उन्हे एक घंटे में लगभग पंद्रह लीटर डीजल खर्च करना पड़ता है। इस स्थिति में हर उद्योगपति को बिजली के मुकाबले चार गुणा अधिक खर्च उत्पाद पर करना पड़ रहा है। उद्यमी विनय बंब ने बताया कि यदि जनरेटर नहीं चलाएं तो फैक्ट्री में लगे श्रमिकों को दिया वेतन भी व्यर्थ जाता है तथा उत्पादन पर भी असर पड़ता है। इस दोहरी हानि से बचने के लिए जनरेटर से कार्य चलाया जा रहा है।


थम रहा क्रेशर का शोर


शहर के आस-पास लगभग 10 क्रेशर स्थित है। दिन भर क्रेशन के शोर से आबाद यह क्षेत्र बिजली जाने के दौरान वीरानी के साए में चले जाते हैं। क्रेशर मालिक गौतमचंद मेहता बताते हैं कि एक क्रेशर पर 40-50 लेबर रहती है। जनरेटर अधिक महंगा पड़ता है।


छोटे कामगार, बड़ा घाटा


इस्त्री, वेल्डिंग, इलेक्ट्रिक रिपेयरिंग सहित बिजली से चलने वाले लघु उद्योगों को बिजली कटौती बड़ा घाटा दे रही है। इस्त्री की दुकान चलाने वाले रामलाल ने बताया कि हर दुकानदान को प्रतिदिन दो से तीन सौ रुपए का घाटा बिजली जाने से उठाना पड़ रहा है। यह घाटा हमारे लिए बहुत ज्यादा है। समय पर कपड़े नहीं देने से घाटे के साथ ग्राहकों की दो बात भी सुननी पड़ती है। वेल्डिंग की दुकान के मालिक जगदीश बताते हैं कि घोषित हो या अघोषित, बिजली जाने से सबको घाटा ही है।


किया धरने का एलान


मुस्लिम समाज के मौलाना अजीज अहमद ने कहा कि यदि डिस्कॉम द्वारा 48 घंटे के भीतर बिजली आपूर्ति सुचारु नहीं की गई तो कलेक्ट्रेट पर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। प्रवक्ता मंजूर अहमद चिश्ती ने बताया कि प्रतिदिन छह से सात घंटे बिजली कटौती से आमजन त्रस्त है। डिस्कॉम को कटौती की समय सीमा तय करनी चाहिए।


‘पानी के साथ अब बिजली की किल्लत से उद्यमियों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। घोषित से अधिक अघोषित कटौती से परेशानी होती है। कपड़े के साथ मोटरें भी खराब हो रही हैं।’

- धनपतराज मेहता, उद्यमी


‘प्रतिदिन लाखों का घाटा उद्यमियों को उठाना पड़ रहा है। एक समस्या निपटती नहीं कि दूसरी खड़ी हो जाती है। उद्योगों को लेकर सरकार सजग नजर नहीं आ रही है।’

- विनय बंब, उद्यमी


‘मांग के अनुरूप आपूर्ति नहीं मिलने से राज्यभर में बिजली सप्लाई व्यवस्था लड़खड़ाई हुई है। फ्रीक्वेंसी बढ़ने के चक्कर में सीधे जयपुर से लाइट काट दी जाती है। शीघ्र ही सप्लाई सुचारु हो जाएगी।’

- पीएम खत्री, एसई, डिस्कॉम पाली


ब्रेक डाउन ने बिगाड़ा गणित


घोषित की बजाय अघोषित कटौती उद्यमियों के लिए ज्यादा दुखदायी साबित हो रही है। उद्यमी धनपतराज मेहता ने बताया कि एकदम ब्रेकडाउन होने से मशीन पर चढ़ा पूरा कपड़ा खराब हो जाता है। समय पर जनरेटर नहीं चलने के कारण एसिड व हाइपोक्लोराइड तथा कलर में पड़े कपड़े के खराब होने की संभावना रहती है। लाइट आने के बाद हाई वोल्टेज आने के कारण प्रतिदिन एक-दो मोटर तो जल ही जाती है। काम प्रभावित न हो इसलिए मैकेनिक को भी मासिक वेतन पर रखने की मजबूरी बन गई है।

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