बिसेन
Jul 20, 02:10 am
भोपाल। शहरी तथा ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल समस्या से पार पाने के लिए पीएचई मंत्री गौरीशंकर बिसेन ने जल सलाहकार समितियां बनाने की युक्ति निकाली है। प्रदेश के प्रत्येक जिले में ऐसी समितियां बनेंगी और जल संकट हो या नहीं, इनकी हर तीसरे माह बैठक होगी।
पेयजल संकट के दौर में प्रदेश के सभी जिलों का दौरा कर विभागीय समीक्षा कर चुके बिसेन को अनुभव हुआ कि अकेला उनका विभाग अपने बूते पेयजल समस्या का समाधान नहीं खोज सकता। इस विषय पर जनप्रतिनिधियों की भागीदारी बढ़ाने के लिए उन्होंने जल सलाहकार समितियां बनाने का सुझाव सरकार को दिया है। बिसेन के मुताबिक ये समितियां पेयजल प्रबंधन के लिए विभाग को सुझाव देने के साथ ही वैकल्पिक जलप्रदाय की व्यवस्था के बारे में भी सलाह देंगी। जलस्त्रोतों को समृद्ध बनाने के लिए स्टाप डेम आदि बनाने और पानी की बर्बादी रोकने के बारे में भी सलाहकार समितियां अपनी भूमिका रेखांकित करेंगी।
घटते भूमिगत जल भण्डार को लेकर चिंतित पीएचई मंत्री ट्यूबवेल खनन को सीमित करने से इंकार करते हुए कहते हैं कि उनकी रिचार्जिग की व्यवस्था पर ध्यान दिया जाएगा। उनके अनुसार अगले पांच साल में प्रदेश के सभी नगर तथा ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल मुहैया कराने की सरकार की मंशा में ये समितियां कारगर सिद्ध होंगी। प्रत्येक जल सलाहकार समिति में संबंधित जिले के सांसद, विधायक, महापौर, जिला पंचायत, नगर पंचायत और नगरपालिका अध्यक्ष समेत अन्य जनप्रतिनिधि सदस्य होंगे। समिति के नोडल अधिकारी पीएचई विभाग के कार्यपालन यंत्री को बनाया जाएगा। पीएचई मंत्री के अनुसार ये समितियां जिलों में पेयजल प्रबंधन के लिए विभाग को आवश्यक सुझाव देंगी।
हकीकत जानने छोटे-बड़े नेताओं से मिल रहे बिसेन
पीएचई और सहकारिता मंत्री गौरीशंकर बिसेन ने अपने विभाग से संबंधित योजनाओं और कार्यक्रमों की वास्तविक स्थिति जानने का अपना ही तरीका ईजाद किया है। वे अपने प्रस्तावित दौरों की जानकारी क्षेत्रीय सांसद, विधायक, जिले के अधिकारी और संबंधित क्षेत्र के जिला पंचायत से लेकर नगर पंचायत के पदाधिकारी और अन्य जनप्रतिनिधियों को भेजते हैं। वरिष्ठ पदाधिकारियों को भेजे जाने वाले पत्रों में वे खुद इन जनप्रतिनिधियों से अपने कार्यक्रमों में मौजूद रहने का आग्रह करते हैं। यह सूचना भेजने में राजनैतिक दल के आधार पर भेदभाव नहीं होता। बिसेन के अनुसार इस तरह दौरे या किसी कार्यक्रम पर जिले में जाने पर उस जिले की वास्तविक स्थिति उन्हें पता चल जाती है और विभाग द्वारा दी गई जानकारी की सत्यता की परख भी इससे हो जाती है।
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