Wednesday, July 22, 2009

महंगाई ने बिगाड़ा जायका

पाली. देश भर में महंगाई की मार ने गरीब की मनपसंद दाल का ‘जायका’ बिगाड़कर रख दिया है। पिछले दो माह में ही दाम से उसकी थाली से दाल का मीनू गायब हो रहा है। दालों के दामों में हुई अप्रत्याशित बढ़ोतरी से दाल उत्पादित सब्जियां तथा नमकीन के भावों पर भी असर होने लगा है। पापड़ के दाम भी दस रुपए प्रति किलो बढ़ गए है। महंगाई के कारण दाल के भाव लगातार बढ़ते जा रहे है।


साल भर पहले दामों में बढ़ोतरी का सिलसिला शुरू हुआ था,वह अभी तक थमता नजर नहीं आ रहा है। वर्तमान में तुअर की दाल 85 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई है तो मूंग की दाल के भाव भी 60 रुपए किलो तक हो गए है। ऐसे में गरीब तथा मध्यम वर्ग के लोगों को दाल का स्वाद लेने से पहले ही उनको कड़वाहट महसूस होने लगी है।


पापड़ व मुंगोड़ी पर भी असर


दालों से बनने वाले पापड़, मुंगोड़ी तथा राबोड़ी पर भी इसका असर साफ तौर पर नजर आने लगा है। भावों में बढ़ोतरी के बाद इन लोगों ने भी मजबूरीवश अपने उत्पादों के बढ़ा दिए है। पापड़ के दाम एक महीने पहले 66 रुपए प्रतिकिलो थे। वह अब 80 रुपए किलो कर दिए गए है। यहीं हाल मुंगोड़ी का भी है। मुंगोड़ी के दाम दस रुपए प्रतिकिलो बढ़कर 70 रुपए कर दिए गए है। नमकीन के भाव भी पिछले सोमवार से ही बढ़ाकर 80 रुपए प्रतिकिलो के हिसाब से चल रहे है, जबकि पिछले माह में ही इसके भाव 68 रुपए प्रतिकिलो थे।


मिर्चीबड़े की साइज हुई छोटी


तीखे स्वाद का पर्याय बने मिर्चीबड़े की साइज पर भी दालों के भावों का असर हुआ है। दुकानदारों ने अपने उत्पाद के दाम तो नहीं बढ़ाए है बल्कि उसकी साइज को छोटा करके बेच रहे है। दुकानदार शिवजी प्रजापत का कहना है कि दाम बढ़ाने पर ग्राहकी पर असर हो सकता है इसको देखते हुए उन्होंने मसाले की मात्रा को कम कर साइज छोटी कर दी है ताकि ग्राहकों का आकर्षण मिर्चीबड़े के प्रति बना रह सके।


दाल के भावों पर एक नजर(व्यापारियों के अनुसार)


दाल वर्तमान 1 माह पूर्व 1 साल पहले


मूंग दाल 60 50 38


मोगर 64 54 42


मसूर 64 50 48


तुअर 85 60 45


चनादाल 35 28 25


उड़द 60 45 40


पापड़ व नमकीन


पापड़ 80 66 40


मुंगोड़ी 70 60 42


नमकीन 80 65 55


(सभी भाव प्रति किलो के हिसाब से है)


‘एक तरफ मंदी का माहौल तथा दूसरी तरफ मंहगाई की मार ने गृहणियों पर असर डाला है। महंगाई तो बढ़ गई मगर मंदी के कारण तनख्वाह व बिजनेस का स्तर नहीं बढ़ा है। जो दाल कुछ साल पहले 27 रुपए किलो थी। अब 80 रुपए किलो है। इससे रसोई चलाना भारी हो गया है।’ -सुमित्रा जैन,जोधपुर मार्ग


‘महंगाई के जमाने में परिवार को संतुलित आहार देना भारी पड़ रहा है। उसने तो जीवन में कभी नहीं सोचा कि दाल के भाव इतने बढ़ेंगे। पहले घर पर शाम को रोटी के साथ दाल-चावल रोज बनते थे। भाव बढ़ने के बाद अब सप्ताह में एक बार ही बनाने पड़ रहे है।’ -शबनम पठान,पानी दरवाजा मार्ग


‘ महंगाई ने रसोई चलाना मंहगा कर दिया है। हर घर में लगभग हर दूसरे दिन दाल जरूर बनती है। ऐसे में तो अन्य सब्जियों से ही काम चलाना पड़ रहा है।’-ममता चौहान,इंद्रा कालोनी


‘दाल के महंगे होने से अन्य वस्तुएं पर भी इसका असर हो रहा है। जो मुंगोड़ी 20 रुपए किलो तथा पापड़ 40 रुपए किलो ही थे। जिस स्तर से मंहगाई बढ़ रही है उसे देखकर तो दाल के साथ ही पापड़ भी मीनू से गायब हो सकता है।’-लीला राजपुरोहित,आदर्श नगर

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