Friday, July 31, 2009
Thursday, July 23, 2009
प्रशासन के कारन है, पेयजल संकट
भीनमाल। महान गणितिज्ञ ब्रह्मगुप्त को AD 628 में आभास होगया था कि भूजल का स्तर धीरे-धीरे निचे जा रहा है। गिरते भूजल स्तर को रोकने के लिए भीनमाल में स्थित सभी तालाबो के केन्द्र में वाव व कुए ख़ुदवाए। बरसात के दिनों में तालाब पानी से पुरा भर जाता था। जिससे तालाब के केन्द्र में बनी वाव व कुआ भी पानी से भर जाता था और ८-१० माह तक पानी में डूबा रहता था। इस प्रकार ब्रह्मगुप्त ने भूजल को रिचार्ज कराने की नई प्रणाली ज्ञात की थी। लेकिन हमारा प्रशासन हमारी धरोवर को नही समझ पाया। पालिका अध्यक्ष के हवाले से एक समाचार प्रकाशित हुआ था कि अधिशाषी अधिकारी के देखरेख में लोग अतिक्रमण कर रहे है। भीनमाल पालिका का एक- एक कर्मचारी करोड्पति है.
भीनमाल का भूजल स्तर निचा जाने के जिम्मेदार पालिका कर्मचारी है। अगर पालिका कर्मचारी तालाबों व नाडियों में कचरा नहीं डलते, तो यह स्रोत्र कभी नष्ट नहीं होते। पालिका ने कचरा डाल कर व रिश्वत लेकर लोगों के कब्जे कराकर तालाबों को नष्ट किया है. जिसका परिणाम अच्छा नहीं होगा. बालोतरा व अलवर वाले हालात 2-3 सालों में यहाँ पर भी देखे जा सकते है. जब प्रशासन पानी के बदले जनता को लाठी देगा.
भीनमाल का भूजल स्तर निचा जाने के जिम्मेदार पालिका कर्मचारी है। अगर पालिका कर्मचारी तालाबों व नाडियों में कचरा नहीं डलते, तो यह स्रोत्र कभी नष्ट नहीं होते। पालिका ने कचरा डाल कर व रिश्वत लेकर लोगों के कब्जे कराकर तालाबों को नष्ट किया है. जिसका परिणाम अच्छा नहीं होगा. बालोतरा व अलवर वाले हालात 2-3 सालों में यहाँ पर भी देखे जा सकते है. जब प्रशासन पानी के बदले जनता को लाठी देगा.
Wednesday, July 22, 2009
बावडी और तालाबके संरक्षण की मांग
भीनमाल। नगर के प्रबुद्धि नागरिकों ने मुख्यमंत्री के नाम उपखंड अधिकारी को ज्ञानप सोंपकर परपंरागत पेयजल स्रोत्र बावडी और तालाबों में नगरपालिका द्वारा कचरा डालने का विरोध किया है। गो-संरक्षण केन्द्र के तत्वाधान में शिवसेना प्रदेश प्रमुख शेखर व्यास, रमेश सुथार (कंप्यूटर) पार्षद उकाराम धाची, पूर्व पार्षद जयरूपाराम माली, हीरालाल सोनी, सहित दर्जनभर नगरवासियों ने उपखंड अधिकारी को ज्ञापन सोंपकर बताया की नगर में दर्जनों की तादाद में बावडी और तालाब बने हुए गई। जिनको पूर्व में पेयजल स्रोत्र के रूप में उपयोग लिया जाता था, लेकिन पिछले दो दशक से नगरपालिका द्वारा पुरे गाँव का कचरा एकत्रित कर इनमे डालने की वजह से उनका पानी दूषित होकर सुख चुका है। ज्ञानप में पालिका कर्मियों को नगर के बावडी व तालाब में कचरा नही डालने और इनमे डाला गया कचरा जल्द से जल्द हटाने की मांग की गई।
घोषित के साथ अघोषित कटौती ने किया बेहाल
Bhaskar News Monday, July 20, 2009 07:55 [IST]
सिरोही. उत्तरी ग्रीड में कहीं पर भी कुछ खराबी आ जाए राज्यभर में बिजली संकट मंडराने लगता है। पिछले माहभर से उत्पादन इकाइयों के ठप रहने और इसी तरह की अन्य समस्याओं के कारण सिरोही, जालोर व पाली समेत राज्यभर को अघोषित बिजली कटौती का दंश झेलना पड़ रहा है। बिजली संकट इस कदर गहराया हुआ है कि आवाजाही का कोई निश्चित समय नहीं है।
बिजली निगम अधिकारी भी नहीं जानते कि कटौती कब होगी और कब सुचारू की जाएगी। बस जयपुर से दूरभाष पर बिजली कट करने का एक आदेश मिलता है और बिजली गुल कर दी जाती है। सुचारू कब होगी इसके लिए जयपुर से ही वापस आदेश मिलता है। बिजली संकट के कारण न केवल गृहिणियां परेशान है वरन् उद्योग-धंधों पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
सूत्र बताते है कि उत्तरी ग्रीड में कहीं पर भी तकनीकी खराबी आने पर लोड बढ़ जाता है। ऐसे में लोड कम करने के लिए बिजली कटौती करनी पड़ती है। बिजली उत्पादन इकाइयों में खराबी के कारण भी लोड बढ़ जाता है। सूरतगढ़, सिंगरौली, कोटा समेत अन्य जगहों पर लगे इकाइयों में अक्सर खराबी आती है।
आदेश क्रमांक फलां, आपूर्ति रोकेंx अघोषित बिजली कटौती का सिस्टम काफी दिलचस्प है। इसके तहत डिस्कॉम कार्यालय में एक मैसेज आता है कि ग्रामीण या शहरी क्षेत्र की आपूर्ति तत्काल प्रभाव से रोक दी जाए। इसके साथ ही लोड डिस्पेस के लिए जारी आदेश क्रमांक भी बताए जाते है। आदेश मिलते ही तत्काल बिजली आपूर्ति रोक दी जाती है। आपूर्ति कब बहाल होगी यह किसी को पता नहीं रहता। कुछ समय बाद (कुछ मिनट या घंटों तक) बिजली बहाल करवाने का फिर आदेश जारी किया जाता है। इसके साथ ही आपूर्ति रोकने के आदेश क्रमांक का हवाला देते हुए सुचारू करने का आदेश क्रमांक भी सुनाया जाता है।
खपत, कम और ज्यादा
बिजली की आपूर्ति व मांग एक सरीखी नहीं रहती है। ज्यादा बारिश होने पर खपत कम हो जाती है। सर्दी के दिनों में घरेलू बिजली की खपत कम होती है, लेकिन सिंचाई के लिए कृषि कनेक्शनों पर लोड बढ़ जाता है। उत्पादन इकाइयों में खराबी आने पर कई बार बड़े उद्योगों में ज्यादा कटौती की जाती है। शत-प्रतिशत तक कटौती के आदेश भी जारी किए जाते है। ऐसी स्थिति में ग्रामीण इलाकों में घंटों तक बिजली कटौती रहती है। इस बार शहरी क्षेत्र भी लगभग तीन घंटे नियमित रूप से अतिरिक्त कटौती झेल रहे है।
उमस का कहर, पसीने से तरबतर
बिजली के अभाव में गर्मी से राहत पाने को लगे उपकरण बंद पड़े रहते है। बारिश के दिन होने से उमस का कहर बना रहता है। ऐसे में लोग गर्मी व उमस से जूझने को विवश है। दिनभर पसीने से तरबतर रहते है। कइयों को खुले में आकर बैठना पड़ रहा है। कामकाजी लोगों को पसीने व उमस का कहर झेलते हुए दफ्तरों में ही बैठना पड़ा। दुकानदार भी खासे परेशान रहे। घरों में लोग हाथ पंखी से हवा झल कर राहत पाने का प्रयास करते नजर आते है।
अंधेरे में बढ़ी चोरी की वारदातें
रातभर बिजली गुल रहने से आपराधिक वारदातों में भी बढ़ोतरी हो रही है। गांवों में पथ प्रकाश की सुविधा नहीं होने से चोर वारदात को अंजाम दे जाते है। सवेरे तालें टूटे दिखने पर ही पता चलता है कि रात को अंधेरे में कोई सामान चुरा ले गया। अंधेरी रातों में रोशनी की कोई व्यवस्था नहीं होने से गांवों में अक्सर चोर गिरोह सक्रिय होते है। अंधेरे में वे आसानी से वारदात अंजाम दे जाते है। कुछ दिनों से सिरोही शहर समेत आसपास के गांवों में चोर हाथ आजमा चुके है।
‘उत्तरी ग्रीड में कहीं पर भी खराबी आने पर फ्रिकवेंसी कम हो जाती है। इससे लोड कम करना पड़ता है। पिछले कुछ दिनों से इस तरह की समस्या बढ़ी है। तकनीकी खराबी है, शीघ्र ही स्थिति बहाल हो जाएगी।’
- बीएल खमेसरा, प्रबंध निदेशक, डिस्कॉम, जोधपुर
‘शहरी व ग्रामीण क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों से ज्यादा ही अघोषित बिजली कटौती हो रही है। समस्या समाधान के लिए विद्युत निगम कमिश्नर व एमडी से बात की जा चुकी है। वे बताते है कि राज्यभर में बिजली संकट गहराया हुआ है। शीघ्र ही समस्या का समाधान हो जाएगा।’
- पी.रमेश, जिला कलेक्टर, सिरोही
‘कोटा यूनिट में खराबी आने से कटौती की जा रही है। पिछले कुछ दिनों से जयपुर से मिलने वाले आदेश के मुताबिक ही कटौती की जा रही है। शहरी क्षेत्र में लगभग तीन घंटे की कटौती हो रही है। वैसे भी ३५ लाख यूनिट की मांग के मुकाबले २८ फीसदी तक ही बिजली मिल पा रही है।’
- एमआर चौधरी, एईएन, डिस्कॉम सिरोही डिवीजन
‘आबूरोड क्षेत्र में मांग के मुकाबले बीस प्रतिशत तक कम बिजली मिल रही है। करीब छह लाख यूनिट प्रतिमाह की मांग है। डिवीजन के आबूरोड में साढ़े तीन लाख व रेवदर में डेढ़ लाख यूनिट की मांग है। बरसात के कारण मांग में घटत-बढ़त रहती है। इस कारण रेवदर क्षेत्र के कृषि कनेक्शनों में अभी खपत नहीं है और मांग में भी कमी आ रही है।’
- अविनाश सिंघवी, एक्सईएन, डिस्कॉम, आबूरोड डिवीजन
गांवों में रातभर अंधेरा
ग्रामीण क्षेत्र में माहभर से बिजली की अघोषित कटौती की जा रही है। आसपास के जावाल, मोहब्बतनगर, कैलाशनगर, पाडीव, पालड़ी एम., डोडुआ, सिलोइया, मामावली, वराल, चडुआल, तंवरी, मेर मांडवाड़ा समेत कई गांवों में बिजली कटौती की समस्या बनी हुई है। गांवों में रात-रातभर तक बिजली गुल रहती है। शाम को ही कटौती शुरू हो जाने से शाम ढले घर आने वाले मजदूरपेशा लोगों को भारी दिक्कत उठानी पड़ रही है।
बिजली के साथ जल संकट
घंटों तक बिजली बंद रहने से लोगों को जल संकट भी झेलना पड़ रहा है। गांवों में जलदाय विभाग के कुओं व नलकूप पर लगी मोटरें रात-रातभर तक बंद पड़ी रहती है। टंकियां खाली होने के बाद पानी भरने की कोई व्यवस्था नहीं होती। इससे लोगों को टैंकरों से पानी खरीदना पड़ रहा है। पानी की कमी और बिजली कटौती के कारण लोगों की समस्या में दिनोंदिन इजाफा हो रहा है। समय पर बिजली नहीं मिलने से कई गांवों में जलापूर्ति बाधित हो रही है।
सभी को अपर्याप्त आपूर्ति
शहरी क्षेत्र में करीब दस दिन से अघोषित बिजली कटौती की जा रही है। दो दिन से समस्या और गहरा गई है। ग्रामीण क्षेत्र महीनेभर कटौती का संकट झेल रहे है। जिले को मिलने वाली बिजली में कटौती करने से न किसानों को पर्याप्त बिजली मिल रही है और ना ही उद्योगों को दी जा रही है। घरेलू कनेक्शनों को भी कटौती का दंश झेलना पड़ा रहा है। वैसे बारिश के साथ ही बिजली की मांग व आपूर्ति में घटत-बढ़त रहती है, लेकिन इस बार शहरी क्षेत्र में समस्या गहराने से लोग आक्रोशित है।
सिरोही. उत्तरी ग्रीड में कहीं पर भी कुछ खराबी आ जाए राज्यभर में बिजली संकट मंडराने लगता है। पिछले माहभर से उत्पादन इकाइयों के ठप रहने और इसी तरह की अन्य समस्याओं के कारण सिरोही, जालोर व पाली समेत राज्यभर को अघोषित बिजली कटौती का दंश झेलना पड़ रहा है। बिजली संकट इस कदर गहराया हुआ है कि आवाजाही का कोई निश्चित समय नहीं है।
बिजली निगम अधिकारी भी नहीं जानते कि कटौती कब होगी और कब सुचारू की जाएगी। बस जयपुर से दूरभाष पर बिजली कट करने का एक आदेश मिलता है और बिजली गुल कर दी जाती है। सुचारू कब होगी इसके लिए जयपुर से ही वापस आदेश मिलता है। बिजली संकट के कारण न केवल गृहिणियां परेशान है वरन् उद्योग-धंधों पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
सूत्र बताते है कि उत्तरी ग्रीड में कहीं पर भी तकनीकी खराबी आने पर लोड बढ़ जाता है। ऐसे में लोड कम करने के लिए बिजली कटौती करनी पड़ती है। बिजली उत्पादन इकाइयों में खराबी के कारण भी लोड बढ़ जाता है। सूरतगढ़, सिंगरौली, कोटा समेत अन्य जगहों पर लगे इकाइयों में अक्सर खराबी आती है।
आदेश क्रमांक फलां, आपूर्ति रोकेंx अघोषित बिजली कटौती का सिस्टम काफी दिलचस्प है। इसके तहत डिस्कॉम कार्यालय में एक मैसेज आता है कि ग्रामीण या शहरी क्षेत्र की आपूर्ति तत्काल प्रभाव से रोक दी जाए। इसके साथ ही लोड डिस्पेस के लिए जारी आदेश क्रमांक भी बताए जाते है। आदेश मिलते ही तत्काल बिजली आपूर्ति रोक दी जाती है। आपूर्ति कब बहाल होगी यह किसी को पता नहीं रहता। कुछ समय बाद (कुछ मिनट या घंटों तक) बिजली बहाल करवाने का फिर आदेश जारी किया जाता है। इसके साथ ही आपूर्ति रोकने के आदेश क्रमांक का हवाला देते हुए सुचारू करने का आदेश क्रमांक भी सुनाया जाता है।
खपत, कम और ज्यादा
बिजली की आपूर्ति व मांग एक सरीखी नहीं रहती है। ज्यादा बारिश होने पर खपत कम हो जाती है। सर्दी के दिनों में घरेलू बिजली की खपत कम होती है, लेकिन सिंचाई के लिए कृषि कनेक्शनों पर लोड बढ़ जाता है। उत्पादन इकाइयों में खराबी आने पर कई बार बड़े उद्योगों में ज्यादा कटौती की जाती है। शत-प्रतिशत तक कटौती के आदेश भी जारी किए जाते है। ऐसी स्थिति में ग्रामीण इलाकों में घंटों तक बिजली कटौती रहती है। इस बार शहरी क्षेत्र भी लगभग तीन घंटे नियमित रूप से अतिरिक्त कटौती झेल रहे है।
उमस का कहर, पसीने से तरबतर
बिजली के अभाव में गर्मी से राहत पाने को लगे उपकरण बंद पड़े रहते है। बारिश के दिन होने से उमस का कहर बना रहता है। ऐसे में लोग गर्मी व उमस से जूझने को विवश है। दिनभर पसीने से तरबतर रहते है। कइयों को खुले में आकर बैठना पड़ रहा है। कामकाजी लोगों को पसीने व उमस का कहर झेलते हुए दफ्तरों में ही बैठना पड़ा। दुकानदार भी खासे परेशान रहे। घरों में लोग हाथ पंखी से हवा झल कर राहत पाने का प्रयास करते नजर आते है।
अंधेरे में बढ़ी चोरी की वारदातें
रातभर बिजली गुल रहने से आपराधिक वारदातों में भी बढ़ोतरी हो रही है। गांवों में पथ प्रकाश की सुविधा नहीं होने से चोर वारदात को अंजाम दे जाते है। सवेरे तालें टूटे दिखने पर ही पता चलता है कि रात को अंधेरे में कोई सामान चुरा ले गया। अंधेरी रातों में रोशनी की कोई व्यवस्था नहीं होने से गांवों में अक्सर चोर गिरोह सक्रिय होते है। अंधेरे में वे आसानी से वारदात अंजाम दे जाते है। कुछ दिनों से सिरोही शहर समेत आसपास के गांवों में चोर हाथ आजमा चुके है।
‘उत्तरी ग्रीड में कहीं पर भी खराबी आने पर फ्रिकवेंसी कम हो जाती है। इससे लोड कम करना पड़ता है। पिछले कुछ दिनों से इस तरह की समस्या बढ़ी है। तकनीकी खराबी है, शीघ्र ही स्थिति बहाल हो जाएगी।’
- बीएल खमेसरा, प्रबंध निदेशक, डिस्कॉम, जोधपुर
‘शहरी व ग्रामीण क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों से ज्यादा ही अघोषित बिजली कटौती हो रही है। समस्या समाधान के लिए विद्युत निगम कमिश्नर व एमडी से बात की जा चुकी है। वे बताते है कि राज्यभर में बिजली संकट गहराया हुआ है। शीघ्र ही समस्या का समाधान हो जाएगा।’
- पी.रमेश, जिला कलेक्टर, सिरोही
‘कोटा यूनिट में खराबी आने से कटौती की जा रही है। पिछले कुछ दिनों से जयपुर से मिलने वाले आदेश के मुताबिक ही कटौती की जा रही है। शहरी क्षेत्र में लगभग तीन घंटे की कटौती हो रही है। वैसे भी ३५ लाख यूनिट की मांग के मुकाबले २८ फीसदी तक ही बिजली मिल पा रही है।’
- एमआर चौधरी, एईएन, डिस्कॉम सिरोही डिवीजन
‘आबूरोड क्षेत्र में मांग के मुकाबले बीस प्रतिशत तक कम बिजली मिल रही है। करीब छह लाख यूनिट प्रतिमाह की मांग है। डिवीजन के आबूरोड में साढ़े तीन लाख व रेवदर में डेढ़ लाख यूनिट की मांग है। बरसात के कारण मांग में घटत-बढ़त रहती है। इस कारण रेवदर क्षेत्र के कृषि कनेक्शनों में अभी खपत नहीं है और मांग में भी कमी आ रही है।’
- अविनाश सिंघवी, एक्सईएन, डिस्कॉम, आबूरोड डिवीजन
गांवों में रातभर अंधेरा
ग्रामीण क्षेत्र में माहभर से बिजली की अघोषित कटौती की जा रही है। आसपास के जावाल, मोहब्बतनगर, कैलाशनगर, पाडीव, पालड़ी एम., डोडुआ, सिलोइया, मामावली, वराल, चडुआल, तंवरी, मेर मांडवाड़ा समेत कई गांवों में बिजली कटौती की समस्या बनी हुई है। गांवों में रात-रातभर तक बिजली गुल रहती है। शाम को ही कटौती शुरू हो जाने से शाम ढले घर आने वाले मजदूरपेशा लोगों को भारी दिक्कत उठानी पड़ रही है।
बिजली के साथ जल संकट
घंटों तक बिजली बंद रहने से लोगों को जल संकट भी झेलना पड़ रहा है। गांवों में जलदाय विभाग के कुओं व नलकूप पर लगी मोटरें रात-रातभर तक बंद पड़ी रहती है। टंकियां खाली होने के बाद पानी भरने की कोई व्यवस्था नहीं होती। इससे लोगों को टैंकरों से पानी खरीदना पड़ रहा है। पानी की कमी और बिजली कटौती के कारण लोगों की समस्या में दिनोंदिन इजाफा हो रहा है। समय पर बिजली नहीं मिलने से कई गांवों में जलापूर्ति बाधित हो रही है।
सभी को अपर्याप्त आपूर्ति
शहरी क्षेत्र में करीब दस दिन से अघोषित बिजली कटौती की जा रही है। दो दिन से समस्या और गहरा गई है। ग्रामीण क्षेत्र महीनेभर कटौती का संकट झेल रहे है। जिले को मिलने वाली बिजली में कटौती करने से न किसानों को पर्याप्त बिजली मिल रही है और ना ही उद्योगों को दी जा रही है। घरेलू कनेक्शनों को भी कटौती का दंश झेलना पड़ा रहा है। वैसे बारिश के साथ ही बिजली की मांग व आपूर्ति में घटत-बढ़त रहती है, लेकिन इस बार शहरी क्षेत्र में समस्या गहराने से लोग आक्रोशित है।
बिजली कटौती को लेकर उभरा गुस्सा
Bhaskar News Tuesday, July 21, 2009 07:56 [IST]
पाली. शहर में सोमवार को दिन भर चली बिजली की आंख मिचौली के कारण लोगों का गुस्सा रात 11 बजे उस दौरान फूट पड़ा जब डिस्कॉम ने बिना बताएं शहर को एक बार फिर अंधेरे में कर दिया।
रात में करीबन डेढ़ घंटे तक पूरे शहर में कटआउट रहा। बिजली महकमे की मनमानी से दुखी लोगों ने देर रात आदर्श नगर तथा हाऊसिंग बोर्ड जीएसएस पर पहुंचकर प्रदर्शन किया। हाऊसिंग बोर्ड में तो एकबारगी डिस्कॉमकर्मियों तथा नागरिकों के बीच हाथापाई की नौबत बन गई, सूचना के मिलने के बाद मौके पर पहुंची पुलिस तथा जेईएन ने बीच-बचाव कर मामला शांत कराया। लोगों का कहना था कि बिजली काटने का समय तो निर्धारित होना चाहिए पहले घोषित और अब ये अघोषित कटौती ने हमें परेशान कर दिया है।
इधर अधिकारी भी राज्य में बिजली की बढ़ती खपत तथा कम आपूर्ति के चलते फ्रीक्वैंवी बनाए रखने के लिए जयपुर से कट रही बिजली के कारण अपने आपको असहाय बता रहे थे।
जमकर सुनाई खरी-खोटी
रात को लाइट जाने के बाद कुछ देर के लिए लोगों ने सब्र रखा लेकिन आधे घंटे बाद जब लाइट नहीं आई तो आदर्श नगर तथा हाऊसिंग बोर्ड जीएसएस पर तीन दर्जन से अधिक लोग पहुंच गए। उन्होंने डिस्कॉमकर्मियों को जमकर खरी-खोटी सुनाई।
आदर्श नगर पर कोई अधिकारी नहीं होने के कारण कर्मचारियों को लोगों के गुस्से से रूबरू होना पड़ा। तो इधर हाऊसिंग बोर्ड में जेईएन आस्था विजय ने लोगों से समझाइश की कि बिजली सीधे जयपुर से कट रही है इसमें पाली ऑफिस की कोई भूमिका नहीं है। इस पर भी लोग नहीं माने और नारे लगाने लगे। एकबारगी तो स्थिति हाथापाई तक पहुंच गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने बीच-बचाव कर लोगों को शांत कराया। बिजली रात लगभग 12 बजे आई तब तक दोनो जीएसएस पर लोग जमे रहे।
‘सूचना मिलने के बाद मैं जीएसएस पर पहुंच गया था। लोगों का कहना था कि घोषित कटौती करों अघोषित नहीं, यह तो सीधे जयपुर से कट रही है।’
- गजेन्द्र देवड़ा, जेईएन, आदर्श नगर जीएसएस
‘लाइट सीधे जयपुर से कट रही है। लाइट जाते ही जीएसएस पर पहुंच गई थी। लोगों से समझाइश की, जिस पर वे शांत हो गए। लाइट की यह स्थिति कब तक रहेगी मालूम नहीं।’
- आस्था विजय, जेईएन, हाऊसिंग बोर्ड जीएसएस
‘आपूर्ति तथा मांग के बीच तालमेल नहीं बैठने के कारण फ्रीकैंवसी अधिक हो रही है। इस स्थिति में जयपुर से सीधे 132केवी जीएसएस पर सूचना मिलती है तथा लाइट काट दी जाती है। इसमें पाली को कोई रोल नहीं रहता। रात को पचपन मिनट लाइट कट रहने की सूचना मिली थी।’
- उमेश माथुर, एक्सईएन, डिस्कॉम, पाली
कब-कब गई बिजली
शहर में सोमवार को दिन भर बिजली के आने-जाने का क्रम चला। दिन में चार बार बिजली गई। सबसे पहले सुबह साढ़े पांच बजे बिजली गई जो साढ़े सात बजे वापस आई। दोपहर में एक से तीन बजे तक फिर बिजली काटी गई। इसी तरह शाम से छह से सात बजे तथा रात साढ़े दस से बारह बजे तक भी कटआउट रहा। दिन भर उमस से बेहाल रहे लोगों को गुस्सा रात को फूट पड़ा।
पाली. शहर में सोमवार को दिन भर चली बिजली की आंख मिचौली के कारण लोगों का गुस्सा रात 11 बजे उस दौरान फूट पड़ा जब डिस्कॉम ने बिना बताएं शहर को एक बार फिर अंधेरे में कर दिया।
रात में करीबन डेढ़ घंटे तक पूरे शहर में कटआउट रहा। बिजली महकमे की मनमानी से दुखी लोगों ने देर रात आदर्श नगर तथा हाऊसिंग बोर्ड जीएसएस पर पहुंचकर प्रदर्शन किया। हाऊसिंग बोर्ड में तो एकबारगी डिस्कॉमकर्मियों तथा नागरिकों के बीच हाथापाई की नौबत बन गई, सूचना के मिलने के बाद मौके पर पहुंची पुलिस तथा जेईएन ने बीच-बचाव कर मामला शांत कराया। लोगों का कहना था कि बिजली काटने का समय तो निर्धारित होना चाहिए पहले घोषित और अब ये अघोषित कटौती ने हमें परेशान कर दिया है।
इधर अधिकारी भी राज्य में बिजली की बढ़ती खपत तथा कम आपूर्ति के चलते फ्रीक्वैंवी बनाए रखने के लिए जयपुर से कट रही बिजली के कारण अपने आपको असहाय बता रहे थे।
जमकर सुनाई खरी-खोटी
रात को लाइट जाने के बाद कुछ देर के लिए लोगों ने सब्र रखा लेकिन आधे घंटे बाद जब लाइट नहीं आई तो आदर्श नगर तथा हाऊसिंग बोर्ड जीएसएस पर तीन दर्जन से अधिक लोग पहुंच गए। उन्होंने डिस्कॉमकर्मियों को जमकर खरी-खोटी सुनाई।
आदर्श नगर पर कोई अधिकारी नहीं होने के कारण कर्मचारियों को लोगों के गुस्से से रूबरू होना पड़ा। तो इधर हाऊसिंग बोर्ड में जेईएन आस्था विजय ने लोगों से समझाइश की कि बिजली सीधे जयपुर से कट रही है इसमें पाली ऑफिस की कोई भूमिका नहीं है। इस पर भी लोग नहीं माने और नारे लगाने लगे। एकबारगी तो स्थिति हाथापाई तक पहुंच गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने बीच-बचाव कर लोगों को शांत कराया। बिजली रात लगभग 12 बजे आई तब तक दोनो जीएसएस पर लोग जमे रहे।
‘सूचना मिलने के बाद मैं जीएसएस पर पहुंच गया था। लोगों का कहना था कि घोषित कटौती करों अघोषित नहीं, यह तो सीधे जयपुर से कट रही है।’
- गजेन्द्र देवड़ा, जेईएन, आदर्श नगर जीएसएस
‘लाइट सीधे जयपुर से कट रही है। लाइट जाते ही जीएसएस पर पहुंच गई थी। लोगों से समझाइश की, जिस पर वे शांत हो गए। लाइट की यह स्थिति कब तक रहेगी मालूम नहीं।’
- आस्था विजय, जेईएन, हाऊसिंग बोर्ड जीएसएस
‘आपूर्ति तथा मांग के बीच तालमेल नहीं बैठने के कारण फ्रीकैंवसी अधिक हो रही है। इस स्थिति में जयपुर से सीधे 132केवी जीएसएस पर सूचना मिलती है तथा लाइट काट दी जाती है। इसमें पाली को कोई रोल नहीं रहता। रात को पचपन मिनट लाइट कट रहने की सूचना मिली थी।’
- उमेश माथुर, एक्सईएन, डिस्कॉम, पाली
कब-कब गई बिजली
शहर में सोमवार को दिन भर बिजली के आने-जाने का क्रम चला। दिन में चार बार बिजली गई। सबसे पहले सुबह साढ़े पांच बजे बिजली गई जो साढ़े सात बजे वापस आई। दोपहर में एक से तीन बजे तक फिर बिजली काटी गई। इसी तरह शाम से छह से सात बजे तथा रात साढ़े दस से बारह बजे तक भी कटआउट रहा। दिन भर उमस से बेहाल रहे लोगों को गुस्सा रात को फूट पड़ा।
हर घंटे लाखों का झटका
Bhaskar News Wednesday, July 22, 2009 07:05 [IST]
पाली. जिलेभर में पिछले तीन दिनों से चल रही अघोषित कटौती से उद्योग जगत के साथ अन्य बिजली आधारित कारोबारी भी प्रभावित हो रहे हैं। गौरतलब है कि यहां उद्योगों को प्रति घंटे की कटौती से पचास लाख का झटका सहन करना पड़ रहा है।
इधर, छोटे कामगारों की हालत भी पतली है। बिजली कटौती के दौरान कहीं कार्य ठप रखा जाता है तो कहीं डीजल की खपत कर जनरेटर के माध्यम से कार्य किया जा रहा है। यह अघोषित कटौती कब तक जारी रहेगी इस बारे में डिस्कॉम अधिकारियों के पास भी कोई जवाब नहीं है।
हर घंटे सैकड़ों लीटर डीजल : उद्यमियों की माने तो एक फैक्ट्री में बिजली कटौती के दौरान कार्य जारी रखने के लिए उन्हे एक घंटे में लगभग पंद्रह लीटर डीजल खर्च करना पड़ता है। इस स्थिति में हर उद्योगपति को बिजली के मुकाबले चार गुणा अधिक खर्च उत्पाद पर करना पड़ रहा है। उद्यमी विनय बंब ने बताया कि यदि जनरेटर नहीं चलाएं तो फैक्ट्री में लगे श्रमिकों को दिया वेतन भी व्यर्थ जाता है तथा उत्पादन पर भी असर पड़ता है। इस दोहरी हानि से बचने के लिए जनरेटर से कार्य चलाया जा रहा है।
थम रहा क्रेशर का शोर
शहर के आस-पास लगभग 10 क्रेशर स्थित है। दिन भर क्रेशन के शोर से आबाद यह क्षेत्र बिजली जाने के दौरान वीरानी के साए में चले जाते हैं। क्रेशर मालिक गौतमचंद मेहता बताते हैं कि एक क्रेशर पर 40-50 लेबर रहती है। जनरेटर अधिक महंगा पड़ता है।
छोटे कामगार, बड़ा घाटा
इस्त्री, वेल्डिंग, इलेक्ट्रिक रिपेयरिंग सहित बिजली से चलने वाले लघु उद्योगों को बिजली कटौती बड़ा घाटा दे रही है। इस्त्री की दुकान चलाने वाले रामलाल ने बताया कि हर दुकानदान को प्रतिदिन दो से तीन सौ रुपए का घाटा बिजली जाने से उठाना पड़ रहा है। यह घाटा हमारे लिए बहुत ज्यादा है। समय पर कपड़े नहीं देने से घाटे के साथ ग्राहकों की दो बात भी सुननी पड़ती है। वेल्डिंग की दुकान के मालिक जगदीश बताते हैं कि घोषित हो या अघोषित, बिजली जाने से सबको घाटा ही है।
किया धरने का एलान
मुस्लिम समाज के मौलाना अजीज अहमद ने कहा कि यदि डिस्कॉम द्वारा 48 घंटे के भीतर बिजली आपूर्ति सुचारु नहीं की गई तो कलेक्ट्रेट पर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। प्रवक्ता मंजूर अहमद चिश्ती ने बताया कि प्रतिदिन छह से सात घंटे बिजली कटौती से आमजन त्रस्त है। डिस्कॉम को कटौती की समय सीमा तय करनी चाहिए।
‘पानी के साथ अब बिजली की किल्लत से उद्यमियों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। घोषित से अधिक अघोषित कटौती से परेशानी होती है। कपड़े के साथ मोटरें भी खराब हो रही हैं।’
- धनपतराज मेहता, उद्यमी
‘प्रतिदिन लाखों का घाटा उद्यमियों को उठाना पड़ रहा है। एक समस्या निपटती नहीं कि दूसरी खड़ी हो जाती है। उद्योगों को लेकर सरकार सजग नजर नहीं आ रही है।’
- विनय बंब, उद्यमी
‘मांग के अनुरूप आपूर्ति नहीं मिलने से राज्यभर में बिजली सप्लाई व्यवस्था लड़खड़ाई हुई है। फ्रीक्वेंसी बढ़ने के चक्कर में सीधे जयपुर से लाइट काट दी जाती है। शीघ्र ही सप्लाई सुचारु हो जाएगी।’
- पीएम खत्री, एसई, डिस्कॉम पाली
ब्रेक डाउन ने बिगाड़ा गणित
घोषित की बजाय अघोषित कटौती उद्यमियों के लिए ज्यादा दुखदायी साबित हो रही है। उद्यमी धनपतराज मेहता ने बताया कि एकदम ब्रेकडाउन होने से मशीन पर चढ़ा पूरा कपड़ा खराब हो जाता है। समय पर जनरेटर नहीं चलने के कारण एसिड व हाइपोक्लोराइड तथा कलर में पड़े कपड़े के खराब होने की संभावना रहती है। लाइट आने के बाद हाई वोल्टेज आने के कारण प्रतिदिन एक-दो मोटर तो जल ही जाती है। काम प्रभावित न हो इसलिए मैकेनिक को भी मासिक वेतन पर रखने की मजबूरी बन गई है।
पाली. जिलेभर में पिछले तीन दिनों से चल रही अघोषित कटौती से उद्योग जगत के साथ अन्य बिजली आधारित कारोबारी भी प्रभावित हो रहे हैं। गौरतलब है कि यहां उद्योगों को प्रति घंटे की कटौती से पचास लाख का झटका सहन करना पड़ रहा है।
इधर, छोटे कामगारों की हालत भी पतली है। बिजली कटौती के दौरान कहीं कार्य ठप रखा जाता है तो कहीं डीजल की खपत कर जनरेटर के माध्यम से कार्य किया जा रहा है। यह अघोषित कटौती कब तक जारी रहेगी इस बारे में डिस्कॉम अधिकारियों के पास भी कोई जवाब नहीं है।
हर घंटे सैकड़ों लीटर डीजल : उद्यमियों की माने तो एक फैक्ट्री में बिजली कटौती के दौरान कार्य जारी रखने के लिए उन्हे एक घंटे में लगभग पंद्रह लीटर डीजल खर्च करना पड़ता है। इस स्थिति में हर उद्योगपति को बिजली के मुकाबले चार गुणा अधिक खर्च उत्पाद पर करना पड़ रहा है। उद्यमी विनय बंब ने बताया कि यदि जनरेटर नहीं चलाएं तो फैक्ट्री में लगे श्रमिकों को दिया वेतन भी व्यर्थ जाता है तथा उत्पादन पर भी असर पड़ता है। इस दोहरी हानि से बचने के लिए जनरेटर से कार्य चलाया जा रहा है।
थम रहा क्रेशर का शोर
शहर के आस-पास लगभग 10 क्रेशर स्थित है। दिन भर क्रेशन के शोर से आबाद यह क्षेत्र बिजली जाने के दौरान वीरानी के साए में चले जाते हैं। क्रेशर मालिक गौतमचंद मेहता बताते हैं कि एक क्रेशर पर 40-50 लेबर रहती है। जनरेटर अधिक महंगा पड़ता है।
छोटे कामगार, बड़ा घाटा
इस्त्री, वेल्डिंग, इलेक्ट्रिक रिपेयरिंग सहित बिजली से चलने वाले लघु उद्योगों को बिजली कटौती बड़ा घाटा दे रही है। इस्त्री की दुकान चलाने वाले रामलाल ने बताया कि हर दुकानदान को प्रतिदिन दो से तीन सौ रुपए का घाटा बिजली जाने से उठाना पड़ रहा है। यह घाटा हमारे लिए बहुत ज्यादा है। समय पर कपड़े नहीं देने से घाटे के साथ ग्राहकों की दो बात भी सुननी पड़ती है। वेल्डिंग की दुकान के मालिक जगदीश बताते हैं कि घोषित हो या अघोषित, बिजली जाने से सबको घाटा ही है।
किया धरने का एलान
मुस्लिम समाज के मौलाना अजीज अहमद ने कहा कि यदि डिस्कॉम द्वारा 48 घंटे के भीतर बिजली आपूर्ति सुचारु नहीं की गई तो कलेक्ट्रेट पर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। प्रवक्ता मंजूर अहमद चिश्ती ने बताया कि प्रतिदिन छह से सात घंटे बिजली कटौती से आमजन त्रस्त है। डिस्कॉम को कटौती की समय सीमा तय करनी चाहिए।
‘पानी के साथ अब बिजली की किल्लत से उद्यमियों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। घोषित से अधिक अघोषित कटौती से परेशानी होती है। कपड़े के साथ मोटरें भी खराब हो रही हैं।’
- धनपतराज मेहता, उद्यमी
‘प्रतिदिन लाखों का घाटा उद्यमियों को उठाना पड़ रहा है। एक समस्या निपटती नहीं कि दूसरी खड़ी हो जाती है। उद्योगों को लेकर सरकार सजग नजर नहीं आ रही है।’
- विनय बंब, उद्यमी
‘मांग के अनुरूप आपूर्ति नहीं मिलने से राज्यभर में बिजली सप्लाई व्यवस्था लड़खड़ाई हुई है। फ्रीक्वेंसी बढ़ने के चक्कर में सीधे जयपुर से लाइट काट दी जाती है। शीघ्र ही सप्लाई सुचारु हो जाएगी।’
- पीएम खत्री, एसई, डिस्कॉम पाली
ब्रेक डाउन ने बिगाड़ा गणित
घोषित की बजाय अघोषित कटौती उद्यमियों के लिए ज्यादा दुखदायी साबित हो रही है। उद्यमी धनपतराज मेहता ने बताया कि एकदम ब्रेकडाउन होने से मशीन पर चढ़ा पूरा कपड़ा खराब हो जाता है। समय पर जनरेटर नहीं चलने के कारण एसिड व हाइपोक्लोराइड तथा कलर में पड़े कपड़े के खराब होने की संभावना रहती है। लाइट आने के बाद हाई वोल्टेज आने के कारण प्रतिदिन एक-दो मोटर तो जल ही जाती है। काम प्रभावित न हो इसलिए मैकेनिक को भी मासिक वेतन पर रखने की मजबूरी बन गई है।
महंगाई ने बिगाड़ा जायका
पाली. देश भर में महंगाई की मार ने गरीब की मनपसंद दाल का ‘जायका’ बिगाड़कर रख दिया है। पिछले दो माह में ही दाम से उसकी थाली से दाल का मीनू गायब हो रहा है। दालों के दामों में हुई अप्रत्याशित बढ़ोतरी से दाल उत्पादित सब्जियां तथा नमकीन के भावों पर भी असर होने लगा है। पापड़ के दाम भी दस रुपए प्रति किलो बढ़ गए है। महंगाई के कारण दाल के भाव लगातार बढ़ते जा रहे है।
साल भर पहले दामों में बढ़ोतरी का सिलसिला शुरू हुआ था,वह अभी तक थमता नजर नहीं आ रहा है। वर्तमान में तुअर की दाल 85 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई है तो मूंग की दाल के भाव भी 60 रुपए किलो तक हो गए है। ऐसे में गरीब तथा मध्यम वर्ग के लोगों को दाल का स्वाद लेने से पहले ही उनको कड़वाहट महसूस होने लगी है।
पापड़ व मुंगोड़ी पर भी असर
दालों से बनने वाले पापड़, मुंगोड़ी तथा राबोड़ी पर भी इसका असर साफ तौर पर नजर आने लगा है। भावों में बढ़ोतरी के बाद इन लोगों ने भी मजबूरीवश अपने उत्पादों के बढ़ा दिए है। पापड़ के दाम एक महीने पहले 66 रुपए प्रतिकिलो थे। वह अब 80 रुपए किलो कर दिए गए है। यहीं हाल मुंगोड़ी का भी है। मुंगोड़ी के दाम दस रुपए प्रतिकिलो बढ़कर 70 रुपए कर दिए गए है। नमकीन के भाव भी पिछले सोमवार से ही बढ़ाकर 80 रुपए प्रतिकिलो के हिसाब से चल रहे है, जबकि पिछले माह में ही इसके भाव 68 रुपए प्रतिकिलो थे।
मिर्चीबड़े की साइज हुई छोटी
तीखे स्वाद का पर्याय बने मिर्चीबड़े की साइज पर भी दालों के भावों का असर हुआ है। दुकानदारों ने अपने उत्पाद के दाम तो नहीं बढ़ाए है बल्कि उसकी साइज को छोटा करके बेच रहे है। दुकानदार शिवजी प्रजापत का कहना है कि दाम बढ़ाने पर ग्राहकी पर असर हो सकता है इसको देखते हुए उन्होंने मसाले की मात्रा को कम कर साइज छोटी कर दी है ताकि ग्राहकों का आकर्षण मिर्चीबड़े के प्रति बना रह सके।
दाल के भावों पर एक नजर(व्यापारियों के अनुसार)
दाल वर्तमान 1 माह पूर्व 1 साल पहले
मूंग दाल 60 50 38
मोगर 64 54 42
मसूर 64 50 48
तुअर 85 60 45
चनादाल 35 28 25
उड़द 60 45 40
पापड़ व नमकीन
पापड़ 80 66 40
मुंगोड़ी 70 60 42
नमकीन 80 65 55
(सभी भाव प्रति किलो के हिसाब से है)
‘एक तरफ मंदी का माहौल तथा दूसरी तरफ मंहगाई की मार ने गृहणियों पर असर डाला है। महंगाई तो बढ़ गई मगर मंदी के कारण तनख्वाह व बिजनेस का स्तर नहीं बढ़ा है। जो दाल कुछ साल पहले 27 रुपए किलो थी। अब 80 रुपए किलो है। इससे रसोई चलाना भारी हो गया है।’ -सुमित्रा जैन,जोधपुर मार्ग
‘महंगाई के जमाने में परिवार को संतुलित आहार देना भारी पड़ रहा है। उसने तो जीवन में कभी नहीं सोचा कि दाल के भाव इतने बढ़ेंगे। पहले घर पर शाम को रोटी के साथ दाल-चावल रोज बनते थे। भाव बढ़ने के बाद अब सप्ताह में एक बार ही बनाने पड़ रहे है।’ -शबनम पठान,पानी दरवाजा मार्ग
‘ महंगाई ने रसोई चलाना मंहगा कर दिया है। हर घर में लगभग हर दूसरे दिन दाल जरूर बनती है। ऐसे में तो अन्य सब्जियों से ही काम चलाना पड़ रहा है।’-ममता चौहान,इंद्रा कालोनी
‘दाल के महंगे होने से अन्य वस्तुएं पर भी इसका असर हो रहा है। जो मुंगोड़ी 20 रुपए किलो तथा पापड़ 40 रुपए किलो ही थे। जिस स्तर से मंहगाई बढ़ रही है उसे देखकर तो दाल के साथ ही पापड़ भी मीनू से गायब हो सकता है।’-लीला राजपुरोहित,आदर्श नगर
साल भर पहले दामों में बढ़ोतरी का सिलसिला शुरू हुआ था,वह अभी तक थमता नजर नहीं आ रहा है। वर्तमान में तुअर की दाल 85 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई है तो मूंग की दाल के भाव भी 60 रुपए किलो तक हो गए है। ऐसे में गरीब तथा मध्यम वर्ग के लोगों को दाल का स्वाद लेने से पहले ही उनको कड़वाहट महसूस होने लगी है।
पापड़ व मुंगोड़ी पर भी असर
दालों से बनने वाले पापड़, मुंगोड़ी तथा राबोड़ी पर भी इसका असर साफ तौर पर नजर आने लगा है। भावों में बढ़ोतरी के बाद इन लोगों ने भी मजबूरीवश अपने उत्पादों के बढ़ा दिए है। पापड़ के दाम एक महीने पहले 66 रुपए प्रतिकिलो थे। वह अब 80 रुपए किलो कर दिए गए है। यहीं हाल मुंगोड़ी का भी है। मुंगोड़ी के दाम दस रुपए प्रतिकिलो बढ़कर 70 रुपए कर दिए गए है। नमकीन के भाव भी पिछले सोमवार से ही बढ़ाकर 80 रुपए प्रतिकिलो के हिसाब से चल रहे है, जबकि पिछले माह में ही इसके भाव 68 रुपए प्रतिकिलो थे।
मिर्चीबड़े की साइज हुई छोटी
तीखे स्वाद का पर्याय बने मिर्चीबड़े की साइज पर भी दालों के भावों का असर हुआ है। दुकानदारों ने अपने उत्पाद के दाम तो नहीं बढ़ाए है बल्कि उसकी साइज को छोटा करके बेच रहे है। दुकानदार शिवजी प्रजापत का कहना है कि दाम बढ़ाने पर ग्राहकी पर असर हो सकता है इसको देखते हुए उन्होंने मसाले की मात्रा को कम कर साइज छोटी कर दी है ताकि ग्राहकों का आकर्षण मिर्चीबड़े के प्रति बना रह सके।
दाल के भावों पर एक नजर(व्यापारियों के अनुसार)
दाल वर्तमान 1 माह पूर्व 1 साल पहले
मूंग दाल 60 50 38
मोगर 64 54 42
मसूर 64 50 48
तुअर 85 60 45
चनादाल 35 28 25
उड़द 60 45 40
पापड़ व नमकीन
पापड़ 80 66 40
मुंगोड़ी 70 60 42
नमकीन 80 65 55
(सभी भाव प्रति किलो के हिसाब से है)
‘एक तरफ मंदी का माहौल तथा दूसरी तरफ मंहगाई की मार ने गृहणियों पर असर डाला है। महंगाई तो बढ़ गई मगर मंदी के कारण तनख्वाह व बिजनेस का स्तर नहीं बढ़ा है। जो दाल कुछ साल पहले 27 रुपए किलो थी। अब 80 रुपए किलो है। इससे रसोई चलाना भारी हो गया है।’ -सुमित्रा जैन,जोधपुर मार्ग
‘महंगाई के जमाने में परिवार को संतुलित आहार देना भारी पड़ रहा है। उसने तो जीवन में कभी नहीं सोचा कि दाल के भाव इतने बढ़ेंगे। पहले घर पर शाम को रोटी के साथ दाल-चावल रोज बनते थे। भाव बढ़ने के बाद अब सप्ताह में एक बार ही बनाने पड़ रहे है।’ -शबनम पठान,पानी दरवाजा मार्ग
‘ महंगाई ने रसोई चलाना मंहगा कर दिया है। हर घर में लगभग हर दूसरे दिन दाल जरूर बनती है। ऐसे में तो अन्य सब्जियों से ही काम चलाना पड़ रहा है।’-ममता चौहान,इंद्रा कालोनी
‘दाल के महंगे होने से अन्य वस्तुएं पर भी इसका असर हो रहा है। जो मुंगोड़ी 20 रुपए किलो तथा पापड़ 40 रुपए किलो ही थे। जिस स्तर से मंहगाई बढ़ रही है उसे देखकर तो दाल के साथ ही पापड़ भी मीनू से गायब हो सकता है।’-लीला राजपुरोहित,आदर्श नगर
Tuesday, July 21, 2009
शिक्षा के प्रसार से आबादी पर रोक
डीएनए/भास्कर नेटवर Saturday, July 18, 2009 10:34 [IST]
जनसंख्या बम और जनसंख्या विस्फोट जैसे मुहावरों पर 1960 और ९७क् के दशक में बहस हुआ करती थी। फिर 1975 में इमरजेंसी आई जिसमें जबर्दस्ती नसबंदियां की गईं। में कुछ जनांकिकी विशेषज्ञों ने बताया कि आबादी में स्थिरता आ रही है और धीरे-धीरे भारत मंे भी जनसंख्या स्थिर हो जाएगी। इसके एक दशक बाद हम अधिक आबादी से मिलने वाले लाभों की चर्चा करने लगे। माना गया कि हमारी अधिक जनसंख्या हमारे लिए संपदा है। वह अधिक उत्पादन करेगी और इससे भी महत्वपूर्ण अधिक खरीदी भी करेगी। लेकिन अब फिर से बढ़ती आबादी पर चिंता जताई जाने लगी है। शायद यही वजह है कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी चाहते हैं कि टीवी पर देर रात तक बेहतरीन कार्यक्रम दिखाए जाएं ताकि लोगों की ऊर्जा कहीं और खर्च हो। कुल मिलाकर उनका जोर जनसंख्या नियंत्रण पर है लेकिन मंत्री को ऐसे हास्यास्पद सुझाव देने के बजाय उन राज्यों के रिकॉर्ड पर विचार करना चाहिए जहां प्रति परिवार दो बच्चों के लक्ष्य को की सीमा से पहले ही हासिल करने मंे सफलता मिली है। इनमें महाराष्ट्र और दक्षिण भारतीय राज्य शामिल हैं। ऐसा शिक्षा के प्रचार-प्रसार और स्वास्थ्य सुविधाओं की लोगों तक पहुंच सुनिश्चित करने की वजह से हो पाया है। उत्तरी राज्यों में ऐसा नहीं हो पा रहा है इसलिए बेहतर तो यह होगा कि आर्थिक विकास के जरिए लोगों का जीवन स्तर बढ़ाया जाए और अधिक आबादी के असर के बारे में उन्हें खुद विचार करने दिया जाए।
जनसंख्या बम और जनसंख्या विस्फोट जैसे मुहावरों पर 1960 और ९७क् के दशक में बहस हुआ करती थी। फिर 1975 में इमरजेंसी आई जिसमें जबर्दस्ती नसबंदियां की गईं। में कुछ जनांकिकी विशेषज्ञों ने बताया कि आबादी में स्थिरता आ रही है और धीरे-धीरे भारत मंे भी जनसंख्या स्थिर हो जाएगी। इसके एक दशक बाद हम अधिक आबादी से मिलने वाले लाभों की चर्चा करने लगे। माना गया कि हमारी अधिक जनसंख्या हमारे लिए संपदा है। वह अधिक उत्पादन करेगी और इससे भी महत्वपूर्ण अधिक खरीदी भी करेगी। लेकिन अब फिर से बढ़ती आबादी पर चिंता जताई जाने लगी है। शायद यही वजह है कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी चाहते हैं कि टीवी पर देर रात तक बेहतरीन कार्यक्रम दिखाए जाएं ताकि लोगों की ऊर्जा कहीं और खर्च हो। कुल मिलाकर उनका जोर जनसंख्या नियंत्रण पर है लेकिन मंत्री को ऐसे हास्यास्पद सुझाव देने के बजाय उन राज्यों के रिकॉर्ड पर विचार करना चाहिए जहां प्रति परिवार दो बच्चों के लक्ष्य को की सीमा से पहले ही हासिल करने मंे सफलता मिली है। इनमें महाराष्ट्र और दक्षिण भारतीय राज्य शामिल हैं। ऐसा शिक्षा के प्रचार-प्रसार और स्वास्थ्य सुविधाओं की लोगों तक पहुंच सुनिश्चित करने की वजह से हो पाया है। उत्तरी राज्यों में ऐसा नहीं हो पा रहा है इसलिए बेहतर तो यह होगा कि आर्थिक विकास के जरिए लोगों का जीवन स्तर बढ़ाया जाए और अधिक आबादी के असर के बारे में उन्हें खुद विचार करने दिया जाए।
Monday, July 20, 2009
जिलों में जल सलाहकार समितियां बनवाएंगे
बिसेन
Jul 20, 02:10 am
भोपाल। शहरी तथा ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल समस्या से पार पाने के लिए पीएचई मंत्री गौरीशंकर बिसेन ने जल सलाहकार समितियां बनाने की युक्ति निकाली है। प्रदेश के प्रत्येक जिले में ऐसी समितियां बनेंगी और जल संकट हो या नहीं, इनकी हर तीसरे माह बैठक होगी।
पेयजल संकट के दौर में प्रदेश के सभी जिलों का दौरा कर विभागीय समीक्षा कर चुके बिसेन को अनुभव हुआ कि अकेला उनका विभाग अपने बूते पेयजल समस्या का समाधान नहीं खोज सकता। इस विषय पर जनप्रतिनिधियों की भागीदारी बढ़ाने के लिए उन्होंने जल सलाहकार समितियां बनाने का सुझाव सरकार को दिया है। बिसेन के मुताबिक ये समितियां पेयजल प्रबंधन के लिए विभाग को सुझाव देने के साथ ही वैकल्पिक जलप्रदाय की व्यवस्था के बारे में भी सलाह देंगी। जलस्त्रोतों को समृद्ध बनाने के लिए स्टाप डेम आदि बनाने और पानी की बर्बादी रोकने के बारे में भी सलाहकार समितियां अपनी भूमिका रेखांकित करेंगी।
घटते भूमिगत जल भण्डार को लेकर चिंतित पीएचई मंत्री ट्यूबवेल खनन को सीमित करने से इंकार करते हुए कहते हैं कि उनकी रिचार्जिग की व्यवस्था पर ध्यान दिया जाएगा। उनके अनुसार अगले पांच साल में प्रदेश के सभी नगर तथा ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल मुहैया कराने की सरकार की मंशा में ये समितियां कारगर सिद्ध होंगी। प्रत्येक जल सलाहकार समिति में संबंधित जिले के सांसद, विधायक, महापौर, जिला पंचायत, नगर पंचायत और नगरपालिका अध्यक्ष समेत अन्य जनप्रतिनिधि सदस्य होंगे। समिति के नोडल अधिकारी पीएचई विभाग के कार्यपालन यंत्री को बनाया जाएगा। पीएचई मंत्री के अनुसार ये समितियां जिलों में पेयजल प्रबंधन के लिए विभाग को आवश्यक सुझाव देंगी।
हकीकत जानने छोटे-बड़े नेताओं से मिल रहे बिसेन
पीएचई और सहकारिता मंत्री गौरीशंकर बिसेन ने अपने विभाग से संबंधित योजनाओं और कार्यक्रमों की वास्तविक स्थिति जानने का अपना ही तरीका ईजाद किया है। वे अपने प्रस्तावित दौरों की जानकारी क्षेत्रीय सांसद, विधायक, जिले के अधिकारी और संबंधित क्षेत्र के जिला पंचायत से लेकर नगर पंचायत के पदाधिकारी और अन्य जनप्रतिनिधियों को भेजते हैं। वरिष्ठ पदाधिकारियों को भेजे जाने वाले पत्रों में वे खुद इन जनप्रतिनिधियों से अपने कार्यक्रमों में मौजूद रहने का आग्रह करते हैं। यह सूचना भेजने में राजनैतिक दल के आधार पर भेदभाव नहीं होता। बिसेन के अनुसार इस तरह दौरे या किसी कार्यक्रम पर जिले में जाने पर उस जिले की वास्तविक स्थिति उन्हें पता चल जाती है और विभाग द्वारा दी गई जानकारी की सत्यता की परख भी इससे हो जाती है।
Jul 20, 02:10 am
भोपाल। शहरी तथा ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल समस्या से पार पाने के लिए पीएचई मंत्री गौरीशंकर बिसेन ने जल सलाहकार समितियां बनाने की युक्ति निकाली है। प्रदेश के प्रत्येक जिले में ऐसी समितियां बनेंगी और जल संकट हो या नहीं, इनकी हर तीसरे माह बैठक होगी।
पेयजल संकट के दौर में प्रदेश के सभी जिलों का दौरा कर विभागीय समीक्षा कर चुके बिसेन को अनुभव हुआ कि अकेला उनका विभाग अपने बूते पेयजल समस्या का समाधान नहीं खोज सकता। इस विषय पर जनप्रतिनिधियों की भागीदारी बढ़ाने के लिए उन्होंने जल सलाहकार समितियां बनाने का सुझाव सरकार को दिया है। बिसेन के मुताबिक ये समितियां पेयजल प्रबंधन के लिए विभाग को सुझाव देने के साथ ही वैकल्पिक जलप्रदाय की व्यवस्था के बारे में भी सलाह देंगी। जलस्त्रोतों को समृद्ध बनाने के लिए स्टाप डेम आदि बनाने और पानी की बर्बादी रोकने के बारे में भी सलाहकार समितियां अपनी भूमिका रेखांकित करेंगी।
घटते भूमिगत जल भण्डार को लेकर चिंतित पीएचई मंत्री ट्यूबवेल खनन को सीमित करने से इंकार करते हुए कहते हैं कि उनकी रिचार्जिग की व्यवस्था पर ध्यान दिया जाएगा। उनके अनुसार अगले पांच साल में प्रदेश के सभी नगर तथा ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल मुहैया कराने की सरकार की मंशा में ये समितियां कारगर सिद्ध होंगी। प्रत्येक जल सलाहकार समिति में संबंधित जिले के सांसद, विधायक, महापौर, जिला पंचायत, नगर पंचायत और नगरपालिका अध्यक्ष समेत अन्य जनप्रतिनिधि सदस्य होंगे। समिति के नोडल अधिकारी पीएचई विभाग के कार्यपालन यंत्री को बनाया जाएगा। पीएचई मंत्री के अनुसार ये समितियां जिलों में पेयजल प्रबंधन के लिए विभाग को आवश्यक सुझाव देंगी।
हकीकत जानने छोटे-बड़े नेताओं से मिल रहे बिसेन
पीएचई और सहकारिता मंत्री गौरीशंकर बिसेन ने अपने विभाग से संबंधित योजनाओं और कार्यक्रमों की वास्तविक स्थिति जानने का अपना ही तरीका ईजाद किया है। वे अपने प्रस्तावित दौरों की जानकारी क्षेत्रीय सांसद, विधायक, जिले के अधिकारी और संबंधित क्षेत्र के जिला पंचायत से लेकर नगर पंचायत के पदाधिकारी और अन्य जनप्रतिनिधियों को भेजते हैं। वरिष्ठ पदाधिकारियों को भेजे जाने वाले पत्रों में वे खुद इन जनप्रतिनिधियों से अपने कार्यक्रमों में मौजूद रहने का आग्रह करते हैं। यह सूचना भेजने में राजनैतिक दल के आधार पर भेदभाव नहीं होता। बिसेन के अनुसार इस तरह दौरे या किसी कार्यक्रम पर जिले में जाने पर उस जिले की वास्तविक स्थिति उन्हें पता चल जाती है और विभाग द्वारा दी गई जानकारी की सत्यता की परख भी इससे हो जाती है।
लोकतंत्र में जनता की आवाज दबा रही सरकार
Jun 29, 12:18 am
भोपाल। पानी के लिए आंदोलन करने वाले कांग्रेस के नेता आरिफ मसूद पर जिला बदर की कार्यवाही को लोकतंत्र में जनता की आवाज दबाने वाला कार्य बताते हुए समाजवादी नेता चौधरी मुनव्वर सलीम ने चेतावनी दी है कि सरकार को इस कार्रवाई का जवाब आंदोलन के रूप में दिया जाएगा। उन्होंने पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि एक अधिकारी के अहंकार के सामने सरकार नतमस्तक है और देश में यह पहला उदाहरण होगा, जब जन समस्या के लिए आंदोलन का पुरस्कार जिला बदर के रूप में दिया जा रहा है।
चौधरी सलीम ने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल का हक सभी को है। श्री मसूद भी अपने इसी अधिकार की मांग के लिए लोगों की आवाज बुलंद करने गए थे, जिनकी आवाज दबी हुई थी। इस प्रदर्शन को भी नगर निगम कमिश्नर ने अपनी प्रतिष्ठा का प्रश्न बनाया और प्रशासन पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर जिला बदर की कार्यवाही के लिए उसे मजबूर कर दिया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह खुद भी संघर्ष करने के बाद इस मुकाम पर पहुंचे हैं। कम से कम उन्हें इस बात पर विचार करना चाहिए कि क्या जन आंदोलन का नेतृत्व करने वाला जिला बदर का हकदार है। चौधरी सलीम ने कहा कि यदि मसूद के खिलाफ कार्यवाही हुई तो आंदोलन किया जाएगा और इसका स्वरूप भी प्रदेशव्यापी रहेगा।
भोपाल। पानी के लिए आंदोलन करने वाले कांग्रेस के नेता आरिफ मसूद पर जिला बदर की कार्यवाही को लोकतंत्र में जनता की आवाज दबाने वाला कार्य बताते हुए समाजवादी नेता चौधरी मुनव्वर सलीम ने चेतावनी दी है कि सरकार को इस कार्रवाई का जवाब आंदोलन के रूप में दिया जाएगा। उन्होंने पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि एक अधिकारी के अहंकार के सामने सरकार नतमस्तक है और देश में यह पहला उदाहरण होगा, जब जन समस्या के लिए आंदोलन का पुरस्कार जिला बदर के रूप में दिया जा रहा है।
चौधरी सलीम ने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल का हक सभी को है। श्री मसूद भी अपने इसी अधिकार की मांग के लिए लोगों की आवाज बुलंद करने गए थे, जिनकी आवाज दबी हुई थी। इस प्रदर्शन को भी नगर निगम कमिश्नर ने अपनी प्रतिष्ठा का प्रश्न बनाया और प्रशासन पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर जिला बदर की कार्यवाही के लिए उसे मजबूर कर दिया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह खुद भी संघर्ष करने के बाद इस मुकाम पर पहुंचे हैं। कम से कम उन्हें इस बात पर विचार करना चाहिए कि क्या जन आंदोलन का नेतृत्व करने वाला जिला बदर का हकदार है। चौधरी सलीम ने कहा कि यदि मसूद के खिलाफ कार्यवाही हुई तो आंदोलन किया जाएगा और इसका स्वरूप भी प्रदेशव्यापी रहेगा।
जनता की आवाज दबाई तो जन आंदोलन
भीलूड़ा के ग्रामीणों पर हुए मुकदमों पर हुई ग्राम सभा
सागवाड़ा, १९ जुलाई (प्रासं.)। पंचायत भवन भीलूड़ा में रविवार को हुई ग्राम सभा में पूर्व काबिना मंत्री कनकमल कटारा ने कहा कि जन समस्याओं पर जनता की आवाज को दबाया गया तो पूरे जिले में जन आंदोलन छेड़ा जायेगा।
बिजली समस्या को लेकर शुक्रवार को हुए चक्काजाम को लेकर सागवाड़ा थाने में दर्ज हुए मुकदमों के विरूद्ध में हुई ग्राम सभा में ग्रामीणों के बीच पहुॅचे कटारा ने कहा कि जनता की जायज मांगों को पूरा करने में सरकार विफल रहीं है और जनता द्वारा आवाज उठाने पर प्रशासन का उपयोग कर उन्हें दबाया जा रहा है। उन्होंने अपने पैतृक गांव में ग्रामीणों के विरूद्ध दर्ज किये गये मुकदमों को राजनैतिक द्धेषता बताते हुए कहा कि पूरे जिले की जनता बिजली समस्या से त्रस्त है लेकिन इस सरकार में अपनी बात उठाना मुश्किल हो गया है। उन्होंने लोगों से आव्हान किया कि वे अपनी समस्याए उन्हें बताये और समाधान नहीं होने पर वे स्वंय जनता के साथ जन आंदोलन करेंगे। सरकारी नुमाईदों के ईशारों पर प्रशासन द्वारा मुकदमे दर्ज करने जैसी कार्यवाही करवाकर जनता की आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। कटारा ने कहा कि भाजपा शासन में इस क्षेत्र को अतिरिक्त बिजली देने की स्वीकृति प्रदान की गयी थी जिससे लोगों को पर्याप्त बिजली मिल रहीं थी लेकिन आज गॉव-गॉव में लोग बिजली समस्या से त्रस्त है।
इससे पूर्व पूर्व सरपंच जवाहर भाटिया, भाजयुमो मंडल अध्यक्ष मांगीलाल भटेवरा, सुनिल पंड्या एवं प्रधानाचार्य नवनीत व्यास ने भी संबोधित किया एवं प्रशासन पर आरोप लगाया कि 5 दिन पूर्व प्रशासन को चेतावनी देने के बाद भी न तो बिजली व्यवस्था में सुधार किया गया और नहीं ग्रामीणों से प्रशासन ने कोई वार्ता की। ग्राम सभा में निर्णय हुआ कि मुकदमे वापस नहीं लिये जाने पर पूरा गॉव एकजूटता से विरोध प्रदर्शन करेगा। भाजपा ग्रामीण मंडल अध्यक्ष नरेंद्र भगत ने आभार ज्ञापित किया। सभा में नानुराम डामोर, कमलाशंकर जोशी, भोगीलाल सुथार, लक्ष्मणलाल पंचाल, श्रीपाल जैन, केवलजी पाटीदार, सहित कई में ग्रामीण उपस्थित थे।
सागवाड़ा, १९ जुलाई (प्रासं.)। पंचायत भवन भीलूड़ा में रविवार को हुई ग्राम सभा में पूर्व काबिना मंत्री कनकमल कटारा ने कहा कि जन समस्याओं पर जनता की आवाज को दबाया गया तो पूरे जिले में जन आंदोलन छेड़ा जायेगा।
बिजली समस्या को लेकर शुक्रवार को हुए चक्काजाम को लेकर सागवाड़ा थाने में दर्ज हुए मुकदमों के विरूद्ध में हुई ग्राम सभा में ग्रामीणों के बीच पहुॅचे कटारा ने कहा कि जनता की जायज मांगों को पूरा करने में सरकार विफल रहीं है और जनता द्वारा आवाज उठाने पर प्रशासन का उपयोग कर उन्हें दबाया जा रहा है। उन्होंने अपने पैतृक गांव में ग्रामीणों के विरूद्ध दर्ज किये गये मुकदमों को राजनैतिक द्धेषता बताते हुए कहा कि पूरे जिले की जनता बिजली समस्या से त्रस्त है लेकिन इस सरकार में अपनी बात उठाना मुश्किल हो गया है। उन्होंने लोगों से आव्हान किया कि वे अपनी समस्याए उन्हें बताये और समाधान नहीं होने पर वे स्वंय जनता के साथ जन आंदोलन करेंगे। सरकारी नुमाईदों के ईशारों पर प्रशासन द्वारा मुकदमे दर्ज करने जैसी कार्यवाही करवाकर जनता की आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। कटारा ने कहा कि भाजपा शासन में इस क्षेत्र को अतिरिक्त बिजली देने की स्वीकृति प्रदान की गयी थी जिससे लोगों को पर्याप्त बिजली मिल रहीं थी लेकिन आज गॉव-गॉव में लोग बिजली समस्या से त्रस्त है।
इससे पूर्व पूर्व सरपंच जवाहर भाटिया, भाजयुमो मंडल अध्यक्ष मांगीलाल भटेवरा, सुनिल पंड्या एवं प्रधानाचार्य नवनीत व्यास ने भी संबोधित किया एवं प्रशासन पर आरोप लगाया कि 5 दिन पूर्व प्रशासन को चेतावनी देने के बाद भी न तो बिजली व्यवस्था में सुधार किया गया और नहीं ग्रामीणों से प्रशासन ने कोई वार्ता की। ग्राम सभा में निर्णय हुआ कि मुकदमे वापस नहीं लिये जाने पर पूरा गॉव एकजूटता से विरोध प्रदर्शन करेगा। भाजपा ग्रामीण मंडल अध्यक्ष नरेंद्र भगत ने आभार ज्ञापित किया। सभा में नानुराम डामोर, कमलाशंकर जोशी, भोगीलाल सुथार, लक्ष्मणलाल पंचाल, श्रीपाल जैन, केवलजी पाटीदार, सहित कई में ग्रामीण उपस्थित थे।
मांगी बिजली, मिली लाठी

अलवर। बिजली-पानी की समस्या को लेकर आक्रोश जताना दिवाकरी क्षेत्र के मुलतान नगर निवासी लोगों को भारी पड़ गया। दिल्ली रोड़ पर रविवार को जाम लगाने के दौरान उन पर पुलिस ने जमकर लाठिया भांजी। पुलिस ने महिला और बुजुर्गो को भी नहीं बख्शा। जाम के मामले में पुलिस ने दो वृद्धों को गिरफ्तार कर करीब सौ लोगों के खिलाफ मामले दर्ज किए हैं।
क्षेत्र में पिछले कई दिनों से लम्बी अवधि तक विद्युत कटौती और पेयजल आपूर्ति के विरोध में दिवाकरी मुलतान नगर के वाशिंदों ने दोपहर करीब पौने एक बजे दिल्ली रोड पर जाम लगा दिया। प्रदर्शन कर रहे लोगों का आरोप था कि जलदाय विभाग और बिजली निगम के अधिकारी शिकायत पर सुनवाई तक नहीं कर रहे। जाम की सूचना पर उद्योगनगर थाना अधिकारी ने मार्ग खुलवाने का प्रयास किया लेकिन लोग पानी-बिजली महकमों के उच्च अधिकारियों को बुलाने की मांग पर अड़े थे।
एएसपी केसर सिंह शेखावत व डॉन के जोस, एसडीएम नारायण की समझाइश भी काम नहीं आई। इस पर पुलिसकर्मियों ने बल प्रयोग शुरू कर दिया और लोगों को वहां से खदेड़ कर जाम खुलवाया। पुलिसकर्मियों ने महिला और बुजुर्गो पर भी लाठी वार किए। पुलिस ने भीड़ का नेतृत्व करने के आरोप में एसआर सेठी और गिरिराज प्रसाद शर्मा को गिरफ्तार कर सौ से अधिक लोगों के खिलाफ मामले दर्ज किए हैं।
किसके आदेश पर लाठीवार दिल्ली रोड पर जाम लगा रहे लोगों पर लाठीचार्ज के आदेश को लेकर विरोधाभासी स्थिति बन गई है। पुलिस अधिकारी जाम खुलवाने के लिए हल्का बल प्रयोग करने की बात कह रहे हैं। वहीं मौके पर मौजूद एसडीएम नारायण सिंह का ने लाठीचार्ज की जानकारी से ही इनकार किया है। उनका कहना है वे मौके पर देरी से पहुंचे और भीड़ को सड़क से हटाने के लिए पुलिस ने कुछ कार्रवाई की थी।
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Sunday, July 19, 2009
जालोर जिले में शिक्षा का हल
भीनमाल- ढाणी से स्कुल दूर होने के कारन यहाँ के कई बच्चे स्कुल नही जा रहे है।
सर्वे में जनता बोली -------------
सर्वे में जनता बोली -------------
शिक्षक नहीं आए लोग गुस्साए
पत्रिका Sunday, July 19, 2009
चितलवाना। क्षेत्र के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय भादरूणा की ढाणी में पिछले एक साल से कार्यरत अध्यापक की लापरवाही के कारण पढ़ाई बाघित हो रही है। इससे तंग आकर बच्चों और अभिभावकों ने शुक्रवार को विद्यालय के द्वार पर प्रदर्शन किया और जिला शिक्षा अघिकारी के नाम उपखण्ड अघिकारी को ज्ञापन सौंपा।
ग्रामीणों ने बताया कि विद्यालय प्रारंभ हुए एक पखवाड़े से अघिक समय बीत जाने के बावजूद यहां कार्यरत अध्यापक मनमर्जी से विद्यालय नहीं आता था। शुक्रवार को अध्यापक के विद्यालय नहीं आने के कारण परिजन गुस्सा हो गए और बच्चों को साथ लेकर विद्यालय के गेट पर पहुंचे और स्कूल के ताला जड़कर बंद कर दिया। ग्रामीणों ने इसकी सूचना बीईईओ को देकर कार्रवाई की मांग की।
इसके बाद ग्रामीणों ने
उपखण्ड अघिकारी को ज्ञापन सौंपकर व्यवस्थाएं सुधारने की अपील की है।
एक साल से पोषाहार नहीं
ग्रामीणों ने बताया कि पिछले एक साल से प्राथमिक विद्यालय में पोषाहार नहीं बनाया जा रहा है। इस बारे में अभिभावकों ने कई बार अध्यापक से बात की तो उसका कहना है कि कम बच्चे होने पर अघिक खर्चा आता है इस कारण पोषाहार बंद किया गया है। हालांकि ग्रामीण पूर्व में भी इस मामले की शिकायत ब्लॉक शिक्षा अघिकारी को लिखित में कर चुके हैं, लेकिन बीईईओ ने इस ओर कभी ध्यान नहीं दिया।
चितलवाना। क्षेत्र के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय भादरूणा की ढाणी में पिछले एक साल से कार्यरत अध्यापक की लापरवाही के कारण पढ़ाई बाघित हो रही है। इससे तंग आकर बच्चों और अभिभावकों ने शुक्रवार को विद्यालय के द्वार पर प्रदर्शन किया और जिला शिक्षा अघिकारी के नाम उपखण्ड अघिकारी को ज्ञापन सौंपा।
ग्रामीणों ने बताया कि विद्यालय प्रारंभ हुए एक पखवाड़े से अघिक समय बीत जाने के बावजूद यहां कार्यरत अध्यापक मनमर्जी से विद्यालय नहीं आता था। शुक्रवार को अध्यापक के विद्यालय नहीं आने के कारण परिजन गुस्सा हो गए और बच्चों को साथ लेकर विद्यालय के गेट पर पहुंचे और स्कूल के ताला जड़कर बंद कर दिया। ग्रामीणों ने इसकी सूचना बीईईओ को देकर कार्रवाई की मांग की।
इसके बाद ग्रामीणों ने
उपखण्ड अघिकारी को ज्ञापन सौंपकर व्यवस्थाएं सुधारने की अपील की है।
एक साल से पोषाहार नहीं
ग्रामीणों ने बताया कि पिछले एक साल से प्राथमिक विद्यालय में पोषाहार नहीं बनाया जा रहा है। इस बारे में अभिभावकों ने कई बार अध्यापक से बात की तो उसका कहना है कि कम बच्चे होने पर अघिक खर्चा आता है इस कारण पोषाहार बंद किया गया है। हालांकि ग्रामीण पूर्व में भी इस मामले की शिकायत ब्लॉक शिक्षा अघिकारी को लिखित में कर चुके हैं, लेकिन बीईईओ ने इस ओर कभी ध्यान नहीं दिया।
Friday, July 17, 2009
जन्म प्रमाण पत्र बन रहा है अशिक्षा का कारण
भीनमाल पंचायत समिति क्षैत्र में सन 2002 में किये गये सर्वे के अनुचार 10015 बच्चे स्कूल जाने वंचित थे। सन २००९ में किए सर्वे के अनुचार ५% बच्चे जन्म प्रमाण पत्र नही होने से इस साल भी स्कुल नही जा पे। अगर इन गरीब लाचार भोली जनता को वाकई में पढाना चाते है। तो प्रशासन सुनानी होगी इन की आवाज़ ....
Thursday, July 16, 2009
पेडों की कटाई से कई प्रजातियों को खतरा

पेडों की बेलगाम कटाई पृथ्वी पर विभिन्न जानवरों और पक्षियों के अस्तित्व को संकट में डाल रही है। यदि पेडों की कटाई पर तुरंत रोक नहीं लगाई गई, तो आने वाले समय में हम बहुत से पशु-पक्षियों को देखने से वंचित हो सकते हैं। जलवायु परिवर्तन को लेकर वैश्विक सम्मेलन में भी चिंता जाहिर की गई है।
हाल ही आयोजित यूएन फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन क्लाइमेट चेंज (यूएनएफसीसीसी) के वैश्विक शिखर सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन की समस्या से निपटने के लिए सामूहिक कारगर कदम उठाए जाने पर जोर दिया गया। यदि इस समस्या से निपटने के लिए जरूरी संसाधन जुटा लिया गया तो संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के वल्र्ड कंजर्वेशन मॉनिटरिंग सेंटर (डब्ल्यूसीएमसी) द्वारा विकसित कार्बन एंड बायोडायवर्सिटी डेमंस्ट्रेशन एटलस पर अमल करने में आसानी होगी।
संयुक्त राष्ट्र के अपर महासचिव और यूनेप के कार्यकारी निदेशक एकिम स्टीनर ने कहा, ""इस वैश्विक आर्थिक संकट के दौर में एक-एक डालर या यूरो या फिर रूपए का इस्तेमाल इस तरह किया जाना चाहिए कि हमें पहले से दोगुना नतीजा मिले। यूनेप प्रवक्ता निक नुटल ने कहा कि शोध से हमें पता चला है कि जहां भी वनों का विनाश हो रहा है, वहां जलवायु परिवर्तन की समस्या के गहराने और जीव प्रजातियों का अस्तित्व मिटने का खतरा बढ रहा है।
प्रदूषण से बढ़ रहा है ह्वदय रोगों का खतरा

पर्यावरण प्रदूषण के कारण जलवायु में आए अवांछनीय परिवर्तनों के परिणाम आज कई रूपों में हमारे सामने हैं। ग्लोबल वार्मिग जैसी गंभीर समस्या पृथ्वी के असतित्व के लिए सबसे गंभीर संकट है। इसके बाद भी प्रदूषण के कारण जन्मी समस्याएं खत्म नहीं हुई हैं। रोज एक नई समस्याएं हमारे सामने आ रही हैं। प्रदूषण अब स्वास्थ्य के लिए हानिकारक सिद्ध हो रहा है। हाल ही में यूनिवर्सिटी ऑफ केलीफोर्निया में हुए एक अघ्यन में पाया गया है कि प्रदूषण के कारण लोगों में ह्वदय रोगों का खतरा बढ़ गया है।
विश्वविद्यालय के जीनोम बायलॉजी जर्नल की इंटरनेट पर प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार वाहनों से निकले घँूए के कारण वातावरण मौजूद कार्बन कणोे के शरीर में पहुँचने से ह्वदय रोगों के साथ रक्त में कोलेस्ट्रॉल लेवल भी बढ़ जाता है। वातावरण में मौजूद ये कार्बन कण कोलेस्ट्राल के साथ मिलकर उन जीनों को सक्रिय कर देते हैं जो रक्तवाहिनियों को तेजी से कड़ा कर देती हैं। इसके अतिरिक्त वाहनों ओर फैक्टि्रयों के कारण फैले इस प्रदूषण के कारण लोगों में लंग कैंसर, हार्ट अटैक का खतरा भी बढ़ गया है।
रिपोर्ट में प्रकाशित विस्तृत कारणों में बताया गया है कि वातावरण में मौजूद जले हुए डीजल के ये कण शरीर में सांस के द्वारा फेंफड़ों में प्रवेश करते हैं। ये कण यहाँ से वसा से क्रिया करके रक्तवाहीनियों पर हानिकारक प्रभाव डालते हैं। फेंफड़ो में इन कणों के पहुँचने से अस्थमा अटैक, लंग कैंसर, के साथ डीएनए डेमेज होने का खतरा भी बढ़ जाता है।
अंटार्कटिका में ओजोन परत के लिए नए खतरे

लंदन । हाल ही में ईस्ट एंजेलिया यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए एक शोघ और बि्रटिश अंटार्कटिक सर्वे में इस बात का खुलासा किया गया है कि अंटार्कटिका महाद्वीप के वातावरण में भारी मात्रा में ऎसे रसायनों मौजूद हैं जो ओजोन परत का हा्रास कर रहे हैं। वातावरण रसायन वैज्ञानिकों ने लगातार 18 महीनों तक इसका अघ्ययन करने के बाद यह रिपोर्ट पेश की है। मई से लेकर अगस्त के बीच सूर्य के प्रकाश में यह शोघ अंटार्कटिक महाद्वीप में तेजी से पिघलती बर्फ की चट्टानों पर किए गए।
इस शोघ में जो बात सबसे महत्वपूर्ण है वो यह कि अंटार्कटिक क्षेत्र में प्रचुर मात्रा में आयोडीन आक्साइड मौजूद है जो इससे पहले कभी यहाँ नहीं पाया गया था। इसके अलावा ओजोन परत के क्षरण के लिए जिम्मेदार अन्य हेलोजल रसायन ब्रोमाइड के आक्साइड भी यहाँ पाए गए हैं।
शोघ के अगले चरण में वैज्ञानिक इन रसायनों के वातावरण पर पड़ने वाले प्रभावों का अƒयन कर रहे हैं। शीघ्र ही वैज्ञानिकों का एक दल सेटेलाइट के द्वारा महाद्वीप पर ब्रोमीन आयोडाइड के बिखरे होने की जांच करेगा। इसके साथ ही वातावरण पर पड़ रहे इसके प्रभावों का भी अघ्यन किया जाएगा।
लीड्स यूनिवर्सिटी के पर्यावरण रसायन विषय के प्रोफेसर जॉन लेन के अनुसार इन हेलोजनस के कारण पर्यावरण पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है और इस घटना का सीघा संबंद्ध मौसम में हो रहे अवांछनीय परिर्वतनों से है। वे शीघ्र ही एक विस्तृत शोघ की रूपरेखा तैयार करने की योजना बना रहे हैं जिसमें इन रसायनों को यहाँ से हटाने का हल निकालने की कोशिश की जाएगी।
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जनसंख्या को नियंत्रित
सबसे बड़ा ओजोन छिद्र

पराबैंगनी किरणों से धरती को सुरक्षा प्रदान करने वाली ओजोन परत में हुए छेद के आकार के दिनों—दिन बढ़ने से पर्यावरणविद् खासे चिंतित नजर आ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार दक्षिणी ध्रुव के अंटार्कटिका के ऊपर अब तक का सबसे बड़ा छिद्र बन गया है। इसका आकार 2007 की तुलना में इस वर्ष काफी बढ़ गया है।
सयुंक्त राष्ट्र विश्व मौसम विभाग डब्ल्यूएमओ द्वारा जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि धरती को पराबैंगनी किरणों से सुरक्षा प्रदान कर त्वचा कैंसर से बचाने वाली ओजोन परत के होल का आकार आने वाले कुछ सप्ताहों में और भी बढ़ जाएगा। रिपोर्ट के मुताबिक अंटार्कटिक क्षेत्र में प्रति वर्ष ओजोन परत में विशाल छिद्र दिखाई पड़ता है जो आकार में कभी-कभी उत्तरी अमरीका जितना बड़ा हो जाता है। डब्ल्यूएमओ के मुताबिक धरती का सुरक्षा कवच कही जाने वाली इस परत में इस वर्ष 13 सितम्बर तक इस छिद्र का आकार 27 लाख वर्ग किलोमीटर पहुंच गया था।
सुरक्षा कवच में सेंध :
प्रकृति से छेड़छाड़ होने पर प्रतिकूल हालात जन्म लेते हैं। रेफ्रिजरेटर का क्लोरोफ्लोरोकार्बन यानी सीएफसी, जीवाश्म ईघन के जलने और निवर्तनीकरण से उत्पन्न कार्बनडाईऑक्साइड का संकेंद्रण, घान की खेती और जीव-जन्तु के मल-मूत्र से उत्पन्न मीथेन गैस के साथ-साथ कृषि कार्यो में नाइट्रोजन उर्वरक का प्रयोग ओजोन परत के लिए खतरनाक साबित होता है।
औद्योगीकरण की तेज रफ्तार, प्रदूषण का बढ़ता स्तर और वनों के विनाश से भी सुरक्षा कवच कमजोर हुआ है। ऊर्जा संयंत्रों तथा मोटर वाहनों से वायुमंडल में उत्सर्जित नाइट्रोजनडाई ऑक्साइड भी ओजोन परत को तोड़ती है। ग्रीन हाऊस गैस और ग्लोबल वार्मिग के चलते भी ओजोन परत प्रभावित हुई है।
कवच कमजोर होने का प्रभाव :
ओजोन परत के कमजोर होने से सूर्य से निकलने वाली पराबैंगनी किरणें धरती पर खतरनाक असर छोड़ रही हैं। इससे त्वचा कैंसर जैसी घातक बीमारियों के साथ-साथ दमा का खतरा भी बढ़ गया है। पर्यावरणीय असंतुलन से मौसम का मिजाज बदला है। इसके चलते ध्रुवीय क्षेत्रों में बर्फ पिघल रही है। समुद्र का जल स्तर बढ़ रहा है। जल-थल में कई जातियाँ या तो गायब हो गई हैं या गायब होने की कगार पर हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि हाल के वर्षो में जिस तेजी से जलवायु परिवर्तन हो रहे हैं उतना तेजी से पिछले 10 हजार वर्षो में कभी नहीं हुआ। यही हाल रहा तो सन 2050 तक दुनिया का तापमान दो डिग्री बढ़ जाएगा।
जलवायु परिवर्तन से संक्रामक रोगों के मिजाज में भी बदलाव आया है। भारी बारिश, बाढ़, तूफान जैसे प्राकृतिक आपदाएं बढ़ी हैं। उष्ण कटिबंघीय क्षेत्र में तापमान बढ़ने से वर्षा के स्तर में भारी बदलाव के कारण खाद्यान्न उत्पादन में भारी कमी आ सकती है। इसका नतीजा कुपोषण व खाद्य असुरक्षा का प्रसार हो सकता है।
प्रजातियों को बसाने की तैयारी

एडिनबर्ग। स्कॉटलैंड के जंगलों से लुप्त हो चुके जंगली सूअर, वन बिलाव और बड़ी बिçल्लयों जैसी कई दुर्लभ वन्य प्रजातियों को फिर से बसाने की तैयारी कर ली गई है। संरक्षणवादियों का मानना है कि जंगलों से धीरे—धीरे लुप्त हो रही वन्य प्रजातियों की वजह से पर्यावरण असंतुलित हो रहा है। लुप्त वन्य प्रजातियों को पुन: जंगलों में लाए जाने को लेकर हुई चर्चा में संरक्षणवादियों ने बताया जंगली सूअर, वन बिलाव, जंगली बिल्ली और विभिन्न प्रकार के पक्षियों को यहां के जंगलों में फिर से बसाया जाएगा।
पर्यावरण अभियान समूह के सदस्य दान पुलपेट्ट ने बताया कि ये प्रजातियां पारिस्थितिकीय प्रणालियों को बेहतर बनाने में मददगार साबित होंगी। साथ ही इनसे सांस्कृतिक और आर्थिक लाभ भी होगा। स्विट्जरलैंड और जर्मनी में जंगली सूअर को दोबारा लाए जाने से वहां के पर्यटन को जबर्दस्त बढ़ावा मिला है। पुलपेट्टे ने बताया कि लुप्त हो चुकीं बारह सिंगा और सूअर की कई प्रजातियों को पहले भी यहां के जंगलों में लाया गया था। वे यहां आराम से रह रही हैं। अब वन्य जीवों की संख्या तेजी से बढ़ेगी।
कमजोर होती ओजोन

स्वीडिश मेट्रोलॉजिकल इंस्टीट्यूट (एसएमएचआई) के रिसर्चर्स का कहना है कि पिछले दशकों के तुलना में इस बार फरवरी में स्वीडन के पास ओजोन परत बहुत पतली हो गई है। रिसर्चर्स का कहना है कि पिछले एक साल में दूसरी बार ओजोन परत की मोटाई इस तरह घटी है। ओजोन परत की मोटाई को नापने का यह काम स्टॉकहोम के दक्षिण में स्थित नॉरकोयपिंग के एसएमएचआई स्टेशन पर किया गया।
यहां ओजोन परत को मापने का काम 1988 से शुरू किया गया था। पिछले माह फरवरी में इस परत के सबसे पतले रूप में सामने आने की बात पता चली। स्वीडन के विंडेन स्टेशन पर एक मापन प्रक्रिया 1991 में शुरू हुई थी। उस समय यह परत सबसे हाई पोजिशन 437 डॉनसन यूनिट पर रिकॉर्ड की गई थी। एसएमएचआई के एक स्टेटमेंट में यह बात सामने आई है कि 1951 से 1966 के दौरान हुए मापन में ओजोन परत अपने सबसे मोटे स्तर पर थी। जबकि इससे तुलना करें तो अब हालात बदतर हो गए हैं। रिसर्चर्स के मुताबिक यह बड़े खतरे की घंटी है।
ग्लोबल वॉर्मिंग का पहला शिकार हिमालय

नई दिल्ली। हाल ही में हुए एक अघ्ययन में यह बात सामने आई है कि हिमालय के ग्लेशियर ग्लोबल वॉर्मिंग से सबसे पहले प्रभावित हुए थे। रिसर्चर्स उत्तराखंड में स्थित धार्मिक स्थल केदारनाथ के चोराबारी ग्लेशियर का अघ्ययन करने के बाद इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं। अघ्ययन से पता चला है कि क्लाइमेट चेंज के कारण हिमालय के ग्लेशियर्स 18वीं शताब्दी के मघ्य में ही पिघलने शुरू हो गए थे। यह अघ्ययन "करेंट साइंस" में प्रकाशित हुआ है। वाडिया इंस्टिट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के रवीन्द्र कुमार चौजर ने ये अघ्ययन किया है।
"भीख" मांगने के लिए पाक में विभाग
इस्लामाबाद। आर्थिक रूप से तबाह हो चुका पाकिस्तान अब "भीख" मांगने के लिए अन्तरराष्ट्रीय अभियान चलाने पर विचार कर रहा है। इसके तहत बाकायदा एक विभाग बनाया जा रहा है। वैसे दुनियाभर से आर्थिक मदद इकट्ठा करने की इस मुहिम को राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने आर्थिक कूटनीति का नाम दिया है।
पिछले दिन एक बैठक में जरदारी ने आर्थिक कूटनीति शाखा स्थापित करने की सलाह दी। दरअसल तालिबान के खिलाफ अभियान में हुए नुकसान की भरपाई और विस्थापितों की मदद के लिए टोक्यो सम्मेलन में अमरीका और जापान दोनों ने एक-एक अरब डॉलर की सहायता देने का वायदा किया था। सऊदी अरब, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और तुर्की ने भी लाखों डॉलर देने का वादा किया था। पाकिस्तान मदद का यह पैसा हासिल करने की कोशिश में जुटा हुआ है।
पिछले दिन एक बैठक में जरदारी ने आर्थिक कूटनीति शाखा स्थापित करने की सलाह दी। दरअसल तालिबान के खिलाफ अभियान में हुए नुकसान की भरपाई और विस्थापितों की मदद के लिए टोक्यो सम्मेलन में अमरीका और जापान दोनों ने एक-एक अरब डॉलर की सहायता देने का वायदा किया था। सऊदी अरब, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और तुर्की ने भी लाखों डॉलर देने का वादा किया था। पाकिस्तान मदद का यह पैसा हासिल करने की कोशिश में जुटा हुआ है।
मैंग्रूव पर निर्भर प्रजातियां खतरे में

जैव विविधता पर हो रहे वैश्विक संकट से जुड़ी खबरें अक्सर हमारे लिए चिंता का सबब बनती हैं। हाल ही में यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलेंड के डेविड ए लूथर और स्मिथसोनियन माइग्रेटरी बर्ड सेंटर के रसेल ग्रीनबर्ग ने एक अघ्ययन में पाया है कि "मैंग्रूव" ईको-सिस्टम पर अपने जीवन निर्वाह के लिए निर्भर रहने वाली जीव-जंतुओं की बड़ी संख्या वैश्विक स्तर पर विलुप्ति के संकट का सामना कर रही हैं। गौरतलब है कि अपेक्षाकृत गर्म क्षेत्रों में कोस्टल एरियाज के आस-पास इन वन क्षेत्रों का विस्तार पाया जाता है।
स्टडी के अनुसार समुद्र तटों के फैलाव के साथ ही समुद्र स्तर में परिवर्तन और प्रदूषण से इन मैंग्रूव वनों का विस्तार दिनों-दिन सीमित हो रहा है और इससे इस हैबिटेट में रहने वाली एंफीबियंस, रेप्टाइल्स, मैमल्स और बड्र्स की प्रजातियों के लिए खतरा पैदा हो रहा है।
खतरे में अंटार्कटिक का अस्तित्व

वाशिंगटन। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड की सान्द्रता के मौजूदा स्तर में थोड़ी सी भी वृद्धि अंटार्कटिक की बर्फ चादर की स्थिरता को प्रभावित कर सकती है।
"नेचर जर्नल" में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार एक अंतरराष्ट्रीय दल ने अपने अघ्ययन में पाया कि पिछली बार अंटार्कटिक में कार्बन डाइऑक्साइड की सान्द्रता का स्तर वर्तमान स्तर से बहुत अधिक था और उस समय बर्फ की चादर का एक विशाल हिस्सा पिघल गया था। उन्होंने अंटार्कटिक जियोलाजिकल ड्रिलिंग अनुसंधान के तहत पहली परियोजना के दौरान समुद्र सतह के नीचे "रास आइस शेल्फ" से 1280 मीटर लम्बी परत के परीक्षण के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला है। अनुसंधान में न्यूजीलैंड, इटली, अमरीका और जर्मनी के 50 से अधिक वैज्ञानिकों ने भाग लिया और अघ्ययन का उद्देश्य पर्यावरण के कार्बन-डाइऑक्साइड सान्द्रण महासागरीय तापमान समुद्र के जल स्तर में बढ़ोतरी और पृथ्वी की कक्षा में प्राकृतिक चक्र से सम्बन्धित पूर्व के अघ्ययन निष्कर्ष में सुधार करना था। अनुसंधान दल के प्रमुख और वेलिंगटन स्थित विक्टोरिया विश्वविद्यालय में अंटार्कटिक अनुसन्धान केन्द्र के प्रोफेसर टिम नैश के अनुसार चट्टान और अवसादी परत से महत्वपूर्ण सूचना मिली है।
ऎसा लगता है कि अपने अक्ष पर पृथ्वी के झुकाव में बदलाव ने अंटार्कटिक महासागर की ऊष्मीयता ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इससे पश्चिम अंटार्कटिक की बर्फ की चादर के विकास चक्र में 30 लाख से 50 लाख साल पहले बदलाव आए थे।
2035 तक लुप्त हो सकते हैं ग्लेशियर

अमरीका के प्रभावशाली सीनेटर जान केरी ने कहा है कि आतंकवाद से जूझ रहे दक्षिण एशिया में लगातार हिमालय के ग्लेशियर पिघल रहे हैं और विश्व समुदाय के नेता इस पर घ्यान नहीं दे रहे हैं। जलवायु परिवर्तन पर दिए अपने भाषण में सीनेट के विदेशी सम्बंध समिति के अघ्यक्ष केरी ने चेतावनी देते हुए कहा कि चीन से अफगानिस्तान तक के करोड़ों लोगों को पानी देने वाले हिमालय ग्लेशियर 2035 तक विलुप्त हो सकते हैं।
भारत की नदियां न सिर्फ उसके कृषि के लिए उपयुक्त हैं, बल्कि धार्मिक तौर पर भी उनका महत्व है। वहीं पाकिस्तान पूरी तरह से सूखे से बचने के लिए सिंचाई पर निर्भर है। केरी ने दुनियाभर में कुछ जगहों पर हो रहे गम्भीर मौसम परिवर्तन को विश्व के लिए खतरनाक बताते हुए कहा कि दक्षिण एशिया में आतंक और जलवायु परिवर्तन जैसे खतरे का गठजोड़ हो गया है।
Wednesday, July 15, 2009
पेयजल के पुख्ता इंतजाम होंगे: मदेरणा
dainiknavajyoti.com 2009-07-14 16:24:02
जयपुर। जल संसाधन मंत्री महिपाल मदेरणा ने कहा है कि जल संकट और पेयजल समस्या के निदान के लिए राज्य सरकार
हर संभव प्रयास करेगी। पेयजल की समस्या वाले क्षेत्रों में पानी पहुंचाने में धन की कमी नहीं आने दी
जाएगी। मदेरणा विधानसभा में पेयजल समस्या पर सरकार का वक्तव्य दे रहे थे। उन्होंने कहा कि सरकार ने पेयजल
को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है और जिला स्तर पर स्थिति का आकलन कर आकस्मिक योजना पर काम शुरू कर दिया है।
आकस्मिक योजना के कार्यों में गति लाई जाएगी। जिन गांवों में पानी 60 मीटर से नीचे चला गया है वहां पर सिंगल
फेस मोटर आधारित पम्प एक योजना लागू की जाएगी। केंद्रीय भूजल विभाग की ओर से खोदे गए लगभग 100-150 गहरे टयूबवैल
उपलब्ध हैं जिनको जल्द चालू करवाया जाएगा। इस महीने के अंत तक कई वर्षों से खाली चल रहे कनिष्ठ अभियंताओं
के 248 पदों को भर दिया जाएगा।
जयपुर। जल संसाधन मंत्री महिपाल मदेरणा ने कहा है कि जल संकट और पेयजल समस्या के निदान के लिए राज्य सरकार
हर संभव प्रयास करेगी। पेयजल की समस्या वाले क्षेत्रों में पानी पहुंचाने में धन की कमी नहीं आने दी
जाएगी। मदेरणा विधानसभा में पेयजल समस्या पर सरकार का वक्तव्य दे रहे थे। उन्होंने कहा कि सरकार ने पेयजल
को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है और जिला स्तर पर स्थिति का आकलन कर आकस्मिक योजना पर काम शुरू कर दिया है।
आकस्मिक योजना के कार्यों में गति लाई जाएगी। जिन गांवों में पानी 60 मीटर से नीचे चला गया है वहां पर सिंगल
फेस मोटर आधारित पम्प एक योजना लागू की जाएगी। केंद्रीय भूजल विभाग की ओर से खोदे गए लगभग 100-150 गहरे टयूबवैल
उपलब्ध हैं जिनको जल्द चालू करवाया जाएगा। इस महीने के अंत तक कई वर्षों से खाली चल रहे कनिष्ठ अभियंताओं
के 248 पदों को भर दिया जाएगा।
Tuesday, July 14, 2009
अनियमित जलापूर्ति से नागरिक भड़के
Bhaskar News Monday, July 13, 2009 06:01 [IST]
पाली. शहर के शिवाजी नगर में हो रही पानी की अनियमित सप्लाई एवं पानी के टैंकरों द्वारा मनमाने तरीके से की जा रही जलापूर्ति को लेकर रविवार को शिवाजी नगर ने रास्ता रोककर विरोध जताया। क्षेत्र के नागरिकों ने जोधपुर मार्ग पर प्रदर्शन कर जेईएन का घेराव कर खरी खोटी सुनाई। बाद में पुलिस ने समझाइश कर मामला शांत करवाया।
नागरिकों ने बताया कि जलदाय विभाग की ओर से शिवाजी नगर में पानी की आपूर्ति 96 घंटे बाद भी नहीं की जा रही है। ऐसे में पानी की किल्लत बनी हुई है। ऐसे में वहां पर टैंकरों से भी जलापूर्ति अनियमित रूप से की जा रही है।
उन्होंने बताया कि टैंकर मालिकों द्वारा मनमाने तरीके से फर्जी रसीदे बनाकर अपने-अपने चेहतों के यहां पर पानी की आपूर्ति कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि जोधपुर मार्ग स्थित जलदाय विभाग से पानी का टैंकर शिवाजी नगर क्षेत्र की जनता के नाम रसीद कांटी जाती है, वह पानी का टैंकर सरदार पटेल नगर वार्ड में डाला जा रहा है।
इसको लेकर नागरिकों में रोष व्याप्त हो गया। शिवाजी नगर विकास समिति के पदाधिकारी जेठमल जोशी के नेतृत्व में कई महिला व पुरूष एकत्रित होकर जोधपुर मार्ग स्थित सुभाष नगर में जलदाय विभाग के कार्यालय पहुंचे। वहां पर गुस्साए नागरिकों ने रास्ता जाम कर विरोध जताया। बाद में कनिष्ठ अभियंता का घेराव भी किया। इस दौरान पुलिस मौके पर पहुंच कर मामला शांत करवाया। नागरिकों ने बताया कि शीघ्र ही समस्या से निजात नहीं दिलाई गई तो आंदोलन करने की चेतावनी दी।
पाली. शहर के शिवाजी नगर में हो रही पानी की अनियमित सप्लाई एवं पानी के टैंकरों द्वारा मनमाने तरीके से की जा रही जलापूर्ति को लेकर रविवार को शिवाजी नगर ने रास्ता रोककर विरोध जताया। क्षेत्र के नागरिकों ने जोधपुर मार्ग पर प्रदर्शन कर जेईएन का घेराव कर खरी खोटी सुनाई। बाद में पुलिस ने समझाइश कर मामला शांत करवाया।
नागरिकों ने बताया कि जलदाय विभाग की ओर से शिवाजी नगर में पानी की आपूर्ति 96 घंटे बाद भी नहीं की जा रही है। ऐसे में पानी की किल्लत बनी हुई है। ऐसे में वहां पर टैंकरों से भी जलापूर्ति अनियमित रूप से की जा रही है।
उन्होंने बताया कि टैंकर मालिकों द्वारा मनमाने तरीके से फर्जी रसीदे बनाकर अपने-अपने चेहतों के यहां पर पानी की आपूर्ति कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि जोधपुर मार्ग स्थित जलदाय विभाग से पानी का टैंकर शिवाजी नगर क्षेत्र की जनता के नाम रसीद कांटी जाती है, वह पानी का टैंकर सरदार पटेल नगर वार्ड में डाला जा रहा है।
इसको लेकर नागरिकों में रोष व्याप्त हो गया। शिवाजी नगर विकास समिति के पदाधिकारी जेठमल जोशी के नेतृत्व में कई महिला व पुरूष एकत्रित होकर जोधपुर मार्ग स्थित सुभाष नगर में जलदाय विभाग के कार्यालय पहुंचे। वहां पर गुस्साए नागरिकों ने रास्ता जाम कर विरोध जताया। बाद में कनिष्ठ अभियंता का घेराव भी किया। इस दौरान पुलिस मौके पर पहुंच कर मामला शांत करवाया। नागरिकों ने बताया कि शीघ्र ही समस्या से निजात नहीं दिलाई गई तो आंदोलन करने की चेतावनी दी।
Monday, July 13, 2009
ना पानी, ना बिजली
भास्कर टीम Monday, July 13, 2009 02:53 [IST]
भोपाल. आमद दर्ज कराकर गुम हुए मानसून से फसल और पेयजल दोनों पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। प्रदेश के कई जिलों में अभी बोवनी दो तिहाई या आधी ही हुई है, ग्वालियर संभाग में तो खरीफ सीजन के बीज खेतों तक पहुंचे ही नहीं है। संभाग के अधिकतर जिलों में अभी 10 से 25 फीसदी बोवनी ही हुई है। शाजापुर, सीहोर, गुना, अशोकनगर, राजगढ़, शिवपुरी, दमोह और सागर में जलसंकट जस का तस बना हुआ है। फिलहाल मानसून की देरी से फसलों को कोई खास नुकसान नहीं हुआ है लेकिन अगर एक हफ्ते के भीतर बारिश नहीं हुई तो खरीफ फसलों को खासा नुकसान उठाना पड़ेगा।
आस बंधी
मौसम विभाग ने आगामी दो दिनों में मप्र में अच्छी बारिश की संभावना जताई है। मौसम केंद्र के अनुसार राज्य के पूर्वी क्षेत्र में एक नया सिस्टम बन रहा है जिससे अगले दो दिनों में अच्छी वर्षा होने की उम्मीद है।
उज्जैन
76 फीसदी बोवनी पूरी, फसलों पर फिलहाल कोई संकट नहीं। गंभीर डेम में 500 एमसीएफटी पानी आने से पेयजल समस्या से थोड़ी राहत मिली है।
शाजापुर
75 फीसदी बोवनी पूरी। पेयजल संकट जस का तस, फिलहाल सात दिन में एक बार जल सप्लाय।
खंडवा
जिले में लगभग 90 प्रतिशत बोवनी हो चुकी है, जो दो दिन में पूरी हो जाएगी। शहर में पेयजल आपूर्ति एक दिन के अंतराल से ही की जा रही है। जिला मुख्यालय पर बिजली कटौती चार से पांच घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों में 10 से 14 घंटे की जा रही है।
बुरहानपुर
90 प्रतिशत बोवनी हो चुकी है। पेयजल आपूर्ति एक दिन के अंतराल से की जा रही है। जिला मुख्यालय पर बिजली कटौती 7 से 8 और ग्रामीण क्षेत्रों में 12 से 16 घंटे कटौती की जा रही है।
खरगोन
95 प्रतिशत बोवनी हो चुकी है। बिजली कटौती पूर्ववत जिला मुख्यालय पर 6 से 8 और ग्रामीण क्षेत्रों में 16 घंटे की जा रही है। पेयजल समस्या में कुछ राहत मिली है।
बड़वानी
लगभग 78 प्रतिशत बोवनी हो चुकी है। जिला मुख्यालय पर बिजली कटौती में आंशिक सुधार हुआ है। चार से पांच घंटे हो रही कटौती तीन घंटे हो रही है। सेंधवा में भी सुधार हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति जस की तस है। वहां 16 से 18 घंटे कटौती की जा रही है।
झाबुआ
जिले में अब तक 1 लाख 60 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में बोवनी हो चुकी है।
कटौती की स्थिति शहर में : 6 घंटे रोजाना
गांव में : 14 से 16 घंटे रोजाना
धार
जिले में 89 प्रतिशत क्षेत्र में बोवनी। जिला मुख्यालय पर चार से छह घंटे, तहसील मुख्यालय पर 10-12 और ग्रामीण क्षेत्रों में 17-18 घंटे। धार शहर में 24 घंटे में 12.50 मिमी तथा अब तक 209.3 मिमी बारिश हो चुकी है। गत वर्ष इस अवधि तक 161.2 मिमी बारिश हुई थी।
सागर
दो दिन लगातार सप्लाई के बाद तीसरे दिन पानी नहीं दिया जाता। राजघाट बांध में अभी पानी का भराव एलएसएल से ऊ पर है। 2 लाख 20 हजार हैक्टेयर में बोवनी हो सकी है। शहर में तीन घंटे, तहसील मुख्यालय पर 10-12 घंटे, ग्रामीण क्षेत्रों में 12-14 घंटे प्रतिदिन बिजली कटौती की जा रही है।
छतरपुर
शहर में एक दिन के अंतराल में पानी सप्लाई हो रहा है। अभी बोवनी केवल 25 प्रतिशत ही हुई है। पलायन शुरू : बारिश को लेकर उम्मीद लगाए बैठे किसान मानसून की बेरूखी से अपना घर-बार छोड़ चले हैं। हर दिन बड़ी संख्या में जिले से लोग परिवार समेत दिल्ली और अन्य बड़े शहरों के लिए पलायन कर रहे हैं। बिजली कटौती- जिला मुख्यालय- 4 घंट, तहसील मुख्यालय- 13 घंट, ग्रामीण क्षेत्र- 18 से 20 घंटे
टीकमगढ़
बोबनी का लक्ष्य 1 लाख 91 हजार हेक्टेयर लेकिन 15 हजार हेक्टेयर इसमें भी पानी न गिरने से 50 फीसदी खराब हो गई। जिला मुख्यालय- 7 से 8 घंटे, तहसील मुख्यालय- 12 घंटे, ग्रामीण क्षेत्र- 16 से 18 घंटे तक बिजली कटौती।
दमोह
दमोह में हर तीसरे दिन पानी सप्लाई किया जा रहा है। राजनगर तालाब में इस समय ९ एमसीएफटी पानी है जो करीब एक माह के लिए है। कोपरा नदी से रोजाना 4 लाख गैलन पानी लिया जा रहा है। जिले में खरीफ की फसल का 1 लाख 45 हजार हेक्टेयर रकबे में से अभी तक 23 हजार हेक्टेयर रकबे में बोनी हुई है।
रतलाम
जिले में गत वर्ष के मुकाबले अभी तक आधी बारिश ही हुई है। लगभग 70 फीसदी क्षेत्र में बोवनी की जा चुकी है।जिला मुख्यालय पर प्रतिदिन छह घंटे बिजली कटौती हो रही है जबकि तहसील स्तर पर 10 से 12 घंटे एवं ग्रामीण क्षेत्र में 16 से 18 घंटे बिजली कटौती हो रही है।
मंदसौर
प्रमुख जलस्रोत रामघाट व आजाद जलाशय पूरी तरह खाली हैं, इसलिए पेयजल संकट से जूझना पड़ रहा है। 50 प्रतिशत बोवनी भी नहीं। जिला मुख्यालय पर चार से छह घंटा, तहसील पर आठ से 11 तथा ग्रामीण क्षेत्रों में 12 से 14 घंटे की कटौती की जा रही है।
भोपाल. आमद दर्ज कराकर गुम हुए मानसून से फसल और पेयजल दोनों पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। प्रदेश के कई जिलों में अभी बोवनी दो तिहाई या आधी ही हुई है, ग्वालियर संभाग में तो खरीफ सीजन के बीज खेतों तक पहुंचे ही नहीं है। संभाग के अधिकतर जिलों में अभी 10 से 25 फीसदी बोवनी ही हुई है। शाजापुर, सीहोर, गुना, अशोकनगर, राजगढ़, शिवपुरी, दमोह और सागर में जलसंकट जस का तस बना हुआ है। फिलहाल मानसून की देरी से फसलों को कोई खास नुकसान नहीं हुआ है लेकिन अगर एक हफ्ते के भीतर बारिश नहीं हुई तो खरीफ फसलों को खासा नुकसान उठाना पड़ेगा।
आस बंधी
मौसम विभाग ने आगामी दो दिनों में मप्र में अच्छी बारिश की संभावना जताई है। मौसम केंद्र के अनुसार राज्य के पूर्वी क्षेत्र में एक नया सिस्टम बन रहा है जिससे अगले दो दिनों में अच्छी वर्षा होने की उम्मीद है।
उज्जैन
76 फीसदी बोवनी पूरी, फसलों पर फिलहाल कोई संकट नहीं। गंभीर डेम में 500 एमसीएफटी पानी आने से पेयजल समस्या से थोड़ी राहत मिली है।
शाजापुर
75 फीसदी बोवनी पूरी। पेयजल संकट जस का तस, फिलहाल सात दिन में एक बार जल सप्लाय।
खंडवा
जिले में लगभग 90 प्रतिशत बोवनी हो चुकी है, जो दो दिन में पूरी हो जाएगी। शहर में पेयजल आपूर्ति एक दिन के अंतराल से ही की जा रही है। जिला मुख्यालय पर बिजली कटौती चार से पांच घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों में 10 से 14 घंटे की जा रही है।
बुरहानपुर
90 प्रतिशत बोवनी हो चुकी है। पेयजल आपूर्ति एक दिन के अंतराल से की जा रही है। जिला मुख्यालय पर बिजली कटौती 7 से 8 और ग्रामीण क्षेत्रों में 12 से 16 घंटे कटौती की जा रही है।
खरगोन
95 प्रतिशत बोवनी हो चुकी है। बिजली कटौती पूर्ववत जिला मुख्यालय पर 6 से 8 और ग्रामीण क्षेत्रों में 16 घंटे की जा रही है। पेयजल समस्या में कुछ राहत मिली है।
बड़वानी
लगभग 78 प्रतिशत बोवनी हो चुकी है। जिला मुख्यालय पर बिजली कटौती में आंशिक सुधार हुआ है। चार से पांच घंटे हो रही कटौती तीन घंटे हो रही है। सेंधवा में भी सुधार हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति जस की तस है। वहां 16 से 18 घंटे कटौती की जा रही है।
झाबुआ
जिले में अब तक 1 लाख 60 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में बोवनी हो चुकी है।
कटौती की स्थिति शहर में : 6 घंटे रोजाना
गांव में : 14 से 16 घंटे रोजाना
धार
जिले में 89 प्रतिशत क्षेत्र में बोवनी। जिला मुख्यालय पर चार से छह घंटे, तहसील मुख्यालय पर 10-12 और ग्रामीण क्षेत्रों में 17-18 घंटे। धार शहर में 24 घंटे में 12.50 मिमी तथा अब तक 209.3 मिमी बारिश हो चुकी है। गत वर्ष इस अवधि तक 161.2 मिमी बारिश हुई थी।
सागर
दो दिन लगातार सप्लाई के बाद तीसरे दिन पानी नहीं दिया जाता। राजघाट बांध में अभी पानी का भराव एलएसएल से ऊ पर है। 2 लाख 20 हजार हैक्टेयर में बोवनी हो सकी है। शहर में तीन घंटे, तहसील मुख्यालय पर 10-12 घंटे, ग्रामीण क्षेत्रों में 12-14 घंटे प्रतिदिन बिजली कटौती की जा रही है।
छतरपुर
शहर में एक दिन के अंतराल में पानी सप्लाई हो रहा है। अभी बोवनी केवल 25 प्रतिशत ही हुई है। पलायन शुरू : बारिश को लेकर उम्मीद लगाए बैठे किसान मानसून की बेरूखी से अपना घर-बार छोड़ चले हैं। हर दिन बड़ी संख्या में जिले से लोग परिवार समेत दिल्ली और अन्य बड़े शहरों के लिए पलायन कर रहे हैं। बिजली कटौती- जिला मुख्यालय- 4 घंट, तहसील मुख्यालय- 13 घंट, ग्रामीण क्षेत्र- 18 से 20 घंटे
टीकमगढ़
बोबनी का लक्ष्य 1 लाख 91 हजार हेक्टेयर लेकिन 15 हजार हेक्टेयर इसमें भी पानी न गिरने से 50 फीसदी खराब हो गई। जिला मुख्यालय- 7 से 8 घंटे, तहसील मुख्यालय- 12 घंटे, ग्रामीण क्षेत्र- 16 से 18 घंटे तक बिजली कटौती।
दमोह
दमोह में हर तीसरे दिन पानी सप्लाई किया जा रहा है। राजनगर तालाब में इस समय ९ एमसीएफटी पानी है जो करीब एक माह के लिए है। कोपरा नदी से रोजाना 4 लाख गैलन पानी लिया जा रहा है। जिले में खरीफ की फसल का 1 लाख 45 हजार हेक्टेयर रकबे में से अभी तक 23 हजार हेक्टेयर रकबे में बोनी हुई है।
रतलाम
जिले में गत वर्ष के मुकाबले अभी तक आधी बारिश ही हुई है। लगभग 70 फीसदी क्षेत्र में बोवनी की जा चुकी है।जिला मुख्यालय पर प्रतिदिन छह घंटे बिजली कटौती हो रही है जबकि तहसील स्तर पर 10 से 12 घंटे एवं ग्रामीण क्षेत्र में 16 से 18 घंटे बिजली कटौती हो रही है।
मंदसौर
प्रमुख जलस्रोत रामघाट व आजाद जलाशय पूरी तरह खाली हैं, इसलिए पेयजल संकट से जूझना पड़ रहा है। 50 प्रतिशत बोवनी भी नहीं। जिला मुख्यालय पर चार से छह घंटा, तहसील पर आठ से 11 तथा ग्रामीण क्षेत्रों में 12 से 14 घंटे की कटौती की जा रही है।
पानी के लिए रास्ता जाम
पाली। शिवाजीनगर कॉलोनी में नलों व टैंकरों से अनियमित एवं अपर्याप्त आपूर्ति से गुस्साए लोगों ने रविवार सवेरे जोधपुर रोड स्थित हैडवक्र्स पर प्रदर्शन कर करीब पन्द्रह मिनट तक राजमार्ग जाम कर दिया। आपूर्ति में सुधार नहीं होने पर आंदोलन छेड़ने की चेतावनी दी।शिवाजीनगर में जलापूर्ति नियमित व पर्याप्त नहीं होने से लोग वैसे ही खफा है। इस बीच टैंकर चालकों की मनमानी से उनका गुस्सा रविवार को और भड़क उठा। दर्जनों लोग एकत्र होकर जोधपुर रोड स्थित जलदाय विभाग के हैडवक्र्स पहुंच गए। वहां प्रदर्शन किया।
बाद में करीब पन्द्रह मिनट तक राजमार्ग पर वाहनों की आवाजाही रोक दी। समझाइश के बाद लोग वहां से हटे। आक्रोशित लोगों का आरोप था कि टैंकरचालक मनमानी करते हुए अपने मिलने वाले के यहां टैंकर खाली कर देते है और संबंधित क्षेत्र में जलापूर्ति होने की रसीद प्राप्त कर लेते है। कई बार शिवाजीनगर के हिस्से का पानी सरदारपटेल नगर में वितरित कर दिया जाता है। प्रदर्शन करने वालों में मनीष चतुर्वेदी, गणपत वैष्णव, जेठमल जोशी, गीतादेवी, कमलाबाई, सुखियादेवी, पानीबाई समेत कई लोग शामिल थे।
Patrika.com Monday, July 13, 2009
बाद में करीब पन्द्रह मिनट तक राजमार्ग पर वाहनों की आवाजाही रोक दी। समझाइश के बाद लोग वहां से हटे। आक्रोशित लोगों का आरोप था कि टैंकरचालक मनमानी करते हुए अपने मिलने वाले के यहां टैंकर खाली कर देते है और संबंधित क्षेत्र में जलापूर्ति होने की रसीद प्राप्त कर लेते है। कई बार शिवाजीनगर के हिस्से का पानी सरदारपटेल नगर में वितरित कर दिया जाता है। प्रदर्शन करने वालों में मनीष चतुर्वेदी, गणपत वैष्णव, जेठमल जोशी, गीतादेवी, कमलाबाई, सुखियादेवी, पानीबाई समेत कई लोग शामिल थे।
Patrika.com Monday, July 13, 2009
Sunday, July 12, 2009
अब हम दो हमारा एक
Patrika.com Sunday, July 12, 2009
बाड़मेर। विश्व जनसंख्या दिवस पर शनिवार को जिले भर में कई कार्यक्रम हुए। जिला मुख्यालय पर स्थानीय उ“ा प्राथमिक विद्यालय गांधी चौक एवं स्थानीय राजकीय चिकित्सालय के नर्सिंग विद्यार्थियों ने जागरूकता रैली निकाली। रैली को अतिरिक्त मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अघिकारी डा. जितेन्द्र सिंह ने हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया। रैली मे विद्यार्थी अपने हाथों मे परिवार को सीमित रखने का संदेश लिए बैनर एवं तख्तियां लेकर चल रहे थे।
इसके बाद सुबह 11 बजे स्वास्थ्य भवन के सभागार में जिला स्तरीय पुरस्कार वितरण समारोह एवं विचार गोष्ठी हुआ। संबोघित करते हुए अपर जिला कलक्टर रामलाल विश्Aोई ने कहा कि बढ़ती जनसंख्या देश के लिए चुनौती है। यदि इस पर काबू नहीं पाया गया तो संसाधन घटते चले जाएंगे व देश के विकास कार्यो में बाधा उत्पन्न होगी। उपखण्ड अघिकारी नखतदान बारहठ ने कहा कि निरन्तर हमारे देश की जनसंख्या इसी तरह बढती रही तो हम बहुत पीछे रह जाएंगे। जिला प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य अघिकारी डा.मांगीलाल बोहरा ने सीमित परिवार रखने पर बल दिया। धारा संस्थान के सचिव महेश पनपालिया ने कहा कि सीमित परिवार की जानकारी के लिए आईईसी पर विशेष ध्यान देना होगा। गोष्ठी में नर्सिंग ट्यूटर मंगलाराम विश्नोई, शंकर भवानी एवं नर्सिग विद्यार्थी रितु जांगिड़ ने विचार व्यक्त किए।अतिरिक्त मुख्य चिकित्सा एंव स्वास्थ्य अघिकारी डा. जितेन्द्रसिंह ने कहा कि हमें सीमित परिवार रखने के लिए हम दो हमारे दो नारे के स्थान पर हम दो हमारा एक का नारा देना होगा।
अपर कलेक्टर ने पुरस्कार वितरण के तहत ग्राम स्वास्थ्य योजना 2008-09 के अन्तर्गत जिले में प्रथम आने वाली ग्राम पंचायत जानपालिया को पांच लाख रूपए की राशि प्रदान की। द्वितीय ग्राम पंचायत बाटाडू को तीन लाख रूपए एवं तृतीय स्थान पर ग्राम पंचायत आंटिया को एक लाख रूपए एवं प्रशस्ति पत्र दिए गए। परिवार कल्याण प्रोत्साहन पुरस्कार योजना 2008-09 के अन्तर्गत जिले मे प्रथम आने वाली पंचायत समिति धोरीमन्ना को चार लाख व जिले में सर्वश्रेष्ठ सरकारी चिकित्सा संस्थान धोरीमन्ना को एक लाख का पुरस्कार एवं प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त प्रत्येक पंचायत समिति मे सर्वश्रेष्ठ ग्राम पंचायत तारातरा मठ, नगाणी धतरवालों की ढाणी, पचपदरा, मोकलसर, सिणधरी, धोरीमन्ना, धनाऊ, शिव को एक लाख रूपए का पुरस्कार देकर सम्मानित किया।
देश में जनसंख्या वृद्धि जिस गति से हो रही है। उसी गति में सभी को मूलभूत सुविधाए उपलब्ध करवाना चुनौती पूर्व है। ये बात भारत सरकार के क्षेत्रीय प्रचार कार्यालय द्वारा दुग्ध उत्पादन सहकारी समितियों एवं श्योर के सहयोग से जनसंख्या दिवस पर आयोजित प्रचार अभियान के दौरान सामाजिक कार्यकत्ताü मालाराम गोदारा ने कही।
इधर सेवा सदन परिसर में परिवार कल्याण और अल्प संख्यक विषय पर कृष्णा संस्था और पीपुल्स फोर ग्रुप के तत्वावधान में हुआ। जिला परिषद सदस्य रिड़मलसिंह दांता ने कहा कि परिवार कल्याण कार्यक्रम के लिए जागरूकता आवश्यक है। मौलवी हनीफ मोहम्मद ने कहा कि सरहदी क्षेत्र में परिवार कल्याण कार्यक्रम के प्रचार-प्रसार की आवश्यकता है।
चन्दनसिंह भाटी, दुर्जनसिंह,हासम खां,सतार खां इत्यादि ने भी सम्बोघित किया।
बाड़मेर। विश्व जनसंख्या दिवस पर शनिवार को जिले भर में कई कार्यक्रम हुए। जिला मुख्यालय पर स्थानीय उ“ा प्राथमिक विद्यालय गांधी चौक एवं स्थानीय राजकीय चिकित्सालय के नर्सिंग विद्यार्थियों ने जागरूकता रैली निकाली। रैली को अतिरिक्त मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अघिकारी डा. जितेन्द्र सिंह ने हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया। रैली मे विद्यार्थी अपने हाथों मे परिवार को सीमित रखने का संदेश लिए बैनर एवं तख्तियां लेकर चल रहे थे।
इसके बाद सुबह 11 बजे स्वास्थ्य भवन के सभागार में जिला स्तरीय पुरस्कार वितरण समारोह एवं विचार गोष्ठी हुआ। संबोघित करते हुए अपर जिला कलक्टर रामलाल विश्Aोई ने कहा कि बढ़ती जनसंख्या देश के लिए चुनौती है। यदि इस पर काबू नहीं पाया गया तो संसाधन घटते चले जाएंगे व देश के विकास कार्यो में बाधा उत्पन्न होगी। उपखण्ड अघिकारी नखतदान बारहठ ने कहा कि निरन्तर हमारे देश की जनसंख्या इसी तरह बढती रही तो हम बहुत पीछे रह जाएंगे। जिला प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य अघिकारी डा.मांगीलाल बोहरा ने सीमित परिवार रखने पर बल दिया। धारा संस्थान के सचिव महेश पनपालिया ने कहा कि सीमित परिवार की जानकारी के लिए आईईसी पर विशेष ध्यान देना होगा। गोष्ठी में नर्सिंग ट्यूटर मंगलाराम विश्नोई, शंकर भवानी एवं नर्सिग विद्यार्थी रितु जांगिड़ ने विचार व्यक्त किए।अतिरिक्त मुख्य चिकित्सा एंव स्वास्थ्य अघिकारी डा. जितेन्द्रसिंह ने कहा कि हमें सीमित परिवार रखने के लिए हम दो हमारे दो नारे के स्थान पर हम दो हमारा एक का नारा देना होगा।
अपर कलेक्टर ने पुरस्कार वितरण के तहत ग्राम स्वास्थ्य योजना 2008-09 के अन्तर्गत जिले में प्रथम आने वाली ग्राम पंचायत जानपालिया को पांच लाख रूपए की राशि प्रदान की। द्वितीय ग्राम पंचायत बाटाडू को तीन लाख रूपए एवं तृतीय स्थान पर ग्राम पंचायत आंटिया को एक लाख रूपए एवं प्रशस्ति पत्र दिए गए। परिवार कल्याण प्रोत्साहन पुरस्कार योजना 2008-09 के अन्तर्गत जिले मे प्रथम आने वाली पंचायत समिति धोरीमन्ना को चार लाख व जिले में सर्वश्रेष्ठ सरकारी चिकित्सा संस्थान धोरीमन्ना को एक लाख का पुरस्कार एवं प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त प्रत्येक पंचायत समिति मे सर्वश्रेष्ठ ग्राम पंचायत तारातरा मठ, नगाणी धतरवालों की ढाणी, पचपदरा, मोकलसर, सिणधरी, धोरीमन्ना, धनाऊ, शिव को एक लाख रूपए का पुरस्कार देकर सम्मानित किया।
देश में जनसंख्या वृद्धि जिस गति से हो रही है। उसी गति में सभी को मूलभूत सुविधाए उपलब्ध करवाना चुनौती पूर्व है। ये बात भारत सरकार के क्षेत्रीय प्रचार कार्यालय द्वारा दुग्ध उत्पादन सहकारी समितियों एवं श्योर के सहयोग से जनसंख्या दिवस पर आयोजित प्रचार अभियान के दौरान सामाजिक कार्यकत्ताü मालाराम गोदारा ने कही।
इधर सेवा सदन परिसर में परिवार कल्याण और अल्प संख्यक विषय पर कृष्णा संस्था और पीपुल्स फोर ग्रुप के तत्वावधान में हुआ। जिला परिषद सदस्य रिड़मलसिंह दांता ने कहा कि परिवार कल्याण कार्यक्रम के लिए जागरूकता आवश्यक है। मौलवी हनीफ मोहम्मद ने कहा कि सरहदी क्षेत्र में परिवार कल्याण कार्यक्रम के प्रचार-प्रसार की आवश्यकता है।
चन्दनसिंह भाटी, दुर्जनसिंह,हासम खां,सतार खां इत्यादि ने भी सम्बोघित किया।
बेबस लोग, बेसहारा पशुधन!
Patrika Sunday, July 12, 2009
बाड़मेर। आमजन बेबस है, पशुधन बेसहारा हो गया है। सब कुछ जानते हुए प्रशासन अनजान बना हुआ है। गायें मौत के मुंह में जा रही हैं। पर्याप्त वर्षा नहीं होने से स्थिति और खराब हो रही है। जिला प्रशासन ने इस बार 1239 पशु शिविर स्वीकृत किए जिनमें से 851 ही शुरू हो पाए। इनमें करीब डेढ़ लाख पशुओं को संरक्षण मिला। जब तक शिविर चले, चारे का संकट बना रहा। प्रशासन यही कहता रहा कि शिविरों में चारे की आपूर्ति की व्यवस्था सुधार दी जाएगी, लेकिन एक भी दिन ऎसा नहीं आया, जब पचास फीसदी शिविरों में भी पर्याप्त मात्रा में चारा उपलब्ध रहा हो। इस बीच गायों की अकाल मौत होती रही। अठारह जून को चारे के अभाव में आधे से अघिक शिविर बंद हो गए। तीस जून तक तो सभी 851 शिविर बंद कर दिए गए।
धरा रहा सरकार का आदेश
बाड़मेर जिले में बरसात नहीं होने के कारण राज्य सरकार ने 15 जुलाई तक पशु शिविर संचालित करने के निर्देश दिए थे लेकिन यह आदेश कागजों में ही धरा रह गया। चारा ठेकेदारों की मनमानी के आगे लाचार प्रशासन ने अंतत: घुटने टेक दिए और एक भी शिविर आगे नहीं बढ़ पाया।
कहां गए डेढ़ लाख पशु!
सवाल यह है कि आपदा प्रबंधन के तहत शिविरों में पले डेढ़ लाख पशु अचानक कहां चले गए? अभी तक जिले में घास का एक नया तिनका भी नहीं उपजा है। ये पशु भूख से मरने की स्थिति में हैं।
संख्या उपलब्ध नहीं है
जहां से चारे की डिमाण्ड आ रही है, वहां चारा भेजा जा रहा है। पांच जुलाई तक तो काफी शिविर चल रहे थे। फिलहाल कितने चल रहे हैं, इसकी संख्या तो अभी उपलब्ध नहीं है। -रामलाल विश्नोई, अतिरिक्त जिला कलक्टर, बाड़मेर
बाड़मेर। आमजन बेबस है, पशुधन बेसहारा हो गया है। सब कुछ जानते हुए प्रशासन अनजान बना हुआ है। गायें मौत के मुंह में जा रही हैं। पर्याप्त वर्षा नहीं होने से स्थिति और खराब हो रही है। जिला प्रशासन ने इस बार 1239 पशु शिविर स्वीकृत किए जिनमें से 851 ही शुरू हो पाए। इनमें करीब डेढ़ लाख पशुओं को संरक्षण मिला। जब तक शिविर चले, चारे का संकट बना रहा। प्रशासन यही कहता रहा कि शिविरों में चारे की आपूर्ति की व्यवस्था सुधार दी जाएगी, लेकिन एक भी दिन ऎसा नहीं आया, जब पचास फीसदी शिविरों में भी पर्याप्त मात्रा में चारा उपलब्ध रहा हो। इस बीच गायों की अकाल मौत होती रही। अठारह जून को चारे के अभाव में आधे से अघिक शिविर बंद हो गए। तीस जून तक तो सभी 851 शिविर बंद कर दिए गए।
धरा रहा सरकार का आदेश
बाड़मेर जिले में बरसात नहीं होने के कारण राज्य सरकार ने 15 जुलाई तक पशु शिविर संचालित करने के निर्देश दिए थे लेकिन यह आदेश कागजों में ही धरा रह गया। चारा ठेकेदारों की मनमानी के आगे लाचार प्रशासन ने अंतत: घुटने टेक दिए और एक भी शिविर आगे नहीं बढ़ पाया।
कहां गए डेढ़ लाख पशु!
सवाल यह है कि आपदा प्रबंधन के तहत शिविरों में पले डेढ़ लाख पशु अचानक कहां चले गए? अभी तक जिले में घास का एक नया तिनका भी नहीं उपजा है। ये पशु भूख से मरने की स्थिति में हैं।
संख्या उपलब्ध नहीं है
जहां से चारे की डिमाण्ड आ रही है, वहां चारा भेजा जा रहा है। पांच जुलाई तक तो काफी शिविर चल रहे थे। फिलहाल कितने चल रहे हैं, इसकी संख्या तो अभी उपलब्ध नहीं है। -रामलाल विश्नोई, अतिरिक्त जिला कलक्टर, बाड़मेर
जसोल बंद सफल
patrika.com Sunday, July 12, 2009
बालोतरा। पेयजल समस्या को लेकर मंगलवार को जसोल गांव में हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज तथा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों के विरोध में शनिवार को जसोल बंद रहा। जसोल संघर्ष समिति के आह्वान पर दुकानदारों ने बंद का समर्थन करते हुए व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रखे। गांव के चौहटे में आयोजित सभा को संबोघित करते हुए संघर्ष समिति के वक्ताओं ने पुलिस की दमनात्मक कार्यवाही की भत्र्सना करते हुए दोषियों के खिलाफ कार्यवाही करने की मांग की। इसके बाद लगभग डेढ़ हजार लोगों का काफिला जुलूस के रूप मे ज्ञापन देने के लिए बालोतरा के लिए रवाना हुआ।
उपखंड अघिकारी कार्यालय के आगे एकत्रित प्रदर्शनकारियों की भीड़ के कारण दो घंटे तक रास्ता जाम रहा। इस रास्ते से गुजरने वाले वाहनों को अन्य रास्तों से निकाला गया। उपखंड अघिकारी कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में बालोतरा थानाघिकारी भंवरलाल देवासी, नायब तहसीलदार जसोल शंकराराम गर्ग को तुरंत हटाने,पुलिस चौकी जसोल मे कार्यरत दोष्ाी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्यवाही करने, ग्रामीणों के विरूद्ध दर्ज किए गए झूठे मुकदमो को वापिस लेने, जसोल में व्याप्त पेयजल समस्या का निराकरण कर दोष्ाी कर्मचारियों के खिलाफ कार्यवाही की मांग की।
वक्ताओ ने किया संबोघित
एसडीएम कार्यालय के आगे संबोघित करते हुए पूर्व सरपंच भंवर भंसाली ने कहा कि जनता को अपनी समस्या बताने का पूरा अघिकार है। माजीवाला सरपंच भगवतसिंह ने कहा कि न्यायालय द्वारा इस मामले में गिरफ्तार लोगों को न्यायिक अभिरक्षा मे भेजने के आदेश दिए जाने के बाद भी पुलिस ने थाने में ले जाकर बर्बरतापूर्वक पीटा। चंद्रशेखर छाजेड़ ने कहा कि पानी के बदले लाठियां बरसाना अन्याय है। पूर्व सरपंच ईश्वरसिंह चौहान, भीमाराम माली ने कहा कि जब तक दोषी अघिकारियों के खिलाफ कार्यवाही व झूठे मामले निरस्त नहीं किए जाते तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
तीन दिन में कार्रवाई का आश्वासन
दोपहर में उपखंड अघिकारी कार्यालय में समझौता वार्ता आयोजित हुई, जिसमें अघिकारियों ने संघर्ष समिति के पदाघिकारियों से समझाइश की। उपखंड अघिकारी ने भरोसा दिलाया कि जसोल लाठीचार्ज प्रकरण की निष्पक्ष जांच जिले के किसी अन्य अघिकारी से करवाई जाएगी। दोष्ाी अघिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होगी। तब जाकर मामला शांत हो पाया और प्रदर्शनकारी वापिस रवाना हुए।
विधायक नहीं आए
जसोल में शनिवार को लगभग डेढ़ हजार लोगों के एकत्रित होने, बालोतरा में उपखंड अघिकारी कार्यालय के समक्ष हजारों प्रदर्शनकारियों की भीड़ तथा दो घंटे तक रास्ता जाम होने की घटना के बाद भी पचपदरा विधायक मदन प्रजापत मौके से नहीं आए।
पुलिस का माकूल बंदोबस्त
कानून व शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए जसोल व बालोतरा सहित जुलूस के रास्ते में पुलिस का माकूल बंदोबस्त रहा। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रदीप मोहन, उपखंड अघिकारी राजेश चौहान, तहसीलदार राजेश मेवाड़ा, बालोतरा पुलिस उप अधीक्षक जस्साराम बोस व चौहटन पुलिस उप अधीक्षक राजेंद्र खोथ के नेतृत्व में विभिन्न थानों का सशस्त्र जाप्ता तैनात रहा।
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बालोतरा। पेयजल समस्या को लेकर मंगलवार को जसोल गांव में हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज तथा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों के विरोध में शनिवार को जसोल बंद रहा। जसोल संघर्ष समिति के आह्वान पर दुकानदारों ने बंद का समर्थन करते हुए व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रखे। गांव के चौहटे में आयोजित सभा को संबोघित करते हुए संघर्ष समिति के वक्ताओं ने पुलिस की दमनात्मक कार्यवाही की भत्र्सना करते हुए दोषियों के खिलाफ कार्यवाही करने की मांग की। इसके बाद लगभग डेढ़ हजार लोगों का काफिला जुलूस के रूप मे ज्ञापन देने के लिए बालोतरा के लिए रवाना हुआ।
उपखंड अघिकारी कार्यालय के आगे एकत्रित प्रदर्शनकारियों की भीड़ के कारण दो घंटे तक रास्ता जाम रहा। इस रास्ते से गुजरने वाले वाहनों को अन्य रास्तों से निकाला गया। उपखंड अघिकारी कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में बालोतरा थानाघिकारी भंवरलाल देवासी, नायब तहसीलदार जसोल शंकराराम गर्ग को तुरंत हटाने,पुलिस चौकी जसोल मे कार्यरत दोष्ाी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्यवाही करने, ग्रामीणों के विरूद्ध दर्ज किए गए झूठे मुकदमो को वापिस लेने, जसोल में व्याप्त पेयजल समस्या का निराकरण कर दोष्ाी कर्मचारियों के खिलाफ कार्यवाही की मांग की।
वक्ताओ ने किया संबोघित
एसडीएम कार्यालय के आगे संबोघित करते हुए पूर्व सरपंच भंवर भंसाली ने कहा कि जनता को अपनी समस्या बताने का पूरा अघिकार है। माजीवाला सरपंच भगवतसिंह ने कहा कि न्यायालय द्वारा इस मामले में गिरफ्तार लोगों को न्यायिक अभिरक्षा मे भेजने के आदेश दिए जाने के बाद भी पुलिस ने थाने में ले जाकर बर्बरतापूर्वक पीटा। चंद्रशेखर छाजेड़ ने कहा कि पानी के बदले लाठियां बरसाना अन्याय है। पूर्व सरपंच ईश्वरसिंह चौहान, भीमाराम माली ने कहा कि जब तक दोषी अघिकारियों के खिलाफ कार्यवाही व झूठे मामले निरस्त नहीं किए जाते तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
तीन दिन में कार्रवाई का आश्वासन
दोपहर में उपखंड अघिकारी कार्यालय में समझौता वार्ता आयोजित हुई, जिसमें अघिकारियों ने संघर्ष समिति के पदाघिकारियों से समझाइश की। उपखंड अघिकारी ने भरोसा दिलाया कि जसोल लाठीचार्ज प्रकरण की निष्पक्ष जांच जिले के किसी अन्य अघिकारी से करवाई जाएगी। दोष्ाी अघिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होगी। तब जाकर मामला शांत हो पाया और प्रदर्शनकारी वापिस रवाना हुए।
विधायक नहीं आए
जसोल में शनिवार को लगभग डेढ़ हजार लोगों के एकत्रित होने, बालोतरा में उपखंड अघिकारी कार्यालय के समक्ष हजारों प्रदर्शनकारियों की भीड़ तथा दो घंटे तक रास्ता जाम होने की घटना के बाद भी पचपदरा विधायक मदन प्रजापत मौके से नहीं आए।
पुलिस का माकूल बंदोबस्त
कानून व शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए जसोल व बालोतरा सहित जुलूस के रास्ते में पुलिस का माकूल बंदोबस्त रहा। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रदीप मोहन, उपखंड अघिकारी राजेश चौहान, तहसीलदार राजेश मेवाड़ा, बालोतरा पुलिस उप अधीक्षक जस्साराम बोस व चौहटन पुलिस उप अधीक्षक राजेंद्र खोथ के नेतृत्व में विभिन्न थानों का सशस्त्र जाप्ता तैनात रहा।
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Population Control
The world population has crossed 650 Crores. more than 70% of the indian population is not having safe and enough drinking water (don’t think of healthy food)
In our group – popcons (Population Control Society) Survey in some villages of India, the drinking water is suppllied once in 3-4 days by tanker – since months. It is the matter of big shame that for drinking water war has started between people and administration (Balotara (Rajasthan), Mumbai, Delhi, Ujjajen etc.)
Don’t take above incidence lightly, because it is the starting of the 3rd world war.
If the growth rate of India remains 6%, then in next 5 years the water requirement will be 4 Fold more.
According to latest reports –
• Gangotri glacier melts more than 18 meters every year.
• Antarctica snow melt more than 7 meters in last 10 years.
• Ground water level has decreased more than 60% in last 15 years (Gone deep up to 1500 Feet)
• If ground water is 100% recharged by rain, we drain it 125%.
• For normal healthy environment there should by 30% forest on land. In India it is only 11% and we are destroying 1% per year to give house to growing population.
In Rajasthan, more than 50% river and lake land is covered by public and our land authority have given authority letters also and remaining land is used to throw garbage of villages and towns. Ground water level has gone below 1500 feet. 60%diseases in human beings are only water born.
Think of Education, Health Food, Residence and Job after wards, will you be able to provide safe – enough – drinking water to every body, if not, than what will happen??
Why don’t you think that population explosion is the only and reason of poverty, unemployment, crimes?? According to the Dehli police,There is 9% rise in murder and kidnaping,20% rise Loot and Theft and accident cases.
Our government is giving pressure on Operations (T.T., Ls.) and spent Billions of rupees, But It is the last way to control the population. According to Rajasthan and Gurjat Government Latest reports only 35-40% People undergoes operation after 2nd Child, 55-65% gets it done after 4-6 Children. We have reached 130 crores from 40 crores in last 60 years and 60 crores uneducated from 20 crore and 19 crore educated unemployed.
Now a days Family Planning Operation is not necessary to control the population. Why do you waste billions of public reupee?
Is it the real way? When we will take strong steps to treat the cause of the disease??
Can we learn some thing from China?
Why are you spoiling school children education in Rallying with slogans?? “Hum do hamare do, Pahla Abhi nahi, Doosara kabhi nahi,”
World Population U.N.
1750 Years - 79 Crore Population
1800 Years - 98 Crore Population
1850 Years - 120 Crore Population
1900 Years - 165 Crore Population
1950 Years - 256 Crore Population
2000 Years - 608 Crore Population
Think today; work today, not tomorrow....
Ramesh Suthar
In our group – popcons (Population Control Society) Survey in some villages of India, the drinking water is suppllied once in 3-4 days by tanker – since months. It is the matter of big shame that for drinking water war has started between people and administration (Balotara (Rajasthan), Mumbai, Delhi, Ujjajen etc.)
Don’t take above incidence lightly, because it is the starting of the 3rd world war.
If the growth rate of India remains 6%, then in next 5 years the water requirement will be 4 Fold more.
According to latest reports –
• Gangotri glacier melts more than 18 meters every year.
• Antarctica snow melt more than 7 meters in last 10 years.
• Ground water level has decreased more than 60% in last 15 years (Gone deep up to 1500 Feet)
• If ground water is 100% recharged by rain, we drain it 125%.
• For normal healthy environment there should by 30% forest on land. In India it is only 11% and we are destroying 1% per year to give house to growing population.
In Rajasthan, more than 50% river and lake land is covered by public and our land authority have given authority letters also and remaining land is used to throw garbage of villages and towns. Ground water level has gone below 1500 feet. 60%diseases in human beings are only water born.
Think of Education, Health Food, Residence and Job after wards, will you be able to provide safe – enough – drinking water to every body, if not, than what will happen??
Why don’t you think that population explosion is the only and reason of poverty, unemployment, crimes?? According to the Dehli police,There is 9% rise in murder and kidnaping,20% rise Loot and Theft and accident cases.
Our government is giving pressure on Operations (T.T., Ls.) and spent Billions of rupees, But It is the last way to control the population. According to Rajasthan and Gurjat Government Latest reports only 35-40% People undergoes operation after 2nd Child, 55-65% gets it done after 4-6 Children. We have reached 130 crores from 40 crores in last 60 years and 60 crores uneducated from 20 crore and 19 crore educated unemployed.
Now a days Family Planning Operation is not necessary to control the population. Why do you waste billions of public reupee?
Is it the real way? When we will take strong steps to treat the cause of the disease??
Can we learn some thing from China?
Why are you spoiling school children education in Rallying with slogans?? “Hum do hamare do, Pahla Abhi nahi, Doosara kabhi nahi,”
World Population U.N.
1750 Years - 79 Crore Population
1800 Years - 98 Crore Population
1850 Years - 120 Crore Population
1900 Years - 165 Crore Population
1950 Years - 256 Crore Population
2000 Years - 608 Crore Population
Think today; work today, not tomorrow....
Ramesh Suthar
जनसंख्या में एमपी थाईलैंड से आगे, राजस्थान ने इटली को पीछे छोड़ा
Bhaskar पंकज कुमार पांडेय Sunday, July 12, 2009 00:20 [IST]
नई दिल्ली. चीन के बाद सबसे बड़ी आबादी वाले हमारे देश के कई राज्य ऐसे हैं, जो जनसंख्या के मामले में दुनिया के कई देशों को मात दे रहे हैं। मध्यप्रदेश की आबादी जहां थाईलैंड से ज्यादा है तो राजस्थान इटली को चुनौती दे रहा है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के जनसंख्या स्थिरता कोष प्रभाग द्वारा जारी चार्ट के मुताबिक, आबादी के मामले में यही स्थिति छत्तीसगढ़, हरियाणा, पंजाब, दिल्ली और लगभग सभी राज्यों की है। यहां तक कि उत्तराखंड जैसे छोटे राज्य की आबादी भी ऑस्ट्रिया से ज्यादा है।
शनिवार को विश्व जनसंख्या दिवस पर केंद्रीय स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी रिपोर्ट में बताया गया है कि बढ़ती आबादी पर अंकुश नहीं लगाया गया तो देश की आबादी में अगले 16 साल में 50 प्रतिशत से ज्यादा वृद्धि हो जाएगी। इसके लिए उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, बिहार और झारखंड जैसे राज्य जिम्मेदार होंगे। इसके विपरीत दक्षिण भारत के राज्यों का इसमें महज 13 प्रतिशत योगदान होगा।
नई दिल्ली. चीन के बाद सबसे बड़ी आबादी वाले हमारे देश के कई राज्य ऐसे हैं, जो जनसंख्या के मामले में दुनिया के कई देशों को मात दे रहे हैं। मध्यप्रदेश की आबादी जहां थाईलैंड से ज्यादा है तो राजस्थान इटली को चुनौती दे रहा है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के जनसंख्या स्थिरता कोष प्रभाग द्वारा जारी चार्ट के मुताबिक, आबादी के मामले में यही स्थिति छत्तीसगढ़, हरियाणा, पंजाब, दिल्ली और लगभग सभी राज्यों की है। यहां तक कि उत्तराखंड जैसे छोटे राज्य की आबादी भी ऑस्ट्रिया से ज्यादा है।
शनिवार को विश्व जनसंख्या दिवस पर केंद्रीय स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी रिपोर्ट में बताया गया है कि बढ़ती आबादी पर अंकुश नहीं लगाया गया तो देश की आबादी में अगले 16 साल में 50 प्रतिशत से ज्यादा वृद्धि हो जाएगी। इसके लिए उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, बिहार और झारखंड जैसे राज्य जिम्मेदार होंगे। इसके विपरीत दक्षिण भारत के राज्यों का इसमें महज 13 प्रतिशत योगदान होगा।
मंत्रीजी बोले, 'टीवी दिखाओ, आबादी घटाओ
भास्कर नेटवर्क Sunday, July 12, 2009 00:10 [IST]
नई दिल्ली. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद ने संतुलित परिवार के लिए युवाओं को देर से विवाह करने का सुझाव दिया है। शनिवार को विश्व जनसंख्या दिवस पर यहां के विज्ञान भवन में आयोजित कार्यक्रम में आजाद ने कहा बढ़ती आबादी पर अंकुश लगाने के लिए लोगों को कानूनन निर्धारित उम्र से ज्यादा पर विवाह करने के बारे में सोचना चाहिए।
आजाद ने कहा कि ‘शादी देर से करोगे तो बच्चे कम होंगे और परिवार संतुलित रहेगा।’ स्वास्थ्य मंत्री के मुताबिक, 25 से 30 वर्ष की आयु विवाह के लिए आदर्श आयु हो सकती है। उन्होंने कहा कि 18 वर्ष की उम्र में विवाह करना कानून के लिहाज से ठीक है, लेकिन जनसंख्या वृद्धि पर रोक लगाने के लिए लीक से हटकर कुछ करना होगा।
टेलीविजन रोकेगा आबादी
आजाद के मुताबिक, गरीब इलाकों में टेलीविजन जैसे मनोरंजन के साधन न होने से वहां बच्चे ज्यादा पैदा होते हैं। उन इलाकों में बिजली पहुंचे तो घरों में मनोरंजन के साधन भी पहुचेंगे। इसका लाभ जनसंख्या नियंत्रण को मिलेगा।
नई दिल्ली. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद ने संतुलित परिवार के लिए युवाओं को देर से विवाह करने का सुझाव दिया है। शनिवार को विश्व जनसंख्या दिवस पर यहां के विज्ञान भवन में आयोजित कार्यक्रम में आजाद ने कहा बढ़ती आबादी पर अंकुश लगाने के लिए लोगों को कानूनन निर्धारित उम्र से ज्यादा पर विवाह करने के बारे में सोचना चाहिए।
आजाद ने कहा कि ‘शादी देर से करोगे तो बच्चे कम होंगे और परिवार संतुलित रहेगा।’ स्वास्थ्य मंत्री के मुताबिक, 25 से 30 वर्ष की आयु विवाह के लिए आदर्श आयु हो सकती है। उन्होंने कहा कि 18 वर्ष की उम्र में विवाह करना कानून के लिहाज से ठीक है, लेकिन जनसंख्या वृद्धि पर रोक लगाने के लिए लीक से हटकर कुछ करना होगा।
टेलीविजन रोकेगा आबादी
आजाद के मुताबिक, गरीब इलाकों में टेलीविजन जैसे मनोरंजन के साधन न होने से वहां बच्चे ज्यादा पैदा होते हैं। उन इलाकों में बिजली पहुंचे तो घरों में मनोरंजन के साधन भी पहुचेंगे। इसका लाभ जनसंख्या नियंत्रण को मिलेगा।
Saturday, July 11, 2009
तीन घंटे घोषित, इससे ज्यादा अघोषित कटौती
Bhaskar News Saturday, July 11, 2009 06:49 [IST]
उदयपुर. शहर में दो तरह से बिजली कटौती की जा रही है। तीन घंटे कटौती तो घोषित है और इसके अलावा दिन में कई बार बिजली गुल हो जाती है। इससे शहरवासी परेशान हो गए हैं।
सुबह 8 से 11 बजे तक बिजली बंद रखने के अलावा दस-पंद्रह मिनट के लिए दिन में कई बार बिजली की आंख मिचौनी चल रही है। सिलावटवाड़ी निवासी हैदर खान ने बताया कि बार-बार बिजली गुल होने और थोड़ी देर बाद तेज करंट से जल उठने से वाशिंग मशीन, मिक्सी व ट्यूबलाइटें खराब हो चुकी हैं।
कालकामाता रोड निवासी सुयश पालीवाल की टीवी और डीवीडी प्लेयर खराब हो गया। धोलीबावड़ी मार्ग निवासी चंद्रप्रकाश शर्मा का मोबाइल फोन चर्ा्िजग के दौरान तेज करंट से जल गया। तीज का चौक, धानमंडी, मंडी की नाल, भूपालवाड़ी, मोचीवाड़ा क्षेत्रों में दिन में कई बार पावर का चढ़ाव-उतार बना रहता है। विनायकनगर, बोहरा गणोश क्षेत्र में दिन में कई-कई बार बिजली गुल हुई। हिरणमगरी क्षेत्र की निर्मला मेनारिया ने बताया कि 11की बजाय बिजली दो घंटे देर से आई।
रूपसागर में अक्सर बंद रहती है बिजली
शहर के रूपसागर रोड की कॉलोनियों में अधिकांश समय बिजली बंद रहती है। बीजासननगर, आदिनाथ कॉलोनी में बिजली की लाइन में फाल्ट आ जाने पर बहाल होने में कई घंटे लगते हैं। क्षेत्रवासी सुरपालसिंह ने बताया कि पिछले रविवार को रात 8 बजे बिजली बंद हुई थी जो सोमवार शाम 5 बजे बहाल हो सकी।
इस क्षेत्र में सप्ताह में चार-पांच बार रात में बिजली बंद हो जाती है। अजमेर डिस्कॉम के अधिकारियों को फोन करने पर संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है। भुवाणा में भी कटौती का समय बदला एवीवीएनएल के भुवाणा सब स्टेशन से संबंधित कॉलोनियों में दोपहर 12 से अपराह्न् 3 बजे तक बिजली कटौती का समय निर्धारित किया गया है। इससे भुवाणा गांव, शोभागपुरा, चित्रकूट नगर प्रभावित होंगे।
उदयपुर. शहर में दो तरह से बिजली कटौती की जा रही है। तीन घंटे कटौती तो घोषित है और इसके अलावा दिन में कई बार बिजली गुल हो जाती है। इससे शहरवासी परेशान हो गए हैं।
सुबह 8 से 11 बजे तक बिजली बंद रखने के अलावा दस-पंद्रह मिनट के लिए दिन में कई बार बिजली की आंख मिचौनी चल रही है। सिलावटवाड़ी निवासी हैदर खान ने बताया कि बार-बार बिजली गुल होने और थोड़ी देर बाद तेज करंट से जल उठने से वाशिंग मशीन, मिक्सी व ट्यूबलाइटें खराब हो चुकी हैं।
कालकामाता रोड निवासी सुयश पालीवाल की टीवी और डीवीडी प्लेयर खराब हो गया। धोलीबावड़ी मार्ग निवासी चंद्रप्रकाश शर्मा का मोबाइल फोन चर्ा्िजग के दौरान तेज करंट से जल गया। तीज का चौक, धानमंडी, मंडी की नाल, भूपालवाड़ी, मोचीवाड़ा क्षेत्रों में दिन में कई बार पावर का चढ़ाव-उतार बना रहता है। विनायकनगर, बोहरा गणोश क्षेत्र में दिन में कई-कई बार बिजली गुल हुई। हिरणमगरी क्षेत्र की निर्मला मेनारिया ने बताया कि 11की बजाय बिजली दो घंटे देर से आई।
रूपसागर में अक्सर बंद रहती है बिजली
शहर के रूपसागर रोड की कॉलोनियों में अधिकांश समय बिजली बंद रहती है। बीजासननगर, आदिनाथ कॉलोनी में बिजली की लाइन में फाल्ट आ जाने पर बहाल होने में कई घंटे लगते हैं। क्षेत्रवासी सुरपालसिंह ने बताया कि पिछले रविवार को रात 8 बजे बिजली बंद हुई थी जो सोमवार शाम 5 बजे बहाल हो सकी।
इस क्षेत्र में सप्ताह में चार-पांच बार रात में बिजली बंद हो जाती है। अजमेर डिस्कॉम के अधिकारियों को फोन करने पर संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है। भुवाणा में भी कटौती का समय बदला एवीवीएनएल के भुवाणा सब स्टेशन से संबंधित कॉलोनियों में दोपहर 12 से अपराह्न् 3 बजे तक बिजली कटौती का समय निर्धारित किया गया है। इससे भुवाणा गांव, शोभागपुरा, चित्रकूट नगर प्रभावित होंगे।
किसानों ने रोका रास्ता
भास्कर न्यूज Friday, July 10, 2009 07:11 [IST]
जोधपुर. खेती के लिए कम से कम आठ घंटे बिजली की मांग को लेकर जिले के किसानों ने गुरुवार को डिस्कॉम मुख्यालय के बाहर धरना देकर प्रदर्शन किया। इससे आईटीआई चौराहे से डीजल शेड जाने वाला मार्ग करीब चार घंटे तक बंद रहा। बाद में साढ़े छह घंटे बिजली दिए जाने के आश्वासन पर किसान लौटे। उधर बिलाड़ा में किसानों ने अधिकारियों का घेराव किया और तिंवरी में सहायक अभियंता कार्यालय पर ताले लगा दिए।
करीब पौन बजे भारतीय किसान संघ के बैनर तले जिले के विभिन्न गांवों से बड़ी संख्या में किसान वाहनों से डिस्कॉम मुख्यालय के बाहर पहुंचे। रास्ते पर पत्थर डाल कर धरने पर बैठ गए। किसानों ने डिस्कॉम व राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उनका कहना था कि आठ घंटे बिजली का दावा करने वाली सरकार उन्हें पांच-छह घंटे भी बिजली नहीं दे पा रही है। इधर मानसून की देरी ने भी किसानों को चिंता में डाल रखा है। इस बीच पुलिस व किसानों के बीच कई बार कहासुनी भी हुई, लेकिन मौके पर मौजूद पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों ने स्थिति को संभाले रखा। किसान नेताओं का कहना था कि जोधपुर डिस्कॉम एमडी जब तक उनके पास आकर ज्ञापन नहीं लेंगे ।
और उनको सात घंटे बिजली का भरोसा नहीं देंगे, तब तक वे नहीं हटेंगे। काफी देर तक हंगामा होता रहा। डिस्कॉम एमडी बाहर नहीं आए तो एडीएम सिटी स्नेहलता पंवार, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (सतर्कता) नवलकिशोर पुरोहित, पुलिस उपअधीक्षक जसवंतसिंह बालोत, चीफ इंजीनियर एसके कुलश्रेष्ठ, मुख्य लेखाधिकारी एमएल पालावत, सचिव बीएल मेहरा सहित अन्य अधिकारियों ने किसानों को करीब आधा घंटे तक समझाया।
आखिर एमडी आए और असलियत बताई
किसान किसी भी सुन ही नहीं रहे थे। आखिर एमडी खमेसरा बाहर आए और कहा कि उत्तरी ग्रिड में तकनीकी खराबी और पर्याप्त बिजली आपूर्ति नहीं मिलने के कारण किसानों को पूरी बिजली देने में परेशानी आ रही है। ऐसे में राज्य सरकार के आदेशों के तहत ही बिजली दे पा रहे हैं। लेकिन, किसान अड़े रहे और कम से कम 6.30 घंटे बिजली देने की मांग करने लगे। इस पर एमडी भीतर लौटे और अधिकारियों से चर्चा की। करीब चार बजे उन्होंने किसानों को खेती के लिए साढ़े छह घंटे बिजली का भरोसा दिलाया, तब कहीं जाकर किसानों ने धरना समाप्त किया।
सिर्फ तीन घंटे मिल रही है बिजली
इससे पहले डिस्कॉम के बाहर आयोजित सभा में भारतीय किसान संघ के प्रदेश महामंत्री रतनलाल डागा ने कहा कि दिसंबर 2008 से किसानों को खेती के लिए सिर्फ तीन घंटे बिजली मिल रही है, जबकि सरकार ने अप्रेल से 8 घंटे तक बिजली देने की घोषणा की थी। जिले की फलोदी, लूणी, पीपाड़, बिलाड़ा, बाप, शेरगढ़, बालेसर, भोपालगढ़, मंडोर पंचायत समिति के अधीन आने वाले ग्रामीण क्षेत्रों में विभिन्न प्रकार की सब्जियां और मूंगफली की खेती की जा रही है, जो पर्याप्त बिजली के अभाव में जल रही है।
लाखों के प्याज पकने से पहले जले
किसान नेता माणकराम परिहार ने कहा कि पूर्व में भी अघोषित बिजली कटौती से किसानों की लाखों रुपए की प्याज की फसल जलकर चौपट हो गई और जो बचे वे छोटे रह गए। इनका भाव मिलना मुश्किल हो जाएगा। ऐसे में बिजली कटौती से किसानों की हालत नाजुक हो जाएगी। जयनारायण सांखला, नरेश व्यास, जसाराम जाणी, फुवाराम, कानाराम गोरचिया, भोपालसिंह चामूं, भंवरलाल पालीवाल, कांग्रेस नेता सुनील परिहार ने भी विचार व्यक्त किए।
यहां से आए किसान
जिले के बिलाड़ा, भोपालगढ़, फलोदी, बाप, चामूं, शेरगढ़, बालेसर, आगोलाई, तिंवरी, मथानियां, ओसियां, पीपाड़, नारवां-इन्द्रोका, बिसलपुर, लूणी, माणकलाव सहित कई गांवों के किसान इस प्रदर्शन में शामिल थे।
बिलाड़ा में घेराव, तिंवरी में ताला लगाया
बिलाड़ा में बिजली कटौती से गुस्साए ग्रामीणों ने शिवनगरी जीएसएस पर धरना देकर उच्चधिकारियों का घेराव किया। किसानों ने चेतावनी दी है कि 15 जुलाई तक बिजली आपूर्ति में सुधार नहीं हुआ तो राष्ट्रीय राजमार्ग जाम किया जाएगा। वहीं तिंवरी में अघोषित बिजली कटौती और पेयजल संकट से त्रस्त किसानों ने डिस्कॉम के सहायक अभियंता कार्यालय पर ताला जड़ दिया।
जोधपुर. खेती के लिए कम से कम आठ घंटे बिजली की मांग को लेकर जिले के किसानों ने गुरुवार को डिस्कॉम मुख्यालय के बाहर धरना देकर प्रदर्शन किया। इससे आईटीआई चौराहे से डीजल शेड जाने वाला मार्ग करीब चार घंटे तक बंद रहा। बाद में साढ़े छह घंटे बिजली दिए जाने के आश्वासन पर किसान लौटे। उधर बिलाड़ा में किसानों ने अधिकारियों का घेराव किया और तिंवरी में सहायक अभियंता कार्यालय पर ताले लगा दिए।
करीब पौन बजे भारतीय किसान संघ के बैनर तले जिले के विभिन्न गांवों से बड़ी संख्या में किसान वाहनों से डिस्कॉम मुख्यालय के बाहर पहुंचे। रास्ते पर पत्थर डाल कर धरने पर बैठ गए। किसानों ने डिस्कॉम व राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उनका कहना था कि आठ घंटे बिजली का दावा करने वाली सरकार उन्हें पांच-छह घंटे भी बिजली नहीं दे पा रही है। इधर मानसून की देरी ने भी किसानों को चिंता में डाल रखा है। इस बीच पुलिस व किसानों के बीच कई बार कहासुनी भी हुई, लेकिन मौके पर मौजूद पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों ने स्थिति को संभाले रखा। किसान नेताओं का कहना था कि जोधपुर डिस्कॉम एमडी जब तक उनके पास आकर ज्ञापन नहीं लेंगे ।
और उनको सात घंटे बिजली का भरोसा नहीं देंगे, तब तक वे नहीं हटेंगे। काफी देर तक हंगामा होता रहा। डिस्कॉम एमडी बाहर नहीं आए तो एडीएम सिटी स्नेहलता पंवार, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (सतर्कता) नवलकिशोर पुरोहित, पुलिस उपअधीक्षक जसवंतसिंह बालोत, चीफ इंजीनियर एसके कुलश्रेष्ठ, मुख्य लेखाधिकारी एमएल पालावत, सचिव बीएल मेहरा सहित अन्य अधिकारियों ने किसानों को करीब आधा घंटे तक समझाया।
आखिर एमडी आए और असलियत बताई
किसान किसी भी सुन ही नहीं रहे थे। आखिर एमडी खमेसरा बाहर आए और कहा कि उत्तरी ग्रिड में तकनीकी खराबी और पर्याप्त बिजली आपूर्ति नहीं मिलने के कारण किसानों को पूरी बिजली देने में परेशानी आ रही है। ऐसे में राज्य सरकार के आदेशों के तहत ही बिजली दे पा रहे हैं। लेकिन, किसान अड़े रहे और कम से कम 6.30 घंटे बिजली देने की मांग करने लगे। इस पर एमडी भीतर लौटे और अधिकारियों से चर्चा की। करीब चार बजे उन्होंने किसानों को खेती के लिए साढ़े छह घंटे बिजली का भरोसा दिलाया, तब कहीं जाकर किसानों ने धरना समाप्त किया।
सिर्फ तीन घंटे मिल रही है बिजली
इससे पहले डिस्कॉम के बाहर आयोजित सभा में भारतीय किसान संघ के प्रदेश महामंत्री रतनलाल डागा ने कहा कि दिसंबर 2008 से किसानों को खेती के लिए सिर्फ तीन घंटे बिजली मिल रही है, जबकि सरकार ने अप्रेल से 8 घंटे तक बिजली देने की घोषणा की थी। जिले की फलोदी, लूणी, पीपाड़, बिलाड़ा, बाप, शेरगढ़, बालेसर, भोपालगढ़, मंडोर पंचायत समिति के अधीन आने वाले ग्रामीण क्षेत्रों में विभिन्न प्रकार की सब्जियां और मूंगफली की खेती की जा रही है, जो पर्याप्त बिजली के अभाव में जल रही है।
लाखों के प्याज पकने से पहले जले
किसान नेता माणकराम परिहार ने कहा कि पूर्व में भी अघोषित बिजली कटौती से किसानों की लाखों रुपए की प्याज की फसल जलकर चौपट हो गई और जो बचे वे छोटे रह गए। इनका भाव मिलना मुश्किल हो जाएगा। ऐसे में बिजली कटौती से किसानों की हालत नाजुक हो जाएगी। जयनारायण सांखला, नरेश व्यास, जसाराम जाणी, फुवाराम, कानाराम गोरचिया, भोपालसिंह चामूं, भंवरलाल पालीवाल, कांग्रेस नेता सुनील परिहार ने भी विचार व्यक्त किए।
यहां से आए किसान
जिले के बिलाड़ा, भोपालगढ़, फलोदी, बाप, चामूं, शेरगढ़, बालेसर, आगोलाई, तिंवरी, मथानियां, ओसियां, पीपाड़, नारवां-इन्द्रोका, बिसलपुर, लूणी, माणकलाव सहित कई गांवों के किसान इस प्रदर्शन में शामिल थे।
बिलाड़ा में घेराव, तिंवरी में ताला लगाया
बिलाड़ा में बिजली कटौती से गुस्साए ग्रामीणों ने शिवनगरी जीएसएस पर धरना देकर उच्चधिकारियों का घेराव किया। किसानों ने चेतावनी दी है कि 15 जुलाई तक बिजली आपूर्ति में सुधार नहीं हुआ तो राष्ट्रीय राजमार्ग जाम किया जाएगा। वहीं तिंवरी में अघोषित बिजली कटौती और पेयजल संकट से त्रस्त किसानों ने डिस्कॉम के सहायक अभियंता कार्यालय पर ताला जड़ दिया।
गर्मी में बिजली कटौती ने किया बेहाल
भास्कर न्यूज Friday, July 10, 2009 05:46 [IST]
पाली. भीषण गर्मी में जिला मुख्यालय पर चार घंटे की बिजली कटौती ने जनजीवन को झकझोर दिया। वहीं शाम को तेज हवा के साथ हुई बारिश से कई जगहों पर फाल्ट होने से शहर के कई हिस्सों में दो से तीन घंटे तक बिजली बंद रही। प्रदेश के कई तापघरों में बिजली उत्पादन कम होने से राज्य सरकार के आदेश पर डिस्कॉम ने बिजली कटौती का आदेश जारी किया है। इसमें कल-कारखानों में चार से पांच घंटे तक काम ठप रहने से करीब एक करोड़ रुपए का प्रतिदिन नुकसान हो रहा है।
काफी समय से मंदी की मार झेल रहे उद्योग जगत के लिए दो महीने तेजी वाले हैं। इन दिनों में हो रही बिजली कटौती से उत्पादन पर काफी असर हो रहा है। भरी दुपहरी में बिजली कटौती से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। गुरुवार शाम को तेज हवा के साथ हुई बारिश से भी शहर में करीब डेढ़-दो घंटे तक बिजली बंद रही। रामासिया व मंडली में भी फाल्ट के कारण देर रात तक बिजली शुरू नहीं हो सकी।
कर्मचारी ठीक करने में जुटे रहे। इधर, शहर में भीषण गर्मी के बीच बिजली कटौती होने से शहरवासियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। टैगौर नगर के नवाब खां ने बताया कि डिस्कॉम की ओर से कभी बूस्टर के बहाने बिजली काट दी जाती है तो कभी अघोषित कटौती कर देने से हाल बेहाल हो रहा है।
‘राज्य सरकार की ओर से जिला मुख्यालय पर चार घंटे के लिए बिजली कटौती के आदेश हैं। ऐसे में गुरुवार को जिला मुख्यालय पर 4 घंटे बिजली कटौती की गई। भीषण गर्मी में बिजली कटौती से परेशानी होना स्वभाविक है। शाम को तेज हवा के साथ हुई बारिश से कई जगहों पर फाल्ट होने से उन इलाकों में बिजली बंद रही। बाद में उसे सुधार लिया गया। आगामी आदेश तक कटौती जारी रहेगी’। - उमेश माथुर, एक्सईएन, डिस्कॉम, पाली।
पाली. भीषण गर्मी में जिला मुख्यालय पर चार घंटे की बिजली कटौती ने जनजीवन को झकझोर दिया। वहीं शाम को तेज हवा के साथ हुई बारिश से कई जगहों पर फाल्ट होने से शहर के कई हिस्सों में दो से तीन घंटे तक बिजली बंद रही। प्रदेश के कई तापघरों में बिजली उत्पादन कम होने से राज्य सरकार के आदेश पर डिस्कॉम ने बिजली कटौती का आदेश जारी किया है। इसमें कल-कारखानों में चार से पांच घंटे तक काम ठप रहने से करीब एक करोड़ रुपए का प्रतिदिन नुकसान हो रहा है।
काफी समय से मंदी की मार झेल रहे उद्योग जगत के लिए दो महीने तेजी वाले हैं। इन दिनों में हो रही बिजली कटौती से उत्पादन पर काफी असर हो रहा है। भरी दुपहरी में बिजली कटौती से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। गुरुवार शाम को तेज हवा के साथ हुई बारिश से भी शहर में करीब डेढ़-दो घंटे तक बिजली बंद रही। रामासिया व मंडली में भी फाल्ट के कारण देर रात तक बिजली शुरू नहीं हो सकी।
कर्मचारी ठीक करने में जुटे रहे। इधर, शहर में भीषण गर्मी के बीच बिजली कटौती होने से शहरवासियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। टैगौर नगर के नवाब खां ने बताया कि डिस्कॉम की ओर से कभी बूस्टर के बहाने बिजली काट दी जाती है तो कभी अघोषित कटौती कर देने से हाल बेहाल हो रहा है।
‘राज्य सरकार की ओर से जिला मुख्यालय पर चार घंटे के लिए बिजली कटौती के आदेश हैं। ऐसे में गुरुवार को जिला मुख्यालय पर 4 घंटे बिजली कटौती की गई। भीषण गर्मी में बिजली कटौती से परेशानी होना स्वभाविक है। शाम को तेज हवा के साथ हुई बारिश से कई जगहों पर फाल्ट होने से उन इलाकों में बिजली बंद रही। बाद में उसे सुधार लिया गया। आगामी आदेश तक कटौती जारी रहेगी’। - उमेश माथुर, एक्सईएन, डिस्कॉम, पाली।
बरस रही हैं मुश्किले
Bhaskar Correspondent Friday, July 10, 2009 05:05 [IST]
राज्य में वर्षो बाद इतना गर्म सावन
राजस्थान में मानसून आ जाने के बाद भी गंभीर पेयजल संकट के हालात हैं। सावन में वर्षो बाद भीषण गर्मी पड़ रही है। लोग पानी के लिए बेहाल हैं। 78 शहर-कस्बों में दो से चार दिन के अंतराल में सप्लाई हो रही है। पिछले साल प्रदेश के सात जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई थी, जिससे अधिकतर शहर और कस्बों में साल के अधिकांश समय में पानी का संकट रहा है।
बीसलपुर बांध में बचा 4-6 महीने का पानी
मानसून की बेरुखी का सीधा असर बीसलपुर पेयजल योजना पर पड़ रहा है। हालात यही रहे तो शहर के डेढ़ लाख घरों में बीसलपुर के पानी की आपूर्ति बंद हो सकती है। जलदाय विभाग व जल संसाधन विभाग के इंजीनियरों के अनुसार बीसलपुर बांध में सिर्फ चार से छह माह का पानी बचा है।
शहर में पानी की किल्लत दूर करने के लिए 1100 करोड़ रुपए खर्च कर बीसलपुर पेयजल योजना बनाई गई है, लेकिन मानसून की बेरूखी से बीसलपुर बांध में पानी की स्तर लगातार गिर रहा है। फिलहाल बांध का स्तर 306.6 मीटर है, जिसमें 3500 एमसीएफटी पानी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मानसून की बेरुखी कायम रही तो अक्टूबर तक पानी की स्थिति गंभीर हो जाएगी।
जलसंसाधन विभाग के मुख्य अभियंता सुभाष महर्षि ने बताया-बांध में सिर्फ 6 महीने लायक पानी है। यदि पानी को लंबे समय तक चलाना है, तो आपूर्ति में कटौती करनी होगी। रोजाना बांध की स्थिति की मॉनिटरिंग करवा रहे हैं।
राज्य में वर्षो बाद इतना गर्म सावन
राजस्थान में मानसून आ जाने के बाद भी गंभीर पेयजल संकट के हालात हैं। सावन में वर्षो बाद भीषण गर्मी पड़ रही है। लोग पानी के लिए बेहाल हैं। 78 शहर-कस्बों में दो से चार दिन के अंतराल में सप्लाई हो रही है। पिछले साल प्रदेश के सात जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई थी, जिससे अधिकतर शहर और कस्बों में साल के अधिकांश समय में पानी का संकट रहा है।
बीसलपुर बांध में बचा 4-6 महीने का पानी
मानसून की बेरुखी का सीधा असर बीसलपुर पेयजल योजना पर पड़ रहा है। हालात यही रहे तो शहर के डेढ़ लाख घरों में बीसलपुर के पानी की आपूर्ति बंद हो सकती है। जलदाय विभाग व जल संसाधन विभाग के इंजीनियरों के अनुसार बीसलपुर बांध में सिर्फ चार से छह माह का पानी बचा है।
शहर में पानी की किल्लत दूर करने के लिए 1100 करोड़ रुपए खर्च कर बीसलपुर पेयजल योजना बनाई गई है, लेकिन मानसून की बेरूखी से बीसलपुर बांध में पानी की स्तर लगातार गिर रहा है। फिलहाल बांध का स्तर 306.6 मीटर है, जिसमें 3500 एमसीएफटी पानी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मानसून की बेरुखी कायम रही तो अक्टूबर तक पानी की स्थिति गंभीर हो जाएगी।
जलसंसाधन विभाग के मुख्य अभियंता सुभाष महर्षि ने बताया-बांध में सिर्फ 6 महीने लायक पानी है। यदि पानी को लंबे समय तक चलाना है, तो आपूर्ति में कटौती करनी होगी। रोजाना बांध की स्थिति की मॉनिटरिंग करवा रहे हैं।
अधिकारियों से दो-दो हाथ
Bhaskar Correspondent Friday, July 10, 2009 06:12 [IST]
जयपुर. सांगानेर में कुछ लोगों ने गुरुवार को जलदाय कार्यालय व नगर निगम के जोन कार्यालय में उत्पात मचाया और दो अधिकारियों के साथ मारपीट की। बाद में दोनों विभागों ने सांगानेर थाने में नामजद मामले दर्ज कराए हैं।
जलदाय कार्यालय (ग्रामीण) में सुबह करीब साढ़े दस बजे बीस से ज्यादा लोग पहुंचे। उस समय कार्यालय में कनिष्ठ अभियंता विनोद गुप्ता मौजूद थे। वे कनिष्ठ अभियंता के कमरे में घुसे और टेबल के सामने पड़ी फाइलें फाड़ना शुरू कर दीं। जब अधिकारी ने विरोध किया तो उसके साथ मारपीट शुरू कर दी और कुर्सियों को इधर-उधर फेंक दिया। घटना के बाद विभाग ने कुछ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराया। कनिष्ठ अभियंता विनोद कुमार गुप्ता ने बताया कि जब लोगों से समस्या के बारे में पूछा तो कहने लगे की रामसिंहपुरा में टैंकरों से पानी क्यों नहीं जाता है तो उसने कहा कि रामसिंहपुरा का क्षेत्र दूसरे अधिकारी के पास है। यह सुनकर वे मारपीट करने लगे।
इसके बाद ये लोग नगर निगम के जोन कार्यालय में पहुंचे और वहां कमिश्नर को बिना कुछ बोले ही कुर्सी से गिरा दिया तथा सामने पड़ी फाइलों को फाड़ दिया। जब कमिश्नर ने लोगों से कारण पूछा तो कहने लगे कि आप अतिक्रमण हटाकर लोगों को बेरोजगार कर रहे हो। नगर निगम ने डॉ. नईम, पप्पू बक्से वाला तथा रितेश कुमावत के खिलाफ राजकार्य में बाधा डालने, अधिकारी के साथ हाथापाई करने का मामला सांगानेर थाने में दर्ज कराया।
जोन कमिश्नर ओपी गुप्ता का कहना है कि पहले भी इन लोगों ने निगम की गाड़ी के शीशे तोड़ दिए थे। इन लोगों ने सड़क पर अतिक्रमण कर रखे थे, जो पिछले दिनों निगम ने हटाए। उधर लोगों का आरोप था कि कस्बे की सफाई व्यवस्था बिगड़ी हुई, और निगम के लोग कार्य नहीं करते हैं।
जयपुर. सांगानेर में कुछ लोगों ने गुरुवार को जलदाय कार्यालय व नगर निगम के जोन कार्यालय में उत्पात मचाया और दो अधिकारियों के साथ मारपीट की। बाद में दोनों विभागों ने सांगानेर थाने में नामजद मामले दर्ज कराए हैं।
जलदाय कार्यालय (ग्रामीण) में सुबह करीब साढ़े दस बजे बीस से ज्यादा लोग पहुंचे। उस समय कार्यालय में कनिष्ठ अभियंता विनोद गुप्ता मौजूद थे। वे कनिष्ठ अभियंता के कमरे में घुसे और टेबल के सामने पड़ी फाइलें फाड़ना शुरू कर दीं। जब अधिकारी ने विरोध किया तो उसके साथ मारपीट शुरू कर दी और कुर्सियों को इधर-उधर फेंक दिया। घटना के बाद विभाग ने कुछ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराया। कनिष्ठ अभियंता विनोद कुमार गुप्ता ने बताया कि जब लोगों से समस्या के बारे में पूछा तो कहने लगे की रामसिंहपुरा में टैंकरों से पानी क्यों नहीं जाता है तो उसने कहा कि रामसिंहपुरा का क्षेत्र दूसरे अधिकारी के पास है। यह सुनकर वे मारपीट करने लगे।
इसके बाद ये लोग नगर निगम के जोन कार्यालय में पहुंचे और वहां कमिश्नर को बिना कुछ बोले ही कुर्सी से गिरा दिया तथा सामने पड़ी फाइलों को फाड़ दिया। जब कमिश्नर ने लोगों से कारण पूछा तो कहने लगे कि आप अतिक्रमण हटाकर लोगों को बेरोजगार कर रहे हो। नगर निगम ने डॉ. नईम, पप्पू बक्से वाला तथा रितेश कुमावत के खिलाफ राजकार्य में बाधा डालने, अधिकारी के साथ हाथापाई करने का मामला सांगानेर थाने में दर्ज कराया।
जोन कमिश्नर ओपी गुप्ता का कहना है कि पहले भी इन लोगों ने निगम की गाड़ी के शीशे तोड़ दिए थे। इन लोगों ने सड़क पर अतिक्रमण कर रखे थे, जो पिछले दिनों निगम ने हटाए। उधर लोगों का आरोप था कि कस्बे की सफाई व्यवस्था बिगड़ी हुई, और निगम के लोग कार्य नहीं करते हैं।
विधानसभा में पानी पर आग
Bhaskar Correspondent Saturday, July 11, 2009 04:25 [IST]
जल संकट से लोग परेशान हैं तो विधानसभा भी इस मुद्दे को लेकर रोज गर्मा रही है। शुक्रवार को राज्य में विभिन्न स्थानों पर बादल बरसे, लेकिन सूख रही धरती की प्यास बुझाने में नाकाम रहे। मानसून को आए 10 दिन से ज्यादा हो गए हैं, लेकिन अभी तक कई इलाके तो पूरी तरह सूखे हैं। दूसरी तरफ पानी के जमीनी स्रोत भी बादलों की नाराजगी की वजह से जवाब देने लगे हैं। इसके चलते धीरे-धीरे संकट गहराता जा रहा है।
विपक्ष का धरना, भाटी करेंगे आमरण अनशन
बिगड़ती पेयजल व्यवस्था को लेकर शुक्रवार को विधानसभा में हंगामा हुआ। भाजपा के देवीसिंह भाटी आमरण अनशन पर बैठ गए। बाद में पूरा विपक्ष वैल में आकर उनके समर्थन में बैठ गया। सरकार का वक्तव्य दिलाए जाने की मांग को लेकर विपक्ष ने देर तक नारेबाजी की। पेयजल संकट का यह मुद्दा शुक्रवार को भास्कर ने प्रमुखता से उठाया था। भाजपा विधायक देवीसिंह भाटी ने स्थगन प्रस्ताव के माध्यम से सदन में यह मुद्दा उठाया।
जल संसाधन मंत्री मदेरणा ने पेयजल समस्या को गंभीर बताते हुए सोमवार को सरकार की ओर से वक्तव्य दिए जाने का आश्वासन दिया। भाटी ने कहा कि राजस्थान के 78 कस्बे और 30 हजार से ज्यादा गांव पीने के पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। बीकानेर की कोलायत, लूणकरणसर और खाजूवाला आदि तहसीलों में जबर्दस्त पेयजल संकट है। लोगों को काफी दूरी से पानी लाना पड़ रहा है। सीमा पर तैनात बीएसएफ को भी टैंकरों से पानी मंगवाना पड़ रहा है। प्रदेश में अकाल जैसे हालात हैं, बजट में भी कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई है। सदन में भी विधायक जो समस्याएं बता रहे हैं उसमें 80 प्रतिशत प्रस्ताव पेयजल से संबंधित है। भाटी ने पेयजल के मुद्दे पर सरकार से समस्या का हल निकालने की मांग की। उनका तर्क था कि वे वक्तव्य नहीं, सरकार से समस्या का समाधान चाहते हैं।
सरकार की ओर से वक्तव्य संबंधित आश्वासन नहीं मिलने पर भाटी आमरण अनशन की घोषणा करके वैल में आकर बैठ गए। इनके बाद माकपा के पवन दुग्गल, पेमाराम और भाजपा के राधेश्याम गंगानगर सहित पूरा विपक्ष आकर धरने पर बैठ गया। भाजपा के सचेतक राजेंद्र राठौड़ का कहना था कि जब सदन में गंभीर विषयों पर चर्चा होती है तब न तो अधिकारी अपनी दीर्घा में मौजूद रहते हैं और न ही सरकार यहां मौजूद रहती है।
बाद में विधानसभा अध्यक्ष दीपेंद्रसिंह शेखावत ने जल संसाधन मंत्री महिपाल मदेरणा को वक्तव्य दिए जाने के निर्देश दिए। इस पर जल संसाधन मंत्री मदेरणा ने पेयजल समस्या को गंभीर बताते हुए सोमवार को सरकार की ओर से वक्तव्य दिए जाने का आश्वासन दिया। इसके बाद विधानसभाध्यक्ष शेखावत और भाजपा विधायक दल के उपनेता घनश्याम तिवाड़ी के आग्रह पर भाटी ने आमरण अनशन स्थगित करने की घोषणा की। उन्होंने कहा, अगर सोमवार तक समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे अनशन करेंगे।
जल संकट से लोग परेशान हैं तो विधानसभा भी इस मुद्दे को लेकर रोज गर्मा रही है। शुक्रवार को राज्य में विभिन्न स्थानों पर बादल बरसे, लेकिन सूख रही धरती की प्यास बुझाने में नाकाम रहे। मानसून को आए 10 दिन से ज्यादा हो गए हैं, लेकिन अभी तक कई इलाके तो पूरी तरह सूखे हैं। दूसरी तरफ पानी के जमीनी स्रोत भी बादलों की नाराजगी की वजह से जवाब देने लगे हैं। इसके चलते धीरे-धीरे संकट गहराता जा रहा है।
विपक्ष का धरना, भाटी करेंगे आमरण अनशन
बिगड़ती पेयजल व्यवस्था को लेकर शुक्रवार को विधानसभा में हंगामा हुआ। भाजपा के देवीसिंह भाटी आमरण अनशन पर बैठ गए। बाद में पूरा विपक्ष वैल में आकर उनके समर्थन में बैठ गया। सरकार का वक्तव्य दिलाए जाने की मांग को लेकर विपक्ष ने देर तक नारेबाजी की। पेयजल संकट का यह मुद्दा शुक्रवार को भास्कर ने प्रमुखता से उठाया था। भाजपा विधायक देवीसिंह भाटी ने स्थगन प्रस्ताव के माध्यम से सदन में यह मुद्दा उठाया।
जल संसाधन मंत्री मदेरणा ने पेयजल समस्या को गंभीर बताते हुए सोमवार को सरकार की ओर से वक्तव्य दिए जाने का आश्वासन दिया। भाटी ने कहा कि राजस्थान के 78 कस्बे और 30 हजार से ज्यादा गांव पीने के पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। बीकानेर की कोलायत, लूणकरणसर और खाजूवाला आदि तहसीलों में जबर्दस्त पेयजल संकट है। लोगों को काफी दूरी से पानी लाना पड़ रहा है। सीमा पर तैनात बीएसएफ को भी टैंकरों से पानी मंगवाना पड़ रहा है। प्रदेश में अकाल जैसे हालात हैं, बजट में भी कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई है। सदन में भी विधायक जो समस्याएं बता रहे हैं उसमें 80 प्रतिशत प्रस्ताव पेयजल से संबंधित है। भाटी ने पेयजल के मुद्दे पर सरकार से समस्या का हल निकालने की मांग की। उनका तर्क था कि वे वक्तव्य नहीं, सरकार से समस्या का समाधान चाहते हैं।
सरकार की ओर से वक्तव्य संबंधित आश्वासन नहीं मिलने पर भाटी आमरण अनशन की घोषणा करके वैल में आकर बैठ गए। इनके बाद माकपा के पवन दुग्गल, पेमाराम और भाजपा के राधेश्याम गंगानगर सहित पूरा विपक्ष आकर धरने पर बैठ गया। भाजपा के सचेतक राजेंद्र राठौड़ का कहना था कि जब सदन में गंभीर विषयों पर चर्चा होती है तब न तो अधिकारी अपनी दीर्घा में मौजूद रहते हैं और न ही सरकार यहां मौजूद रहती है।
बाद में विधानसभा अध्यक्ष दीपेंद्रसिंह शेखावत ने जल संसाधन मंत्री महिपाल मदेरणा को वक्तव्य दिए जाने के निर्देश दिए। इस पर जल संसाधन मंत्री मदेरणा ने पेयजल समस्या को गंभीर बताते हुए सोमवार को सरकार की ओर से वक्तव्य दिए जाने का आश्वासन दिया। इसके बाद विधानसभाध्यक्ष शेखावत और भाजपा विधायक दल के उपनेता घनश्याम तिवाड़ी के आग्रह पर भाटी ने आमरण अनशन स्थगित करने की घोषणा की। उन्होंने कहा, अगर सोमवार तक समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे अनशन करेंगे।
Friday, July 10, 2009
बच्चों से रुकवाएंगे बढ़ती आबादी!
Bhaskar नगर संवाददाता Friday, July 10, 2009 04:58 [IST]
श्रीगंगानगर. राज्य सरकार अब बच्चों की रैलियों व नारों के जरिए बढ़ती जनसंख्या को नियंत्रित करेगी। सरकार के इन आदेशों को लेकर स्थानीय अधिकारी असमंजस में हैं कि आखिर तपती गर्मी में बच्चों के हाथों में नारे लिखे तख्तियां पकड़ा कर भला जनसंख्या कैसे नियंत्रित की जा सकेगी। अधिकारियों ने ही सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं कि क्या जनसंख्या नियंत्रण के सभी आधुनिक उपाय विफल हो गए हैं। और, अगर नहीं तो फिर रैलियों व नारों की जरूरत क्यों पड़ी।
फिर भी, विभाग ने 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस के मौके पर जिला मुख्यालय से ग्राम स्तर तक रैलियां निकालने तथा बच्चों के बीच निबंध व नारे लेखन प्रतियोगिताएं करवाने संबंधी सरकारी फरमानों को पूरा करने के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं। सूत्रों के अनुसार राज्य सरकार ने कहा है कि विश्व जनसंख्या दिवस पर जिलेभर में जनसंख्या पखवाड़ा मनाया जाएगा, जो 11 से 26 जुलाई तक चलेगा।
इस दौरान जिला, उपखंड व ग्राम पंचायत मुख्यालय पर रैलियां निकाली जाएंगी, जिसमें तख्तियों व बैनर पर जनसंख्या के दुष्परिणामों की जानकारी दी जाएगी। इसी तरह बढ़ती आबादी के दुष्प्रभावों की जानकारी देने के लिए स्कूली बच्चों में जिला, खंड व ग्राम स्तर पर निबंध व नारा लेखन प्रतियोगिता करवाई जाएगी, साथ ही जिलेभर में विशाल पुरुष नसबंदी शिविर लगाए जाएंगे, जिनमें कंडोम व जनसंख्या नियंत्रण के अन्य साधन भी वितरित होंगे।
सीएम ने लिखा पत्र
सीएम अशोक गहलोत ने भी हर सांसद, मंत्री, विधायक, जिला प्रमुख, प्रधान व सरपंच को जनसंख्या नियंत्रण के लिए पत्र लिखा है। इन सभी से जनसंख्या नियंत्रित करने में सहयोग मांगा गया है। इसके अलावा स्वास्थ्य मंत्री ने भी अपील जारी की है।
श्रीगंगानगर में महिलाएं ही फिक्रमंद
जनसंख्या नियंत्रण में पुरुष भले ही बड़े-बड़े दावे करें लेकिन श्रीगंगानगर में इसके नियंत्रण का दारोमदार महिलाओं ने ही उठा रखा है। तभी तो नसबंदी करवाने में सबसे आगे महिलाएं ही रहती हैं। स्वास्थ्य विभाग के आधिकारिक सूत्रों की मानें तो इस साल विभाग ने 14 हजार 866 नसबंदी का लक्ष्य दिया है, जिनमें अभी तक 3716 नसबंदी हुई हैं। इनमें 371 पुरुष व 3345 महिलाएं शामिल हैं।
बच्चें की आएगी शामत
जनसंख्या दिवस पर शनिवार को एक बार फिर रैली के नाम पर स्कूली बच्चों की ही शामत आएगी। तेज धूप के बीच स्कूली बच्चों को सुखाड़िया सर्किल से हाथों में तख्तियां लिए व नारे लगाते हुए सीएमएचओ कार्यालय तक लाया जाएगा।
रैली प्रस्तावित
जनसंख्या दिवस पर सरकार के निर्देशानुसार रैली निकाली जाएगी। यह रैली सुखाड़िया सर्किल से निकालना प्रस्तावित है। - डा. सरोज गुप्ता, परिवार कल्याण प्रभारी, श्रीगंगानगर
श्रीगंगानगर. राज्य सरकार अब बच्चों की रैलियों व नारों के जरिए बढ़ती जनसंख्या को नियंत्रित करेगी। सरकार के इन आदेशों को लेकर स्थानीय अधिकारी असमंजस में हैं कि आखिर तपती गर्मी में बच्चों के हाथों में नारे लिखे तख्तियां पकड़ा कर भला जनसंख्या कैसे नियंत्रित की जा सकेगी। अधिकारियों ने ही सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं कि क्या जनसंख्या नियंत्रण के सभी आधुनिक उपाय विफल हो गए हैं। और, अगर नहीं तो फिर रैलियों व नारों की जरूरत क्यों पड़ी।
फिर भी, विभाग ने 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस के मौके पर जिला मुख्यालय से ग्राम स्तर तक रैलियां निकालने तथा बच्चों के बीच निबंध व नारे लेखन प्रतियोगिताएं करवाने संबंधी सरकारी फरमानों को पूरा करने के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं। सूत्रों के अनुसार राज्य सरकार ने कहा है कि विश्व जनसंख्या दिवस पर जिलेभर में जनसंख्या पखवाड़ा मनाया जाएगा, जो 11 से 26 जुलाई तक चलेगा।
इस दौरान जिला, उपखंड व ग्राम पंचायत मुख्यालय पर रैलियां निकाली जाएंगी, जिसमें तख्तियों व बैनर पर जनसंख्या के दुष्परिणामों की जानकारी दी जाएगी। इसी तरह बढ़ती आबादी के दुष्प्रभावों की जानकारी देने के लिए स्कूली बच्चों में जिला, खंड व ग्राम स्तर पर निबंध व नारा लेखन प्रतियोगिता करवाई जाएगी, साथ ही जिलेभर में विशाल पुरुष नसबंदी शिविर लगाए जाएंगे, जिनमें कंडोम व जनसंख्या नियंत्रण के अन्य साधन भी वितरित होंगे।
सीएम ने लिखा पत्र
सीएम अशोक गहलोत ने भी हर सांसद, मंत्री, विधायक, जिला प्रमुख, प्रधान व सरपंच को जनसंख्या नियंत्रण के लिए पत्र लिखा है। इन सभी से जनसंख्या नियंत्रित करने में सहयोग मांगा गया है। इसके अलावा स्वास्थ्य मंत्री ने भी अपील जारी की है।
श्रीगंगानगर में महिलाएं ही फिक्रमंद
जनसंख्या नियंत्रण में पुरुष भले ही बड़े-बड़े दावे करें लेकिन श्रीगंगानगर में इसके नियंत्रण का दारोमदार महिलाओं ने ही उठा रखा है। तभी तो नसबंदी करवाने में सबसे आगे महिलाएं ही रहती हैं। स्वास्थ्य विभाग के आधिकारिक सूत्रों की मानें तो इस साल विभाग ने 14 हजार 866 नसबंदी का लक्ष्य दिया है, जिनमें अभी तक 3716 नसबंदी हुई हैं। इनमें 371 पुरुष व 3345 महिलाएं शामिल हैं।
बच्चें की आएगी शामत
जनसंख्या दिवस पर शनिवार को एक बार फिर रैली के नाम पर स्कूली बच्चों की ही शामत आएगी। तेज धूप के बीच स्कूली बच्चों को सुखाड़िया सर्किल से हाथों में तख्तियां लिए व नारे लगाते हुए सीएमएचओ कार्यालय तक लाया जाएगा।
रैली प्रस्तावित
जनसंख्या दिवस पर सरकार के निर्देशानुसार रैली निकाली जाएगी। यह रैली सुखाड़िया सर्किल से निकालना प्रस्तावित है। - डा. सरोज गुप्ता, परिवार कल्याण प्रभारी, श्रीगंगानगर
पानी के लिए प्रदर्शन कर जाम लगाया
भास्कर न्यूज Thursday, July 09, 2009 07:27 [IST]
अलवर. धोबीघट्टा क्षेत्र में पेयजल की समस्या से जूझ रहे लोगों ने बुधवार को अलवर- बहरोड़ मार्ग पर पंजाब नेशनल बैंक के समीप जाम लगाकर प्रदर्शन किया। क्षेत्र के महिला-पुरुष दोपहर १२ बजे पंजाब नेशनल बैंक के पास जमा हो गए। लोगों ने सड़क पर पत्थर डालकर जाम लगा दिया। इस दौरान मार्ग के दोनों ओर वाहनों की कतार लग गई।
जाम की सूचना मिलने के बाद शिवाजीपार्क थाना पुलिस व जलदाय विभाग के एईएन जीपी शर्मा, जेईएन कैलाश सैनी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने लोगों को समझाकर जाम खुलवाया। इसके बाद ही यातायात सामान्य हुआ। एईएन शर्मा ने बताया कि घोबीघट्टा क्षेत्र के खराब हैंडपंप को शीघ्र सही कराया जाएगा।
अलवर. धोबीघट्टा क्षेत्र में पेयजल की समस्या से जूझ रहे लोगों ने बुधवार को अलवर- बहरोड़ मार्ग पर पंजाब नेशनल बैंक के समीप जाम लगाकर प्रदर्शन किया। क्षेत्र के महिला-पुरुष दोपहर १२ बजे पंजाब नेशनल बैंक के पास जमा हो गए। लोगों ने सड़क पर पत्थर डालकर जाम लगा दिया। इस दौरान मार्ग के दोनों ओर वाहनों की कतार लग गई।
जाम की सूचना मिलने के बाद शिवाजीपार्क थाना पुलिस व जलदाय विभाग के एईएन जीपी शर्मा, जेईएन कैलाश सैनी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने लोगों को समझाकर जाम खुलवाया। इसके बाद ही यातायात सामान्य हुआ। एईएन शर्मा ने बताया कि घोबीघट्टा क्षेत्र के खराब हैंडपंप को शीघ्र सही कराया जाएगा।
पीने को काला पानी बाहर भी गंदगी
भास्कर न्यूज Sunday, July 05, 2009 06:25 [IST]
भीलवाड़ा. कच्ची बस्तियों से भी खराब हालत में है इन दिनों शहर की हुसैन कॉलोनी। बस्तिवासियों को पांच दिन में एक बार पानी मिल रहा है वो भी नाकाफी। हुसैन कॉलोनी की शेख वाली गली में प्रवेश के साथ ही नाक पर रुमाल लगाना पड़ता है। शनिवार को सफाई व पेयजल व्यवस्था को लेकर क्षेत्र की महिलाएं सड़क पर आ गई।
मौके पर पहुंचे जेईएन समास्या के निदान में असमर्थ दिखे तो सफाईकर्मी नालियां साफ कर कचरा वहीं छोड़ रवाना हो गए। शास्त्रीनगर, हुसैन कॉलोनी में सीसी रोड तो बन गई मगर नालियों की तरफ किसी का ध्यान नहीं जा रहा है। बार-बार सीसी रोड निर्माण से नालियों की गहराई बढ़ गई। ऐसे में पहले ही सफाई नहीं होने व पानी की निकासी रुक जाने से परेशान क्षेत्रवासियों की समस्या और बढ़ गई।
नगर परिषद वार्ड संख्या 31 के लोगों ने इस संबंध में पूर्व के आयुक्त से भी दो-तीन बार मुलाकात की मगर कोई सुनवाई नहीं हुई। ऐसा हाल क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति का है। पांच दिन में आने वाले पानी का दबाव भी कम रहता है। गली के अंतिम छोर पर रहने वाले लोग तो छह माह से नल में पानी टपकने का इंतजार कर रहे हैं।
शेख क्लिनिक वाली गली में तीन गलियों के लोगों के लिए एक ही हैंडपंप है। उसका पानी भी पीने योग्य नहीं है। इसमें कीचड़ युक्त पानी आ रहा है। शिकायत पर हैंडपंप देखने आए पीएचईडी के जेईएन कमल जैन भी कुछ करने में असमर्थ दिखे। क्षेत्रवासी फरीद मोहम्मद छीपा ने बताया कि सफाई के लिए कई बार परिषद प्रशासन को कहा,मगर कर्मचारी औपचारिकता पूरी कर चले जाते है।
रशीद मोहम्मद देशवाली का कहना है कि चुनाव में राजनेता समस्याओं के निदान का आश्वासन देते हैं। इसके बाद गायब हो जाते हैं। नगर विकास न्यास के पूर्व ट्रस्टी इस्लामुद्दीन शेख ने क्षेत्र में विकास कार्य स्वीकृत करवाए। मगर काम दलगत राजनीति में उलझ कर रह गए।
रतन लाल प्रजापत और छोगालाल धोबी ने बताया कि सोमवार तक क्षेत्र की समस्या का निदान नहीं किया गया तो नगर परिषद कार्यालय में क्षेत्रवासियों के साथ प्रदर्शन करेंगे। शनिवार को महिलाओं के आक्रोश के बाद सफाई तो हुई, मगर सफाईकर्मी गंदगी वहीं छोड़ चले गए।
आज मैं मौके पर जाकर आया हूं। हैंडपंप का पानी पीने योग्य नहीं है। नाली कच्ची है इसलिए गंदा पानी आ रहा है। पाइप बदला नहीं जा सकता है। बच्चे हैंडपंप का पानी नहीं पी ले, इसके लिए इसे कल बंद करवा दिया जाएगा। - कमल जैन जेईएन, पीएचईडी
भीलवाड़ा. कच्ची बस्तियों से भी खराब हालत में है इन दिनों शहर की हुसैन कॉलोनी। बस्तिवासियों को पांच दिन में एक बार पानी मिल रहा है वो भी नाकाफी। हुसैन कॉलोनी की शेख वाली गली में प्रवेश के साथ ही नाक पर रुमाल लगाना पड़ता है। शनिवार को सफाई व पेयजल व्यवस्था को लेकर क्षेत्र की महिलाएं सड़क पर आ गई।
मौके पर पहुंचे जेईएन समास्या के निदान में असमर्थ दिखे तो सफाईकर्मी नालियां साफ कर कचरा वहीं छोड़ रवाना हो गए। शास्त्रीनगर, हुसैन कॉलोनी में सीसी रोड तो बन गई मगर नालियों की तरफ किसी का ध्यान नहीं जा रहा है। बार-बार सीसी रोड निर्माण से नालियों की गहराई बढ़ गई। ऐसे में पहले ही सफाई नहीं होने व पानी की निकासी रुक जाने से परेशान क्षेत्रवासियों की समस्या और बढ़ गई।
नगर परिषद वार्ड संख्या 31 के लोगों ने इस संबंध में पूर्व के आयुक्त से भी दो-तीन बार मुलाकात की मगर कोई सुनवाई नहीं हुई। ऐसा हाल क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति का है। पांच दिन में आने वाले पानी का दबाव भी कम रहता है। गली के अंतिम छोर पर रहने वाले लोग तो छह माह से नल में पानी टपकने का इंतजार कर रहे हैं।
शेख क्लिनिक वाली गली में तीन गलियों के लोगों के लिए एक ही हैंडपंप है। उसका पानी भी पीने योग्य नहीं है। इसमें कीचड़ युक्त पानी आ रहा है। शिकायत पर हैंडपंप देखने आए पीएचईडी के जेईएन कमल जैन भी कुछ करने में असमर्थ दिखे। क्षेत्रवासी फरीद मोहम्मद छीपा ने बताया कि सफाई के लिए कई बार परिषद प्रशासन को कहा,मगर कर्मचारी औपचारिकता पूरी कर चले जाते है।
रशीद मोहम्मद देशवाली का कहना है कि चुनाव में राजनेता समस्याओं के निदान का आश्वासन देते हैं। इसके बाद गायब हो जाते हैं। नगर विकास न्यास के पूर्व ट्रस्टी इस्लामुद्दीन शेख ने क्षेत्र में विकास कार्य स्वीकृत करवाए। मगर काम दलगत राजनीति में उलझ कर रह गए।
रतन लाल प्रजापत और छोगालाल धोबी ने बताया कि सोमवार तक क्षेत्र की समस्या का निदान नहीं किया गया तो नगर परिषद कार्यालय में क्षेत्रवासियों के साथ प्रदर्शन करेंगे। शनिवार को महिलाओं के आक्रोश के बाद सफाई तो हुई, मगर सफाईकर्मी गंदगी वहीं छोड़ चले गए।
आज मैं मौके पर जाकर आया हूं। हैंडपंप का पानी पीने योग्य नहीं है। नाली कच्ची है इसलिए गंदा पानी आ रहा है। पाइप बदला नहीं जा सकता है। बच्चे हैंडपंप का पानी नहीं पी ले, इसके लिए इसे कल बंद करवा दिया जाएगा। - कमल जैन जेईएन, पीएचईडी
असेंबली में पहुंचेगा ‘पानी’
Bhaskar News Tuesday, July 07, 2009 06:07 [IST]
सीकर. जिले के सभी विधायकों ने सीकर जिले को फ्लोराइड से मुक्ति दिलाने के लिए बनाई गई अम्ब्रेला परियोजना की वित्तीय मंजूरी के लिए आवाज उठाने का आश्वासन दिया है। आबकारी व उद्योग मंत्री राजेंद्र पारीक ने कहा कि इसके लिए गंभीरता से प्रयास किए जाएंगे। लक्ष्मणगढ़ विधायक गोविंदसिंह डोटासरा ने कहा कि अम्ब्रेला प्रोजेक्ट की वित्तीय मंजूरी के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।
माकपा विधायक पेमाराम ने कहा कि अम्ब्रेला प्रोजेक्ट की मंजूरी के लिए वे विधानसभा में सरकार को घेरेंगे। आवश्यक होने पर केंद्र सरकार को भी घेरा जाएगा। इस मामले में वे जनता के साथ सड़कों पर उतरेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि जनता फ्लोराइड का धीमा जहर पीने को विवश है, वहीं सरकार चुपचाप तमाशा देख रही है।
‘फ्लोराइड से मुक्ति दिलाओ ’
एमएलए साहब, हमें फ्लोराइड पानी से मुक्ति दिला दीजिए । हमारे दांत भी चले गए। हाथ-पैर काम नहीं कर पा रहे है। हमने तो जैसे-तैसे कर देख लिया, लेकिन हमें अब हमारे बच्चों की चिंता सताने लगी है। ऐसी ही पीड़ा लोगों ने सोमवार को लक्ष्मणगढ़ विधायक गोविंदसिंह डोटासरा के सामने बयां की। विधायक ने मामला विधानसभा में उठाने का भरोसा जताया।
फ्लोराइड मुक्ति के लिए सौंपा ज्ञापन
लक्ष्मणगढ़ की दिसनाऊ ग्राम पंचायत के रिणु गांव के लोगों ने सक्रियता दिखाते हुए अम्ब्रेला प्रोजेक्ट की मंजूरी के लिए सोमवार को जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। लक्ष्मणगढ़ विधायक गोविंदसिंह डोटासरा के नेतृत्व में दिए ज्ञापन में फ्लोराइड पानी पीने से होने वाली बीमारियों का भी उल्लेख किया गया।
ज्ञापन देने वाले शिष्टमंडल में सरपंच प्रकाश ख्यालिया, तिड़ोकी बड़ी के सरपंच भवानीसिंह, खेड़ी राडान के सरपंच छाजूराम, पंचायत समिति सदस्य जगदीश पिलानियां, सांवरमल, सांवत खां, राधेश्याम शर्मा, जोगेंद्रसिंह, मूलदास स्वामी, पूर्व सरपंच भंवरलाल सोनी, मूलाराम, बनवारी, महेशकुमार,मालू खां, पंच जीवणराम, निसार खां, सांवरमल शर्मा आदि ग्रामीण शामिल थे।
284 गांवों की भलाई की किसी को फिक्र नहीं
कृष्णकुमार शर्मा Monday, July 06, 2009 04:56 [IST]
सीकर. फ्लोराइड की समस्या को मुद्दा बनाकर लोकसभा और विधानसभा पहुंचने वाले जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के कारण क्षेत्र की महत्वाकांक्षी अंब्रेला परियोजना अभी तक सिरे नहीं चढ़ पाई है। 284 गांवों के लाखों लोगों को फ्लोराइड से मुक्ति दिलाने के मकसद से बनाई गई यह योजना अब तक जयपुर के जलदाय विभाग के दफ्तर से बाहर नहीं निकली, जबकि इसे दिल्ली में केंद्र सरकार को भेजना था। बताया जा रहा है कि राज्य सरकार को फंडिंग एजेंसी नहीं मिली है।
इसलिए यह योजना फाइल में अटकी पड़ी है। जलदाय विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वे दो बाद इस प्रोजेक्ट को जयपुर भेज चुके हैं। पहले यह प्रोजेक्ट 332.34 करोड़ का बनाया था। समय पर मूर्त रूप नहीं मिलने के कारणइसे फिर से भेजा गया है, जिसमें 564 करोड़ रुपए खर्च का प्रस्ताव दिया गया। वर्ल्ड बैंक सरीखी एजेंसी के इंतजार में मामला ज्यों का त्यों अटका हुआ है।
राज्य सरकार ने जर्मन सरकार से सहायता से चूरू व हनुमानगढ़ जिलों के गांवों में मीठा पानी मुहैया कराने की दिशा में काम शुरू कर दिया, लेकिन इस पर किसी ओर से पहल नहीं हो रही। वर्ष 2006 में ही इस मुद्दे पर विधानसभा में भी चर्चा हुई। तब इसे अगले वित्तीय वर्ष में स्वीकृत करने का आश्वासन दिया गया, लेकिन नई सरकार आने तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। पूर्व केंद्रीय मंत्री शीशराम ओला ने भी भरोसा दिलाया था कि राज्य सरकार प्रपोजल भेजती है तो वे केंद्र सरकार से स्वीकृति दिला देंगे।
सीकर. जिले के सभी विधायकों ने सीकर जिले को फ्लोराइड से मुक्ति दिलाने के लिए बनाई गई अम्ब्रेला परियोजना की वित्तीय मंजूरी के लिए आवाज उठाने का आश्वासन दिया है। आबकारी व उद्योग मंत्री राजेंद्र पारीक ने कहा कि इसके लिए गंभीरता से प्रयास किए जाएंगे। लक्ष्मणगढ़ विधायक गोविंदसिंह डोटासरा ने कहा कि अम्ब्रेला प्रोजेक्ट की वित्तीय मंजूरी के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।
माकपा विधायक पेमाराम ने कहा कि अम्ब्रेला प्रोजेक्ट की मंजूरी के लिए वे विधानसभा में सरकार को घेरेंगे। आवश्यक होने पर केंद्र सरकार को भी घेरा जाएगा। इस मामले में वे जनता के साथ सड़कों पर उतरेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि जनता फ्लोराइड का धीमा जहर पीने को विवश है, वहीं सरकार चुपचाप तमाशा देख रही है।
‘फ्लोराइड से मुक्ति दिलाओ ’
एमएलए साहब, हमें फ्लोराइड पानी से मुक्ति दिला दीजिए । हमारे दांत भी चले गए। हाथ-पैर काम नहीं कर पा रहे है। हमने तो जैसे-तैसे कर देख लिया, लेकिन हमें अब हमारे बच्चों की चिंता सताने लगी है। ऐसी ही पीड़ा लोगों ने सोमवार को लक्ष्मणगढ़ विधायक गोविंदसिंह डोटासरा के सामने बयां की। विधायक ने मामला विधानसभा में उठाने का भरोसा जताया।
फ्लोराइड मुक्ति के लिए सौंपा ज्ञापन
लक्ष्मणगढ़ की दिसनाऊ ग्राम पंचायत के रिणु गांव के लोगों ने सक्रियता दिखाते हुए अम्ब्रेला प्रोजेक्ट की मंजूरी के लिए सोमवार को जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। लक्ष्मणगढ़ विधायक गोविंदसिंह डोटासरा के नेतृत्व में दिए ज्ञापन में फ्लोराइड पानी पीने से होने वाली बीमारियों का भी उल्लेख किया गया।
ज्ञापन देने वाले शिष्टमंडल में सरपंच प्रकाश ख्यालिया, तिड़ोकी बड़ी के सरपंच भवानीसिंह, खेड़ी राडान के सरपंच छाजूराम, पंचायत समिति सदस्य जगदीश पिलानियां, सांवरमल, सांवत खां, राधेश्याम शर्मा, जोगेंद्रसिंह, मूलदास स्वामी, पूर्व सरपंच भंवरलाल सोनी, मूलाराम, बनवारी, महेशकुमार,मालू खां, पंच जीवणराम, निसार खां, सांवरमल शर्मा आदि ग्रामीण शामिल थे।
284 गांवों की भलाई की किसी को फिक्र नहीं
कृष्णकुमार शर्मा Monday, July 06, 2009 04:56 [IST]
सीकर. फ्लोराइड की समस्या को मुद्दा बनाकर लोकसभा और विधानसभा पहुंचने वाले जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के कारण क्षेत्र की महत्वाकांक्षी अंब्रेला परियोजना अभी तक सिरे नहीं चढ़ पाई है। 284 गांवों के लाखों लोगों को फ्लोराइड से मुक्ति दिलाने के मकसद से बनाई गई यह योजना अब तक जयपुर के जलदाय विभाग के दफ्तर से बाहर नहीं निकली, जबकि इसे दिल्ली में केंद्र सरकार को भेजना था। बताया जा रहा है कि राज्य सरकार को फंडिंग एजेंसी नहीं मिली है।
इसलिए यह योजना फाइल में अटकी पड़ी है। जलदाय विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वे दो बाद इस प्रोजेक्ट को जयपुर भेज चुके हैं। पहले यह प्रोजेक्ट 332.34 करोड़ का बनाया था। समय पर मूर्त रूप नहीं मिलने के कारणइसे फिर से भेजा गया है, जिसमें 564 करोड़ रुपए खर्च का प्रस्ताव दिया गया। वर्ल्ड बैंक सरीखी एजेंसी के इंतजार में मामला ज्यों का त्यों अटका हुआ है।
राज्य सरकार ने जर्मन सरकार से सहायता से चूरू व हनुमानगढ़ जिलों के गांवों में मीठा पानी मुहैया कराने की दिशा में काम शुरू कर दिया, लेकिन इस पर किसी ओर से पहल नहीं हो रही। वर्ष 2006 में ही इस मुद्दे पर विधानसभा में भी चर्चा हुई। तब इसे अगले वित्तीय वर्ष में स्वीकृत करने का आश्वासन दिया गया, लेकिन नई सरकार आने तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। पूर्व केंद्रीय मंत्री शीशराम ओला ने भी भरोसा दिलाया था कि राज्य सरकार प्रपोजल भेजती है तो वे केंद्र सरकार से स्वीकृति दिला देंगे।
जिलेभर में पेयजल के लिए भी मारामारी
Bhaskar News Thursday, July 09, 2009 06:59 [IST]
सीकर. जिलेभर में जारी अघोषित बिजली कटौती के कारण पेयजल समस्या भीषण रूप लेती जा रही है। ग्रामीण इलाकों में घोषित समय से अधिक कटौती रहने के कारण पानी के लिए लंबी कतारें लगना आम हो गया है। जिले के 196 गांव व ढाणियों में 305 व नीमकाथाना कस्बे में 45 टैंकर सप्लाई हो रहे हैं।
बिजली विभाग के अधिकारियों के मुताबिक बिजली कटौती के कारण सप्लाई देने में समस्या हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि जिले के नीमकाथाना, श्रीमाधोपुर, खंडेला व दांतारामगढ़ इलाके टै्रंकर चालक पूरी सप्लाई नहीं कर रहे हैं। वहीं जिले के दर्जनों गांवों में समय पर सप्लाई नहीं पहुंचने से पेयजल संकट गहरा रहा है। वहीं जलदाय विभाग के अधिकारियों की ओर से समय पर सप्लाई नहीं पहुंचाने वाले ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की चेतावनी दी जा रही है।
सीकर. जिलेभर में जारी अघोषित बिजली कटौती के कारण पेयजल समस्या भीषण रूप लेती जा रही है। ग्रामीण इलाकों में घोषित समय से अधिक कटौती रहने के कारण पानी के लिए लंबी कतारें लगना आम हो गया है। जिले के 196 गांव व ढाणियों में 305 व नीमकाथाना कस्बे में 45 टैंकर सप्लाई हो रहे हैं।
बिजली विभाग के अधिकारियों के मुताबिक बिजली कटौती के कारण सप्लाई देने में समस्या हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि जिले के नीमकाथाना, श्रीमाधोपुर, खंडेला व दांतारामगढ़ इलाके टै्रंकर चालक पूरी सप्लाई नहीं कर रहे हैं। वहीं जिले के दर्जनों गांवों में समय पर सप्लाई नहीं पहुंचने से पेयजल संकट गहरा रहा है। वहीं जलदाय विभाग के अधिकारियों की ओर से समय पर सप्लाई नहीं पहुंचाने वाले ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की चेतावनी दी जा रही है।
नलों में आया दूषित पानी
भास्कर न्यूज Thursday, July 09, 2009 07:07 [IST]
झुंझुनूं. वार्ड नंबर पांच के घरों में बुधवार को नलों में गंदा पानी आया। इमाम नगर के अब्दुल मजीद अब्बासी ने बताया कि बुधवार को सुबह से ही नलों में पानी के साथ कचरा व मिट्टी आ रही है।
गंदे पानी को देख वार्ड के हासम अली भाटी, गुलाब नबी कुरेशी, बिलाल कुरेशी, हाजी अली मोहम्मद व निजामुद्दीन बगड़िया आदि इकट्ठा हुए और पीएचईडी के अधिकारियों से इसकी शिकायत करने की सोची। जब लोगों ने पता करने की कोशिश की गंदा पानी कहां से आ रहा है।
जब रोड नंबर दो स्थित नालियों से जबरदस्त पानी बहता देखा तो वार्डवासियों ने अनुमान लगाया कि यहां पर लाइन टूटी हुई हो सकती है। सफाई कर्मचारियों ने नाली की सफाई करवाई। वार्डवासियों ने पीएचईडी एक्सईएन भरतलाल मीणा से संपर्क करना चाहा तो वे नहीं मिले। मोहल्लेवासी एक्सईएन के निवास पर जाकर मिले और गंदा पानी आने की शिकायत की।
झुंझुनूं. वार्ड नंबर पांच के घरों में बुधवार को नलों में गंदा पानी आया। इमाम नगर के अब्दुल मजीद अब्बासी ने बताया कि बुधवार को सुबह से ही नलों में पानी के साथ कचरा व मिट्टी आ रही है।
गंदे पानी को देख वार्ड के हासम अली भाटी, गुलाब नबी कुरेशी, बिलाल कुरेशी, हाजी अली मोहम्मद व निजामुद्दीन बगड़िया आदि इकट्ठा हुए और पीएचईडी के अधिकारियों से इसकी शिकायत करने की सोची। जब लोगों ने पता करने की कोशिश की गंदा पानी कहां से आ रहा है।
जब रोड नंबर दो स्थित नालियों से जबरदस्त पानी बहता देखा तो वार्डवासियों ने अनुमान लगाया कि यहां पर लाइन टूटी हुई हो सकती है। सफाई कर्मचारियों ने नाली की सफाई करवाई। वार्डवासियों ने पीएचईडी एक्सईएन भरतलाल मीणा से संपर्क करना चाहा तो वे नहीं मिले। मोहल्लेवासी एक्सईएन के निवास पर जाकर मिले और गंदा पानी आने की शिकायत की।
घटता पानी, बढ़ती चिंता
Bhaskar नगर संवाददाता Monday, July 06, 2009 04:32 [IST]
हनुमानगढ़. पौंग बांध में पानी की आवक घटने के साथ जलस्तर में गिरावट जारी है। दो दिन में बांध का जल स्तर डेढ़ फीट नीचे हो गया। इससे सिंचाई महकमे के अधिकारियों की चिंता बढ़ती जा रही है कि आखिर खरीफ फसलों की प्यास बुझाने के लिए कहां से पानी लिया जाए। उधर भाखड़ा के अधिकारियों से सजगता दिखाते हुए अपने हिस्से का पूरा पानी ले लिया। इससे इंदिरा गांधी नहर में पानी और घट गया। जानकारी के अनुसार शुक्रवार को पौंग बांध का जल स्तर 1275.70 फीट था जो रविवार को घटकर 1274.06 फीट हो गया। पानी की आवक भी घट गई है।
शुक्रवार को बांध में 4987 क्यूसेक पानी की आवक हो रही थी जो रविवार को घटकर 2200 क्यूसेक रह गई। पानी की निकासी पिछले चार दिनों से लगभग सात हजार क्यूसेक हो रही है। सिंचाई विभाग के अधिकारियों के अनुसार पानी की आवक घटने के कारण जलस्तर डाउन आ रहा है। उधर रविवार को इंदिरा गांधी नहर में मात्र पांच क्यूसेक पानी की बढ़ोतरी हुई। शनिवार को हरिके से इंदिरा गांधी नहर को 3905 क्यूसेक पानी मिल रहा था जो रविवार को बढ़कर 3910 क्यूसेक हो गया।
अधिकारियों के बार-बार आग्रह करने के बाद भी पंजाब द्वारा इंदिरा गांधी नहर में पानी की बढ़ोतरी नहीं की जा रही है। राज्य सरकार व सिंचाई विभाग के प्रयासों के बावजूद पानी नहीं बढ़ने से क्षेत्र के किसानों में बेचैनी बढ़ती जा रही है। काश्तकारों का कहना है कि सिंचाई पानी के अभाव में नरमा-कपास की फसलों की बढ़वार रुक गई है। सिंचाई के साथ खाद का छिड़काव करने से ही फसलों की बढ़वार शुरू हो सकती है।
उल्लेखनीय है कि दो दिन पूर्व हरिके से इंदिरा गांधी नहर में 400 क्यूसेक पानी बढ़ने से अधिकारियों ने थोड़ी राहत की सांस ली थी कि भाखड़ा के अधिकारियों ने उस पर अपना हक जताते हुए भाखड़ा प्रणाली में शेयर के मुताबिक पानी देने की मांग कर दी। शेयर निर्धारित होने के कारण पंजाब से भाखड़ा को पूरा पानी मिलना भी शुरू हो गया। अब इंदिरा गांधी नहर परियोजना के अधिकारी पंजाब के अधिकारियों से पानी और बढ़ाने का आग्रह कर रहे हैं।
प्रयास जारी
पंजाब के अधिकारियों से संपर्क कर पानी बढ़वाने के प्रयास किए जा रहे हैं। - अरुण कुमार सिडाना, एक्सईएन फीडर हनुमानगढ
हनुमानगढ़. पौंग बांध में पानी की आवक घटने के साथ जलस्तर में गिरावट जारी है। दो दिन में बांध का जल स्तर डेढ़ फीट नीचे हो गया। इससे सिंचाई महकमे के अधिकारियों की चिंता बढ़ती जा रही है कि आखिर खरीफ फसलों की प्यास बुझाने के लिए कहां से पानी लिया जाए। उधर भाखड़ा के अधिकारियों से सजगता दिखाते हुए अपने हिस्से का पूरा पानी ले लिया। इससे इंदिरा गांधी नहर में पानी और घट गया। जानकारी के अनुसार शुक्रवार को पौंग बांध का जल स्तर 1275.70 फीट था जो रविवार को घटकर 1274.06 फीट हो गया। पानी की आवक भी घट गई है।
शुक्रवार को बांध में 4987 क्यूसेक पानी की आवक हो रही थी जो रविवार को घटकर 2200 क्यूसेक रह गई। पानी की निकासी पिछले चार दिनों से लगभग सात हजार क्यूसेक हो रही है। सिंचाई विभाग के अधिकारियों के अनुसार पानी की आवक घटने के कारण जलस्तर डाउन आ रहा है। उधर रविवार को इंदिरा गांधी नहर में मात्र पांच क्यूसेक पानी की बढ़ोतरी हुई। शनिवार को हरिके से इंदिरा गांधी नहर को 3905 क्यूसेक पानी मिल रहा था जो रविवार को बढ़कर 3910 क्यूसेक हो गया।
अधिकारियों के बार-बार आग्रह करने के बाद भी पंजाब द्वारा इंदिरा गांधी नहर में पानी की बढ़ोतरी नहीं की जा रही है। राज्य सरकार व सिंचाई विभाग के प्रयासों के बावजूद पानी नहीं बढ़ने से क्षेत्र के किसानों में बेचैनी बढ़ती जा रही है। काश्तकारों का कहना है कि सिंचाई पानी के अभाव में नरमा-कपास की फसलों की बढ़वार रुक गई है। सिंचाई के साथ खाद का छिड़काव करने से ही फसलों की बढ़वार शुरू हो सकती है।
उल्लेखनीय है कि दो दिन पूर्व हरिके से इंदिरा गांधी नहर में 400 क्यूसेक पानी बढ़ने से अधिकारियों ने थोड़ी राहत की सांस ली थी कि भाखड़ा के अधिकारियों ने उस पर अपना हक जताते हुए भाखड़ा प्रणाली में शेयर के मुताबिक पानी देने की मांग कर दी। शेयर निर्धारित होने के कारण पंजाब से भाखड़ा को पूरा पानी मिलना भी शुरू हो गया। अब इंदिरा गांधी नहर परियोजना के अधिकारी पंजाब के अधिकारियों से पानी और बढ़ाने का आग्रह कर रहे हैं।
प्रयास जारी
पंजाब के अधिकारियों से संपर्क कर पानी बढ़वाने के प्रयास किए जा रहे हैं। - अरुण कुमार सिडाना, एक्सईएन फीडर हनुमानगढ
शुद्ध पेयजल भी मयस्सर नहीं!
Bhaskar नगर संवाददाता Friday, July 10, 2009 05:16 [IST]
हनुमानगढ़. राज्य सरकार एक तरफ जहां खाद्य पदार्थो की शुद्धता परखने के लिए बहुचर्चित ‘शुद्ध के लिए युद्ध’ अभियान चला रही है, वहीं हनुमानगढ़ जिले के करीब 89 गांवों के लाखों लोगों को शुद्ध पानी का घूंट तक नसीब नहीं हो रहा है। इन गांवों के वाशिंदों की त्रासदी यह है कि फ्लोराईड मिटीगेशन प्रोग्राम भी राहत दिलाने में नाकाम रहा है। खास बात है कि राज्य सरकार ने उन क्षेत्रों में इस योजना की शुरुआत की थी जहां डेढ़ पीपीएम से अधिक मात्रा में फ्लोराइड की शिकायत थी। इसके तहत जिले के 89 गांवों को शामिल किया गया था।
सेम से राहत, समस्या यथावत
जिले के टिब्बी, हनुमानगढ़ व नोहर तहसील में भी कुछ गांवों में फ्लोराइडयुक्त पानी की शिकायत है लेकिन रावतसर तहसील के सर्वाधिक गांव इसकी चपेट में हैं। जानकारों के मुताबिक सेम प्रभावित होने के कारण क्षेत्र के गांवों में यह समस्या रही लेकिन सेम निवारण में काफी सफलता मिलने के बाद भी शोरायुक्त पानी का संकट बरकरार है।
इन गांवों में गंभीर समस्या
पीएचईडी ने जिले के 89 गांवों में फ्लोराइडयुक्त प्रभावित क्षेत्र में शामिल किया गया है। इनमें रावतसर क्षेत्र के पांच केकेएम, एक एसपीएम, दस एसपीएम, चार केकेएसएम, तीन केकेएम, दो केकेएसएम-ए, एक केबीएम, 19 आरडब्ल्यूडी, दो एसपीएम ए, दो केकेएम, पांच केकेएसएम, नौ केएम, दो एसपीडी, दो केडब्ल्यूडी, चार बीडब्ल्यूएम, सात एसपीडी, दो बीपीएम, दो एएसएम, 10 बीपीएम, 15 एनडब्ल्यूडी, दो केएचडी, तीन केडीएम, पांच एसपीएम, एक एएसएम, 11 केडब्ल्यूडी, दो आरडब्ल्यूएसएम, छह केडब्ल्यूडी, एक आरडब्ल्यूएसएम, तीन एएम, दो सीवाईएम, छह डीडब्ल्यूडी, सात, आठ व एएम, एक डीडब्ल्यूएम, 75 आरडी, तीन जेडडब्ल्यूएम, चार केकेएम, 122 आरडी, पांच एएम, चार आरपीएम, एकएनजीएम, 13 केडब्ल्यूडी-ए, ए एएम व एक आरपीएम शामिल हैं।
इसी तरह नोहर क्षेत्र के गांव एक व पांच केएम, 18 आरडब्ल्यूडी, टिब्बी क्षेत्र के गांव आठ एफटीपी-बी, 11 एफटीपी, छह केएचआर, 11-12 जीजीआर, एक बीआरडब्ल्यू, दो केएचआर, 18 एनजीसी, पांच आरडब्ल्यूडी, 10, 19, 21-22-27-28 एनजीसी, 14 जीजीआर, एक एचएमएच, सात-आठ आरडब्ल्यूडी, 15 जीजीआर, दो एसबीएन, एक एनजीआर, दो जीजीआर, दो आरके, पांच टीएलडब्ल्यू, तीन आरके, एक आरके, पांच आरके, 16 जीजीआर व तीन जीजीआर में फ्लोराइडयुक्त की मात्रा परिमाप से अधिक है। इसी तरह हनुमानगढ़ तहसील के गांव आठ एमडब्ल्यूएस, दो एलके व सात एमडब्ल्यूएम फ्लोराइड प्रभावित क्षेत्र है।
मंत्री को भी थी हकीकत की जानकारी
इलाके में दूषित जलापूर्ति को लेकर जब पिछली सरकार के दौरान विधानसभा में मामला उठाया गया तो तत्कालीन जनस्वास्थ्य मंत्री ने स्वीकार किया था कि हैंडपंप व डीसीबी से जलापूर्ति वाले 89 गांवों में फ्लोराइड की मात्रा परिमाप से अधिक है। उन्होंने समस्या से शीघ्र निजात दिलाने का भरोसा दिलाया था लेकिन पांच साल में सरकार ने इस गंभीर मसले पर चुप्पी साधे रखी।
डीफ्लोरीडेशन संयंत्र लगाने पर विचार
राज्य सरकार फ्लोराइड प्रभावित क्षेत्रों में नहरी पानी उपलब्ध करवाने पर विचार कर रही है। प्रभावित गांवों में हैंडपंपों को डीफ्लोरीडेशन इकाइयों से जोड़ने का भी प्रस्ताव है तथा जलाशयों का निर्माण कर उन पर डीफ्लोरीडेशन संयंत्र लगाने पर मंथन जारी है। चूंकि फ्लोराइड प्रभावित अधिकांश गांवों में हैंडपंप से पेयजल उपलब्ध हो रहा है, ऐसे में भौगोलिक व भूगर्भीय विषमताओं के कारण पेयजल की गुणवत्ता प्रभाविक होना स्वाभाविक है।
हनुमानगढ़. राज्य सरकार एक तरफ जहां खाद्य पदार्थो की शुद्धता परखने के लिए बहुचर्चित ‘शुद्ध के लिए युद्ध’ अभियान चला रही है, वहीं हनुमानगढ़ जिले के करीब 89 गांवों के लाखों लोगों को शुद्ध पानी का घूंट तक नसीब नहीं हो रहा है। इन गांवों के वाशिंदों की त्रासदी यह है कि फ्लोराईड मिटीगेशन प्रोग्राम भी राहत दिलाने में नाकाम रहा है। खास बात है कि राज्य सरकार ने उन क्षेत्रों में इस योजना की शुरुआत की थी जहां डेढ़ पीपीएम से अधिक मात्रा में फ्लोराइड की शिकायत थी। इसके तहत जिले के 89 गांवों को शामिल किया गया था।
सेम से राहत, समस्या यथावत
जिले के टिब्बी, हनुमानगढ़ व नोहर तहसील में भी कुछ गांवों में फ्लोराइडयुक्त पानी की शिकायत है लेकिन रावतसर तहसील के सर्वाधिक गांव इसकी चपेट में हैं। जानकारों के मुताबिक सेम प्रभावित होने के कारण क्षेत्र के गांवों में यह समस्या रही लेकिन सेम निवारण में काफी सफलता मिलने के बाद भी शोरायुक्त पानी का संकट बरकरार है।
इन गांवों में गंभीर समस्या
पीएचईडी ने जिले के 89 गांवों में फ्लोराइडयुक्त प्रभावित क्षेत्र में शामिल किया गया है। इनमें रावतसर क्षेत्र के पांच केकेएम, एक एसपीएम, दस एसपीएम, चार केकेएसएम, तीन केकेएम, दो केकेएसएम-ए, एक केबीएम, 19 आरडब्ल्यूडी, दो एसपीएम ए, दो केकेएम, पांच केकेएसएम, नौ केएम, दो एसपीडी, दो केडब्ल्यूडी, चार बीडब्ल्यूएम, सात एसपीडी, दो बीपीएम, दो एएसएम, 10 बीपीएम, 15 एनडब्ल्यूडी, दो केएचडी, तीन केडीएम, पांच एसपीएम, एक एएसएम, 11 केडब्ल्यूडी, दो आरडब्ल्यूएसएम, छह केडब्ल्यूडी, एक आरडब्ल्यूएसएम, तीन एएम, दो सीवाईएम, छह डीडब्ल्यूडी, सात, आठ व एएम, एक डीडब्ल्यूएम, 75 आरडी, तीन जेडडब्ल्यूएम, चार केकेएम, 122 आरडी, पांच एएम, चार आरपीएम, एकएनजीएम, 13 केडब्ल्यूडी-ए, ए एएम व एक आरपीएम शामिल हैं।
इसी तरह नोहर क्षेत्र के गांव एक व पांच केएम, 18 आरडब्ल्यूडी, टिब्बी क्षेत्र के गांव आठ एफटीपी-बी, 11 एफटीपी, छह केएचआर, 11-12 जीजीआर, एक बीआरडब्ल्यू, दो केएचआर, 18 एनजीसी, पांच आरडब्ल्यूडी, 10, 19, 21-22-27-28 एनजीसी, 14 जीजीआर, एक एचएमएच, सात-आठ आरडब्ल्यूडी, 15 जीजीआर, दो एसबीएन, एक एनजीआर, दो जीजीआर, दो आरके, पांच टीएलडब्ल्यू, तीन आरके, एक आरके, पांच आरके, 16 जीजीआर व तीन जीजीआर में फ्लोराइडयुक्त की मात्रा परिमाप से अधिक है। इसी तरह हनुमानगढ़ तहसील के गांव आठ एमडब्ल्यूएस, दो एलके व सात एमडब्ल्यूएम फ्लोराइड प्रभावित क्षेत्र है।
मंत्री को भी थी हकीकत की जानकारी
इलाके में दूषित जलापूर्ति को लेकर जब पिछली सरकार के दौरान विधानसभा में मामला उठाया गया तो तत्कालीन जनस्वास्थ्य मंत्री ने स्वीकार किया था कि हैंडपंप व डीसीबी से जलापूर्ति वाले 89 गांवों में फ्लोराइड की मात्रा परिमाप से अधिक है। उन्होंने समस्या से शीघ्र निजात दिलाने का भरोसा दिलाया था लेकिन पांच साल में सरकार ने इस गंभीर मसले पर चुप्पी साधे रखी।
डीफ्लोरीडेशन संयंत्र लगाने पर विचार
राज्य सरकार फ्लोराइड प्रभावित क्षेत्रों में नहरी पानी उपलब्ध करवाने पर विचार कर रही है। प्रभावित गांवों में हैंडपंपों को डीफ्लोरीडेशन इकाइयों से जोड़ने का भी प्रस्ताव है तथा जलाशयों का निर्माण कर उन पर डीफ्लोरीडेशन संयंत्र लगाने पर मंथन जारी है। चूंकि फ्लोराइड प्रभावित अधिकांश गांवों में हैंडपंप से पेयजल उपलब्ध हो रहा है, ऐसे में भौगोलिक व भूगर्भीय विषमताओं के कारण पेयजल की गुणवत्ता प्रभाविक होना स्वाभाविक है।
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