
जैव विविधता पर हो रहे वैश्विक संकट से जुड़ी खबरें अक्सर हमारे लिए चिंता का सबब बनती हैं। हाल ही में यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलेंड के डेविड ए लूथर और स्मिथसोनियन माइग्रेटरी बर्ड सेंटर के रसेल ग्रीनबर्ग ने एक अघ्ययन में पाया है कि "मैंग्रूव" ईको-सिस्टम पर अपने जीवन निर्वाह के लिए निर्भर रहने वाली जीव-जंतुओं की बड़ी संख्या वैश्विक स्तर पर विलुप्ति के संकट का सामना कर रही हैं। गौरतलब है कि अपेक्षाकृत गर्म क्षेत्रों में कोस्टल एरियाज के आस-पास इन वन क्षेत्रों का विस्तार पाया जाता है।
स्टडी के अनुसार समुद्र तटों के फैलाव के साथ ही समुद्र स्तर में परिवर्तन और प्रदूषण से इन मैंग्रूव वनों का विस्तार दिनों-दिन सीमित हो रहा है और इससे इस हैबिटेट में रहने वाली एंफीबियंस, रेप्टाइल्स, मैमल्स और बड्र्स की प्रजातियों के लिए खतरा पैदा हो रहा है।


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