Patrika Sunday, July 12, 2009
बाड़मेर। आमजन बेबस है, पशुधन बेसहारा हो गया है। सब कुछ जानते हुए प्रशासन अनजान बना हुआ है। गायें मौत के मुंह में जा रही हैं। पर्याप्त वर्षा नहीं होने से स्थिति और खराब हो रही है। जिला प्रशासन ने इस बार 1239 पशु शिविर स्वीकृत किए जिनमें से 851 ही शुरू हो पाए। इनमें करीब डेढ़ लाख पशुओं को संरक्षण मिला। जब तक शिविर चले, चारे का संकट बना रहा। प्रशासन यही कहता रहा कि शिविरों में चारे की आपूर्ति की व्यवस्था सुधार दी जाएगी, लेकिन एक भी दिन ऎसा नहीं आया, जब पचास फीसदी शिविरों में भी पर्याप्त मात्रा में चारा उपलब्ध रहा हो। इस बीच गायों की अकाल मौत होती रही। अठारह जून को चारे के अभाव में आधे से अघिक शिविर बंद हो गए। तीस जून तक तो सभी 851 शिविर बंद कर दिए गए।
धरा रहा सरकार का आदेश
बाड़मेर जिले में बरसात नहीं होने के कारण राज्य सरकार ने 15 जुलाई तक पशु शिविर संचालित करने के निर्देश दिए थे लेकिन यह आदेश कागजों में ही धरा रह गया। चारा ठेकेदारों की मनमानी के आगे लाचार प्रशासन ने अंतत: घुटने टेक दिए और एक भी शिविर आगे नहीं बढ़ पाया।
कहां गए डेढ़ लाख पशु!
सवाल यह है कि आपदा प्रबंधन के तहत शिविरों में पले डेढ़ लाख पशु अचानक कहां चले गए? अभी तक जिले में घास का एक नया तिनका भी नहीं उपजा है। ये पशु भूख से मरने की स्थिति में हैं।
संख्या उपलब्ध नहीं है
जहां से चारे की डिमाण्ड आ रही है, वहां चारा भेजा जा रहा है। पांच जुलाई तक तो काफी शिविर चल रहे थे। फिलहाल कितने चल रहे हैं, इसकी संख्या तो अभी उपलब्ध नहीं है। -रामलाल विश्नोई, अतिरिक्त जिला कलक्टर, बाड़मेर
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