जबलपुर. नेत्रहीनों की अंधेरी जिंदगी से व्यवस्था और सरकारी तंत्र के क्रूर रवैये ने रोशनी का आभास भी छीन लिया। शासकीय विभागों की भर्राशाही गैर जिम्मेदाराना कार्यप्रणाली का शिकार दृष्टिहीन छात्रों को होना पड़ा। संजीवनी नगर स्थित दृष्टिबाधित छात्रावास की बिजली कटने से करीब आधा सैकड़ा दृष्टिबाधित छात्र पिछले दो दिनों से मोहताजी का जीवन जी रहे हैं।
छात्रावास में न तो भोजन बन रहा है न ही पीने के पानी की व्यवस्था है। भीषण गर्मी से परेशान छात्र फुटपाथ पर गुजर बसर कर रहे हैं। सरकारी विभाग ने विद्युत मंडल को बिल की अदायगी नहीं की और लकीर के फक ीर विद्युत मंडल ने नेत्रहीनों से बिजली का सहारा छीन लिया।
राज्य अपंग कल्याण संस्थान पंचायत एवं सामाजिक न्याय विभाग द्वारा संचालित होने वाले इस छात्रावास की स्थापना विगत तीस वर्ष पूर्व वर्ष 1980 में की गई थी, वर्तमान में प्रदेश के रीवा, सतना, शहडोल, ग्वालियर, सीधी, भोपाल, छिंदवाड़ा आदि जिलों के 46 छात्र रह रहे हैं। इनमें अधिकांश छात्र तीन वर्षो से अधिक समय से रह रहे हैं।
शनिवार को दोपहर बाद बिजली का बिल जमा न होने के कारण यहां की बिजली काट दी गई थी जिसके कारण पिछली रात मेस में भोजन नहीं बनने से छात्रों को भूखे पेट सोना पड़ा, गर्मी के कारण रात को छात्रों ने समीप ही स्थित फुटपाथ पर अपना डेरा जमा लिया लेकिन इन दृष्टिबाधितां की सुध किसी ने नहीं ली।
एमफिल कर रहे सतना के छात्र राजभान पटेल, ग्वालियर के शिवेंन्द्र सिंह परिहार, सिंगरौली के इंद्रेश पाठक ने बताया कि छात्रावास की बिजली काटे जाने की सूचना न्यास के ज्वांइट डायरेक्टर प्रदीप बैस व जिला कलेक्टर हरिरंजन राव को दी गई थी लेकिन प्रशासन द्वारा उनकी सुध नहीं लिए जाने से उन्हें इस विपत्ति से जूझना पड़ रहा है।
23 हजार बिल बकाया
दृष्टिहीन छात्रावास पर मार्च माह से 23 हजार रुपए का बिल बकाया है। तीन बार नोटिस दिए जाने के बाद भी जब बिल का भुगतान नहीं किया गया तो शनिवार को छात्रावास की बिजली काट दी गई। - अजय पांडे- एसई सिटी सर्किल
भास्कर न्यूज Monday, July 06, 2009 07:38 [IST]
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