
पेडों की बेलगाम कटाई पृथ्वी पर विभिन्न जानवरों और पक्षियों के अस्तित्व को संकट में डाल रही है। यदि पेडों की कटाई पर तुरंत रोक नहीं लगाई गई, तो आने वाले समय में हम बहुत से पशु-पक्षियों को देखने से वंचित हो सकते हैं। जलवायु परिवर्तन को लेकर वैश्विक सम्मेलन में भी चिंता जाहिर की गई है।
हाल ही आयोजित यूएन फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन क्लाइमेट चेंज (यूएनएफसीसीसी) के वैश्विक शिखर सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन की समस्या से निपटने के लिए सामूहिक कारगर कदम उठाए जाने पर जोर दिया गया। यदि इस समस्या से निपटने के लिए जरूरी संसाधन जुटा लिया गया तो संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के वल्र्ड कंजर्वेशन मॉनिटरिंग सेंटर (डब्ल्यूसीएमसी) द्वारा विकसित कार्बन एंड बायोडायवर्सिटी डेमंस्ट्रेशन एटलस पर अमल करने में आसानी होगी।
संयुक्त राष्ट्र के अपर महासचिव और यूनेप के कार्यकारी निदेशक एकिम स्टीनर ने कहा, ""इस वैश्विक आर्थिक संकट के दौर में एक-एक डालर या यूरो या फिर रूपए का इस्तेमाल इस तरह किया जाना चाहिए कि हमें पहले से दोगुना नतीजा मिले। यूनेप प्रवक्ता निक नुटल ने कहा कि शोध से हमें पता चला है कि जहां भी वनों का विनाश हो रहा है, वहां जलवायु परिवर्तन की समस्या के गहराने और जीव प्रजातियों का अस्तित्व मिटने का खतरा बढ रहा है।


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