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Friday, July 10, 2009

शुद्ध पेयजल भी मयस्सर नहीं!

Bhaskar नगर संवाददाता Friday, July 10, 2009 05:16 [IST]
हनुमानगढ़. राज्य सरकार एक तरफ जहां खाद्य पदार्थो की शुद्धता परखने के लिए बहुचर्चित ‘शुद्ध के लिए युद्ध’ अभियान चला रही है, वहीं हनुमानगढ़ जिले के करीब 89 गांवों के लाखों लोगों को शुद्ध पानी का घूंट तक नसीब नहीं हो रहा है। इन गांवों के वाशिंदों की त्रासदी यह है कि फ्लोराईड मिटीगेशन प्रोग्राम भी राहत दिलाने में नाकाम रहा है। खास बात है कि राज्य सरकार ने उन क्षेत्रों में इस योजना की शुरुआत की थी जहां डेढ़ पीपीएम से अधिक मात्रा में फ्लोराइड की शिकायत थी। इसके तहत जिले के 89 गांवों को शामिल किया गया था।
सेम से राहत, समस्या यथावत
जिले के टिब्बी, हनुमानगढ़ व नोहर तहसील में भी कुछ गांवों में फ्लोराइडयुक्त पानी की शिकायत है लेकिन रावतसर तहसील के सर्वाधिक गांव इसकी चपेट में हैं। जानकारों के मुताबिक सेम प्रभावित होने के कारण क्षेत्र के गांवों में यह समस्या रही लेकिन सेम निवारण में काफी सफलता मिलने के बाद भी शोरायुक्त पानी का संकट बरकरार है।
इन गांवों में गंभीर समस्या
पीएचईडी ने जिले के 89 गांवों में फ्लोराइडयुक्त प्रभावित क्षेत्र में शामिल किया गया है। इनमें रावतसर क्षेत्र के पांच केकेएम, एक एसपीएम, दस एसपीएम, चार केकेएसएम, तीन केकेएम, दो केकेएसएम-ए, एक केबीएम, 19 आरडब्ल्यूडी, दो एसपीएम ए, दो केकेएम, पांच केकेएसएम, नौ केएम, दो एसपीडी, दो केडब्ल्यूडी, चार बीडब्ल्यूएम, सात एसपीडी, दो बीपीएम, दो एएसएम, 10 बीपीएम, 15 एनडब्ल्यूडी, दो केएचडी, तीन केडीएम, पांच एसपीएम, एक एएसएम, 11 केडब्ल्यूडी, दो आरडब्ल्यूएसएम, छह केडब्ल्यूडी, एक आरडब्ल्यूएसएम, तीन एएम, दो सीवाईएम, छह डीडब्ल्यूडी, सात, आठ व एएम, एक डीडब्ल्यूएम, 75 आरडी, तीन जेडडब्ल्यूएम, चार केकेएम, 122 आरडी, पांच एएम, चार आरपीएम, एकएनजीएम, 13 केडब्ल्यूडी-ए, ए एएम व एक आरपीएम शामिल हैं।
इसी तरह नोहर क्षेत्र के गांव एक व पांच केएम, 18 आरडब्ल्यूडी, टिब्बी क्षेत्र के गांव आठ एफटीपी-बी, 11 एफटीपी, छह केएचआर, 11-12 जीजीआर, एक बीआरडब्ल्यू, दो केएचआर, 18 एनजीसी, पांच आरडब्ल्यूडी, 10, 19, 21-22-27-28 एनजीसी, 14 जीजीआर, एक एचएमएच, सात-आठ आरडब्ल्यूडी, 15 जीजीआर, दो एसबीएन, एक एनजीआर, दो जीजीआर, दो आरके, पांच टीएलडब्ल्यू, तीन आरके, एक आरके, पांच आरके, 16 जीजीआर व तीन जीजीआर में फ्लोराइडयुक्त की मात्रा परिमाप से अधिक है। इसी तरह हनुमानगढ़ तहसील के गांव आठ एमडब्ल्यूएस, दो एलके व सात एमडब्ल्यूएम फ्लोराइड प्रभावित क्षेत्र है।
मंत्री को भी थी हकीकत की जानकारी
इलाके में दूषित जलापूर्ति को लेकर जब पिछली सरकार के दौरान विधानसभा में मामला उठाया गया तो तत्कालीन जनस्वास्थ्य मंत्री ने स्वीकार किया था कि हैंडपंप व डीसीबी से जलापूर्ति वाले 89 गांवों में फ्लोराइड की मात्रा परिमाप से अधिक है। उन्होंने समस्या से शीघ्र निजात दिलाने का भरोसा दिलाया था लेकिन पांच साल में सरकार ने इस गंभीर मसले पर चुप्पी साधे रखी।
डीफ्लोरीडेशन संयंत्र लगाने पर विचार
राज्य सरकार फ्लोराइड प्रभावित क्षेत्रों में नहरी पानी उपलब्ध करवाने पर विचार कर रही है। प्रभावित गांवों में हैंडपंपों को डीफ्लोरीडेशन इकाइयों से जोड़ने का भी प्रस्ताव है तथा जलाशयों का निर्माण कर उन पर डीफ्लोरीडेशन संयंत्र लगाने पर मंथन जारी है। चूंकि फ्लोराइड प्रभावित अधिकांश गांवों में हैंडपंप से पेयजल उपलब्ध हो रहा है, ऐसे में भौगोलिक व भूगर्भीय विषमताओं के कारण पेयजल की गुणवत्ता प्रभाविक होना स्वाभाविक है।

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