Bhaskar News Tuesday, July 07, 2009 06:07 [IST]
सीकर. जिले के सभी विधायकों ने सीकर जिले को फ्लोराइड से मुक्ति दिलाने के लिए बनाई गई अम्ब्रेला परियोजना की वित्तीय मंजूरी के लिए आवाज उठाने का आश्वासन दिया है। आबकारी व उद्योग मंत्री राजेंद्र पारीक ने कहा कि इसके लिए गंभीरता से प्रयास किए जाएंगे। लक्ष्मणगढ़ विधायक गोविंदसिंह डोटासरा ने कहा कि अम्ब्रेला प्रोजेक्ट की वित्तीय मंजूरी के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।
माकपा विधायक पेमाराम ने कहा कि अम्ब्रेला प्रोजेक्ट की मंजूरी के लिए वे विधानसभा में सरकार को घेरेंगे। आवश्यक होने पर केंद्र सरकार को भी घेरा जाएगा। इस मामले में वे जनता के साथ सड़कों पर उतरेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि जनता फ्लोराइड का धीमा जहर पीने को विवश है, वहीं सरकार चुपचाप तमाशा देख रही है।
‘फ्लोराइड से मुक्ति दिलाओ ’
एमएलए साहब, हमें फ्लोराइड पानी से मुक्ति दिला दीजिए । हमारे दांत भी चले गए। हाथ-पैर काम नहीं कर पा रहे है। हमने तो जैसे-तैसे कर देख लिया, लेकिन हमें अब हमारे बच्चों की चिंता सताने लगी है। ऐसी ही पीड़ा लोगों ने सोमवार को लक्ष्मणगढ़ विधायक गोविंदसिंह डोटासरा के सामने बयां की। विधायक ने मामला विधानसभा में उठाने का भरोसा जताया।
फ्लोराइड मुक्ति के लिए सौंपा ज्ञापन
लक्ष्मणगढ़ की दिसनाऊ ग्राम पंचायत के रिणु गांव के लोगों ने सक्रियता दिखाते हुए अम्ब्रेला प्रोजेक्ट की मंजूरी के लिए सोमवार को जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। लक्ष्मणगढ़ विधायक गोविंदसिंह डोटासरा के नेतृत्व में दिए ज्ञापन में फ्लोराइड पानी पीने से होने वाली बीमारियों का भी उल्लेख किया गया।
ज्ञापन देने वाले शिष्टमंडल में सरपंच प्रकाश ख्यालिया, तिड़ोकी बड़ी के सरपंच भवानीसिंह, खेड़ी राडान के सरपंच छाजूराम, पंचायत समिति सदस्य जगदीश पिलानियां, सांवरमल, सांवत खां, राधेश्याम शर्मा, जोगेंद्रसिंह, मूलदास स्वामी, पूर्व सरपंच भंवरलाल सोनी, मूलाराम, बनवारी, महेशकुमार,मालू खां, पंच जीवणराम, निसार खां, सांवरमल शर्मा आदि ग्रामीण शामिल थे।
284 गांवों की भलाई की किसी को फिक्र नहीं
कृष्णकुमार शर्मा Monday, July 06, 2009 04:56 [IST]
सीकर. फ्लोराइड की समस्या को मुद्दा बनाकर लोकसभा और विधानसभा पहुंचने वाले जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के कारण क्षेत्र की महत्वाकांक्षी अंब्रेला परियोजना अभी तक सिरे नहीं चढ़ पाई है। 284 गांवों के लाखों लोगों को फ्लोराइड से मुक्ति दिलाने के मकसद से बनाई गई यह योजना अब तक जयपुर के जलदाय विभाग के दफ्तर से बाहर नहीं निकली, जबकि इसे दिल्ली में केंद्र सरकार को भेजना था। बताया जा रहा है कि राज्य सरकार को फंडिंग एजेंसी नहीं मिली है।
इसलिए यह योजना फाइल में अटकी पड़ी है। जलदाय विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वे दो बाद इस प्रोजेक्ट को जयपुर भेज चुके हैं। पहले यह प्रोजेक्ट 332.34 करोड़ का बनाया था। समय पर मूर्त रूप नहीं मिलने के कारणइसे फिर से भेजा गया है, जिसमें 564 करोड़ रुपए खर्च का प्रस्ताव दिया गया। वर्ल्ड बैंक सरीखी एजेंसी के इंतजार में मामला ज्यों का त्यों अटका हुआ है।
राज्य सरकार ने जर्मन सरकार से सहायता से चूरू व हनुमानगढ़ जिलों के गांवों में मीठा पानी मुहैया कराने की दिशा में काम शुरू कर दिया, लेकिन इस पर किसी ओर से पहल नहीं हो रही। वर्ष 2006 में ही इस मुद्दे पर विधानसभा में भी चर्चा हुई। तब इसे अगले वित्तीय वर्ष में स्वीकृत करने का आश्वासन दिया गया, लेकिन नई सरकार आने तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। पूर्व केंद्रीय मंत्री शीशराम ओला ने भी भरोसा दिलाया था कि राज्य सरकार प्रपोजल भेजती है तो वे केंद्र सरकार से स्वीकृति दिला देंगे।
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